Sikhism in Vietnam: वियतनाम की वादियों में गूंजता सत श्री अकाल, जानिए कैसे इस छोटे से देश में फला-फूला सिख समुदाय

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Sikhism in Vietnam: अगर आपसे पूछे कि आपको कोई ऐसा देश देखने जाना हो, जिसकी खूबसूरती किसी को भी अपना दीवाना बना दें, जो असल में भारत से भी कई गुणा ज्यादा किफाईती है। और उस देश की करंसी भारत की करंसी से कई गुणा ज्यादा कमतर है.. जी हां, हम बात कर रहे है भारत के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्ता बनाये रखने वाले एक छोटे से देश वियतनाम की..वियतनाम, जो असल में एक छोटा सा देश है लेकिन यहां का ट्यूरिज्म पूरी दुनिया में काफी पॉपुलर है, जहां रोजगार के बेहतर साधनो को देखते हुए भारतीय सिखो ने वियतनाम का रूख किया और आज दशको बाद यहीं के हो कर रह गए है। तो चलिए अपने इस लेख में हम आपको वियतनाम में सिख धर्म के पहुंचने, वहां फलने फूलने की कहानी के बारे में बतायेंगे जो बेहद ही अद्भुत है।

वियतनाम के बारे में जानकारी 

वियतनाम दक्षिण पूर्व एशिया का एक छोटा सा देश है, जिसे आधिकारिक रूप से वियतनाम समाजवादी गणराज्य, कहा जाता है। वियतनाम के उत्तर में चीन, उत्तर पश्चिम में लाओस, दक्षिण पश्चिम में कंबोडिया और पूर्व में दक्षिण चीन सागर मौजूद है। यहां कई तरह के मौसम आते है, ये एक बौद्ध बहुल देश है, इसका क्षेत्रफल 331000 वर्ग किलोमीटर है, तो वहीं 2025 के आकड़ो के मुताबिक 1 करोड़ 23 लाख के आसपास है, जो कि पूरी दुनिया में 16वां सबसे आबादी वाला देश है। हनोई वियतनाम की राजधानी है और हो ची मिन्ह सिटी सबसे बड़ा शहर है। वियतनाम दुनिया का सबसे बड़ा काजू का निर्यातक है। प्राकृति से प्यार करने वालो के लिए वियतनाम बेहद सूकून देने वाला है, तो वहीं  ये तेजी से विकसित होता हुआ देश है जहां व्यापार औऱ रोजगार बढ़ रहे है, जिसके कारण ही भारतीय सिखों के लिए ये पसंदीदा स्थल बनने लगा औऱ सिखों ने यहां आना शुरु कर दिया था।

वियतनाम में सिख धर्म शुरुआत

जब आप वियतनाम में सिख धर्म के फलने फूलने की बात करते है तो ये करीब 100 साल पहले से ही है, जहब 19वी सदी के अंत में सिखों ने व्यापार और रोजगार के लिए पहली बार वियतनाम का रूख किया था। ज्यादातर सिख या तो व्यापार करते थे या फिर सुरक्षा कर्मियों के तौर सेवा देते थे। ये सिख हो चिन मिन्ह सिटी जिसे तब साइगॉन के नाम से जाना जाता था, वहीं पर बसने लगे थे। वियतनाम एक ऐसा देश है, जिसे सिख अपने लिए काफी सुरक्षित मानते है, उनका कहना है कि उन्हें वियतनाम में नस्लविरोधी गतिविधियो का सामना नहीं करना पड़ता, जिसके कारण जो सिख वियतनाम गए, वो वहीं के हो गए थे।

वियतनाम की राजधानी साइगॉन पर कब्जा

लेकिन भले ही उन्हें अपनी धार्मिक मान्यताओं को मानने की आजादी थी लेकिन उन्हें करीब 50 साल से भी ज्यादा का समय लगा वियतनाम में पहला सिख गुरुद्वारा बनवाने में.. साल 1950 में वियतनाम के हो चिन मिन्ह सिटी में पहला गुरुद्वारा बनाया गया था, लेकिन फिर भी इसे सामदायिक केंद्र के तौर पर इस्तेमाल करते थे। जो कि सिखों का सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र था लेकिन 30 अप्रैल 1975 को उत्तरी वियतनामी सेना ने दक्षिण वियतनाम की राजधानी साइगॉन पर कब्जा कर लिया और दक्षिण वियतनाम सरकार का अंत कर दिया, जिसे साइगॉन का पतन भी कहा जाता है, जिसके बाद दक्षिण वियतनाम और उत्तरी वियतनाम का विलय हो गया, लेकिन इससे राजनीतिक हलचलें बढ़ी, अस्थिरता को बढ़ता हुआ देखकर सिखों ने यहां से पलायन शुरु कर दिया था। जिससे दक्षिण वियतनाम में मौजूद सिख गुरुद्वारे की भी मान्यता रद्द कर दी गई और जानकारों की माने तो ये स्थान अब एक दवा कार्यलय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

आधिकारिक रूप से कोई गुरुद्वारा मौजूद नहीं

मौजूदा समय में वियतनाम में करीब 7500 लोग भारतीय रहते है, जिसमें से कुछ परिवार ही सिख है। मौजूदा समय में सिखों की संख्या काफी सिमित हो चुकी है, लेकिन फिर भी सिखो यहां रेस्तरां और होटल के साथ साथ कुछ बिजनस आउटलेट के मालिक है। फिलहाल यहां रहने वाले सिख भी प्रार्थना के लिए तमिल हिंदू मंदिरों में ही जाते है, हालांकि सिख अपने त्यौहार मनाने के लिए, अपनी संस्कृति मानने के लिए आजाद है लेकिन अब वहां आधिकारिक रूप से कोई गुरुद्वारा मौजूद नहीं है, सिखो की संख्या कम होने से यहां की सरकार भी सिखो के लिए फिर से गुरुद्वारे की डिमांड को पूरा नहीं कर रही है, जो वियतनाम छोड़ने का एक बड़ा कारण भी बन रहा है। हालांकि जो भी एक छोटा सा समुदाय यहां मौजूद है वो काफी अहम भूमिका निभा रहे है वियतनाम में सिक्खी की लौ को जलाये रखने के लिए।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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