Rajasthan News: लाल बत्ती वाली गाड़ियों का हुजूम आने की तैयारी में एक आम नागरिक की जान जोखिम में डालना कितना सही है? यह सवाल आज राजस्थान के सरकारी तंत्र, वीआईपी कल्चर और पुलिसिया दबंगई के खिलाफ चीख-चीख कर खड़ा हो रहा है। जयपुर के जगतपुरा में सड़क किनारे मोमो का ठेला लगाकर अपने परिवार का पेट पालने वाली एक बेबस महिला आज अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और दर्द से जंग लड़ रही है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला?
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क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 19 जून की शाम करीब 6:45 बजे की है। Rajasthan जयपुर के जगतपुरा में महल रोड (रामनगरिया थाना क्षेत्र) से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने वाला था। वीआईपी (VIP) मूवमेंट से ठीक पहले पुलिस की टीम सड़क किनारे लगे ठेलों और दुकानों को आनन-फानन में हटाने पहुँची।
वहाँ उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की रहने वाली रेशू गुप्ता (27 वर्ष) अपनी बड़ी बहन के साथ ‘हेल्दी आटा मोमोज’ का ठेला लगाती थीं। कोरोना काल में पिता की मौत के बाद पूरे घर का खर्च (माँ और बहनें) रेशू की इसी कमाई से चलता था। जब पुलिसकर्मियों ने ठेला तुरंत हटाने का दबाव बनाया, तो रेशू और उनकी बहन ने पुलिस से कुछ मिनटों की मोहलत माँगी।
उन्होंने पुलिस को सचेत भी किया कि “ठेले के स्टीमर में पानी खौल रहा है, हमें सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए थोड़ा समय दे दीजिए।” लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी एक न सुनी और जल्दबाजी में ठेले को पीछे की तरफ जोरदार धक्का दे दिया। धक्का लगते ही स्टीमर का उबलता हुआ पानी सीधे रेशू के ऊपर पलट गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गईं।
मेरा Breस्ट…थाई…पेट जल गया है…मेरी पीड़ा समझिए…घर की जीविका मैं ही चलाती थी..अब काम भी बंद हो गया है..!
ये कहना है राजस्थान के सरकारी तंत्र..VIP कल्चर और पुलिसिया दबंगई से पीड़ित महिला के..जो सड़क किनारे मोमो का ठेला लगाकर परिवार चलती थी..!
कल मुख्यमंत्री का काफिला… pic.twitter.com/CvdIfRx7z3
— Rahul Saini (@JtrahulSaini) June 25, 2026
पीड़िता और उनके परिवार का आरोप
अस्पताल के बिस्तर से आपबीती सुनाते हुए पीड़िता रेशू गुप्ता और उनकी बहन ने बताया कि पुलिसकर्मियों का रवैया बेहद हिंसक और अमानवीय था। उन्होंने बार-बार हाथ जोड़कर सिर्फ 2 मिनट का समय माँगा था, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। पीड़िता का आरोप है कि उन्होंने पुलिसवालों को जोर से चिल्लाकर सचेत किया था कि “साहब, अभी ठेला मत छुओ, स्टीमर में पानी खौल रहा है, हम जल जाएंगे।” इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने बेरहमी दिखाते हुए ठेले को पीछे की तरफ जोरदार धक्का मार दिया, जिससे खौलता हुआ पानी उनके सीने, पेट और पैरों पर गिर गया।
परिवार का आरोप है कि खौलता पानी गिरने के बाद रेशू सड़क पर दर्द से बुरी तरह चीखने-चिल्लाने लगीं। उनका पूरा शरीर झुलस चुका था, लेकिन वहाँ मौजूद पुलिसकर्मी उनकी मदद करने या अस्पताल पहुँचाने के बजाय अपनी गाड़ियों में बैठकर मौके से फरार हो गए। पीड़िता ने बताया कि कोरोना काल में पिता को खोने के बाद वह अकेले ही मेहनत मजदूरी कर अपनी माँ और बहनों का पेट पाल रही थीं। इस हादसे ने न सिर्फ उनकी आजीविका छीन ली है, बल्कि अब उनके पास अस्पताल के महंगे इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।
पुलिस का पक्ष
Rajasthan जयपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों (DCP ईस्ट) और रामनगरिया थाना पुलिस ने पीड़िता पर जानबूझकर खौलता पानी फेंकने या ठेला पलटने के आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने का समय बेहद नजदीक था। ऐसे में सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सड़क (महल रोड) पर खड़े ठेलों और अवैध अतिक्रमण को तुरंत हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों और दुकानदारों के बीच तीखी बहस और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
रामनगरिया थाना प्रभारी के अनुसार, पीड़ित पक्ष की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना की वास्तविक सच्चाई जानने के लिए इलाके में लगे CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने जनता को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए सब-इंस्पेक्टर (SI) स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जाँच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





























