India US Trade Dispute: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिका ने भारत के टेक्सटाइल और स्टील सेक्टर पर जरूरत से ज्यादा उत्पादन करने का आरोप लगाया है। वॉशिंगटन का दावा है कि भारत समेत कुछ देश सरकारी नीतियों और सब्सिडी के सहारे कई उद्योगों में क्षमता से अधिक उत्पादन कर रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है। हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि देश का उत्पादन उसकी घरेलू जरूरतों और बढ़ती आबादी की मांग के अनुरूप है।
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि 140 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा उत्पादन किसी भी तरह से “ओवरकैपेसिटी” नहीं माना जा सकता।
अमेरिका ने क्यों उठाए सवाल? India US Trade Dispute
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ‘सेक्शन 301’ के तहत एक व्यापक जांच शुरू की। इस जांच में अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर आरोप लगाया कि वे सरकारी समर्थन और सब्सिडी की मदद से स्टील, टेक्सटाइल, सोलर मॉड्यूल और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं।
अमेरिका का तर्क है कि इस तरह का उत्पादन वैश्विक बाजार में असंतुलन पैदा कर सकता है और दूसरे देशों के उद्योगों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसके साथ ही अमेरिका ने भारत के साथ अपने व्यापार घाटे और माल व्यापार से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि वाशिंगटन भारतीय उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की संभावना पर भी विचार कर रहा है।
भारत ने दिया कड़ा जवाब
अमेरिकी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त व्यापार सचिव अमिताभ कुमार ने स्पष्ट कहा कि भारत के स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर में किसी तरह की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की उत्पादन क्षमता का मूल्यांकन उसकी आबादी, घरेलू मांग और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। भारत जैसे विशाल देश में बड़ी मात्रा में उत्पादन होना स्वाभाविक है क्योंकि यहां उपभोक्ताओं की संख्या भी बहुत अधिक है।
अमिताभ कुमार ने कहा कि भारत के नजरिए से देखें तो देश में किसी भी क्षेत्र में ओवरकैपेसिटी जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कपड़ा उद्योग में खासकर मानव निर्मित फाइबर की प्रति व्यक्ति खपत अभी भी विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घरेलू मांग अभी और बढ़ने की संभावना रखती है।
टेक्सटाइल उद्योग ने भी खारिज किए अमेरिकी दावे
भारतीय कपड़ा उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठन TEXPROCIL ने भी अमेरिकी दावों को चुनौती दी है। संगठन ने यूएसटीआर को भेजे गए अपने जवाब में कहा कि भारत के सूती कपड़ा उद्योग का 80 प्रतिशत से अधिक उत्पादन घरेलू बाजार में ही खप जाता है। संगठन का कहना है कि जब अधिकांश उत्पादन देश के भीतर ही उपयोग हो रहा है, तो इसे निर्यात-आधारित अतिरिक्त क्षमता कहना सही नहीं होगा। केवल लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन ही विदेशों में निर्यात किया जाता है।
स्टील सेक्टर को लेकर भी भारत का तर्क
भारत ने स्टील उद्योग के मामले में भी अमेरिका के आरोपों को खारिज किया है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक होने के बावजूद भारत में प्रति व्यक्ति स्टील खपत अभी भी कई विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। सरकार का कहना है कि देश में हो रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सड़क निर्माण, रेलवे विस्तार और शहरी विकास योजनाओं के कारण स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है।
दबाव की रणनीति मान रहे विशेषज्ञ
कई व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा ‘सेक्शन 301’ के तहत उठाए गए मुद्दे केवल अतिरिक्त उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। उनका कहना है कि यह भारत पर दबाव बनाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। जानकारों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए और अधिक खोले। इसके अलावा ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।































