Avimukteshwarananda News: वाराणसी के केदार घाट स्थित विद्या मठ इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है। प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज FIR में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें बच्चों की सुरक्षा और मठ की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में मठ से लंबे समय से जुड़े रहे नील मणि शास्त्री से बात की गई, जिन्होंने आरोपों पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी।
नील मणि शास्त्री ने बताया कि उन्होंने अपनी दीक्षा 1986 में ली थी, जबकि मठ की स्थापना 1996 में हुई। इसका मतलब है कि वे मठ और उसकी परंपरा को इसकी शुरुआत से पहले से जानती हैं। उन्होंने कहा कि मठ की परंपरा बेहद अनुशासित और पारदर्शी रही है, और यहां की सभी गतिविधियां खुले तौर पर संचालित होती हैं।
बालिकाओं की शिक्षा पर साफ सफाई : Avimukteshwarananda News
नील मणि शास्त्री ने स्पष्ट किया कि मठ में कभी बालिकाएं नहीं पढ़तीं। उन्होंने बताया कि बालिकाओं के लिए मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में अलग आश्रम है, जहां उनकी पढ़ाई और रहने की व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित है। वाराणसी मठ का बालिकाओं की शिक्षा से कोई संबंध नहीं है।
वेदपाठी बच्चों की व्यवस्था
कई सवाल मठ में पढ़ने वाले बच्चों के सिस्टम को लेकर भी उठे। नील मणि शास्त्री ने कहा कि मठ में केवल वेदपाठी ब्राह्मण बालक पढ़ते हैं। इनका प्रवेश पांचवीं कक्षा के बाद होता है और उम्र लगभग 10 से 15 साल होती है। वेदों की पढ़ाई का कोर्स छह साल का होता है, और हर छात्र का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन दो छात्रों का नाम आरोपों में लिया गया है, उनके बारे में मठ में कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। 300 से ज्यादा छात्रों के व्यवस्थित रिकॉर्ड के सामने सिर्फ दो बच्चों का नाम न होना ही साबित करता है कि आरोप निराधार हैं।
मठ की इमारत और सुविधाओं पर विवाद
एक दावे में मठ को पांच मंजिला, शीश महल और स्विमिंग पूल वाला बताया गया था। नील मणि शास्त्री ने कहा कि मठ की संरचना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर इमारत ऊंची है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है।
स्विमिंग पूल के आरोप पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी मनोरंजन के लिए नहीं था। पूर्व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए एक पानी की टंकी (हौदी) बनाई गई थी, ताकि वे उसमें व्यायाम कर सकें। अब वहां सामान्य सामान रखा हुआ है।
POCSO कानून और निष्पक्ष जांच की अपील
नील मणि शास्त्री ने कहा कि उन्हें POCSO कानून के बारे में जानकारी तब तक नहीं थी जब तक यह मामला सामने नहीं आया। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपील की और कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए।
सनातन धर्म पर हमला
उन्होंने पूरे मामले को केवल व्यक्तिगत आरोप नहीं बल्कि सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पर हमला बताया। उनका कहना है कि ऐसे आरोप न सिर्फ किसी व्यक्ति बल्कि पूरी धार्मिक व्यवस्था को निशाना बनाते हैं। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि अंततः सत्य की जीत होती है और जांच में भी सच सामने आएगा।
अन्य आश्रमों की स्वतंत्र व्यवस्था
नील मणि शास्त्री ने कहा कि मठ से जुड़े जबलपुर और जोशीमठ जैसे अन्य आश्रम पूरी तरह स्वतंत्र रूप से संचालित होते हैं। वहां के छात्र, शिक्षक और व्यवस्थाएं अलग हैं। बच्चों का एक आश्रम से दूसरे आश्रम में जाना सामान्य प्रक्रिया नहीं है, और पढ़ाई अपने-अपने स्थान पर ही व्यवस्थित तरीके से होती है।
पारदर्शिता पर जोर
नील मणि शास्त्री ने कहा कि मठ पूरी तरह खुला और पारदर्शी है। कोई भी व्यक्ति आकर यहां की व्यवस्थाओं को देख सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यहां कोई छिपी गतिविधि नहीं होती और सभी काम नियमों और परंपराओं के अनुसार संचालित होते हैं।
