TMC Congress Merger: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता दिख रहा है। पार्टी के कई विधायक और सांसद अलग राह पकड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व की ओर से ममता बनर्जी को लेकर एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव सामने आने की चर्चा ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने का प्रस्ताव दिया है। बताया जा रहा है कि इसके बदले ममता बनर्जी को कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने की पेशकश की गई है। वहीं उनके भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी को पार्टी में महासचिव स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात भी सामने आई है।
चुनावी झटके के बाद बढ़ीं मुश्किलें| TMC Congress Merger
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें लगातार सामने आने लगीं। जानकारी के मुताबिक, पार्टी के कई विधायक नेतृत्व से नाराज होकर अलग गुट बनाने की दिशा में बढ़ चुके हैं। बताया जा रहा है कि 80 विधायकों में से 58 विधायक अलग समूह तैयार कर चुके हैं। वहीं दिल्ली में भी लगभग 20 सांसदों के पार्टी से दूरी बनाने की चर्चा है। हालांकि इन दावों को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इतना जरूर है कि पार्टी के भीतर असहज स्थिति बनी हुई है।
सोनिया गांधी ने दिया बड़ा सुझाव
सूत्रों का दावा है कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी से बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में टीएमसी का कांग्रेस में विलय एक बेहतर विकल्प हो सकता है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि भाजपा की राजनीतिक रणनीतियों और बढ़ते दबाव के बीच क्षेत्रीय दलों के लिए अलग-अलग लड़ाई लड़ना मुश्किल हो सकता है। इसी संदर्भ में ममता बनर्जी को कांग्रेस के साथ आने का सुझाव दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी को लेकर भी कुछ विरोधी स्वर मौजूद हैं, जिससे टीएमसी नेतृत्व के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
ममता ने मांगा समय
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने इस पूरे मामले पर विचार करने के लिए कुछ समय मांगा है। हालांकि कांग्रेस और टीएमसी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस संभावित घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की लंबी मुलाकात
इसी बीच राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की मुलाकात ने भी अटकलों को और हवा दे दी है। जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच 10 जनपथ पर करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि बैठक में पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात, हालिया चुनावी परिणामों और विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। यह भी बताया जा रहा है कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और दोनों पक्षों ने कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
कांग्रेस ने बुलाई अहम बैठक
इन राजनीतिक चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने भी संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुला ली है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जानकारी दी है कि 11 जून को इंदिरा भवन में एआईसीसी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे। माना जा रहा है कि बैठक में संगठन की रणनीति, विपक्षी दलों के साथ तालमेल और आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा हो सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी कांग्रेस के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाएंगी या टीएमसी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ेगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे घटनाक्रमों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरणों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
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