India EU FTA deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बड़ी राहत और नए मौके के तौर पर देखा जा रहा है। यह समझौता सिर्फ आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेश, रोजगार, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े बड़े नाम इसे आने वाले वर्षों में सेक्टर का गेम चेंजर मान रहे हैं। इस डील का सीधा फायदा ग्राहकों को भी मिलने वाला है, क्योंकि यूरोप से आने वाली कारें अब पहले के मुकाबले काफी कम कीमत पर भारत में उपलब्ध हो सकेंगी।
टाटा मोटर्स के एमडी ने क्या कहा (India EU FTA deal)
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी व सीईओ शैलेश चंद्रा का मानना है कि भारत-EU FTA ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। उनके मुताबिक यह समझौता बाजार को खोलने और देश में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के बीच एक संतुलन बनाए रखेगा।
उन्होंने कहा कि इससे एक तरफ जहां ग्लोबल ऑटो ब्रांड्स की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर घरेलू कंपनियों के लिए निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। ग्राहकों के लिहाज से देखें तो उन्हें ज्यादा विकल्प और बेहतर टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां मिलने की संभावना है।
यूरोपीय ब्रांड्स के लिए भरोसे का संकेत
स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के एमडी और सीईओ पियूष अरोड़ा ने भी इस डील का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच कारोबारी रिश्तों को और मजबूत करेगा। यूरोपीय यूनियन पहले से ही भारत के बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में शामिल है और यह करार दोनों अर्थव्यवस्थाओं को फायदा पहुंचाएगा।
उन्होंने बताया कि साफ और स्थिर ट्रेड नियमों से भारतीय ग्राहकों तक यूरोपीय कारों के ज्यादा मॉडल पहुंच सकते हैं। लंबे समय में इससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने और पूरे ऑटो इकोसिस्टम में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
महिंद्रा ग्रुप की नजर में क्यों खास है यह डील
महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और एमडी डॉ. अनिश शाह ने इस समझौते को केवल टैरिफ में कटौती तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार यह भारत के लिए आर्थिक विकास की अगली लहर साबित हो सकता है।
डॉ. शाह का कहना है कि इस एफटीए की सबसे बड़ी ताकत इसका बैलेंस्ड होना है। एक तरफ यह यूरोपीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे खोलता है, तो दूसरी तरफ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और स्थानीय उद्योग के हितों को भी सुरक्षित रखता है। महिंद्रा ग्रुप इसे प्रतिस्पर्धा के बजाय ऑटो सेक्टर के लिए फायदे का सौदा मानता है।
टू-व्हीलर इंडस्ट्री को भी मिलेगा बड़ा मौका
हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ हर्षवर्धन चिताले ने इस एफटीए को ऐतिहासिक करार दिया है। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी है।
उन्होंने कहा कि इससे भारतीय टू-व्हीलर कंपनियों को यूरोपीय बाजार में ‘मेक इन इंडिया’ प्रोडक्ट्स को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। साथ ही रेगुलेटरी सपोर्ट, रिसर्च, इनोवेशन और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
TVS का फोकस: ग्लोबल लेवल पर विस्तार
TVS मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी इस समझौते को भारतीय उद्योग के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया। उनका कहना है कि ऐसे एफटीए सिर्फ ड्यूटी कम नहीं करते, बल्कि पूरे बिजनेस माहौल को बदल देते हैं।
इससे सप्लाई चेन मजबूत होती है और भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलता है। TVS अब नॉर्टन जैसे ब्रांड्स के साथ यूरोप और अन्य बाजारों में नए अवसर तलाशने पर फोकस करेगी।
डील में क्या तय हुआ है
भारत सरकार और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए इस समझौते का सबसे बड़ा असर ऑटो इंडस्ट्री पर दिखेगा। यूरोप में बनी कारों पर भारत में लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। हालांकि इसके लिए 2.5 लाख यूनिट का कोटा तय किया गया है, यानी फिलहाल यह छूट इतनी ही कारों तक सीमित रहेगी।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में यूरोपीय लग्जरी और प्रीमियम कारें भारत में पहले से काफी सस्ती हो सकती हैं। हालांकि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को इस डील से अगले पांच साल के लिए बाहर रखा गया है।
ग्राहकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए फायदा
कुल मिलाकर भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इससे इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और ग्राहकों को कम कीमत पर बेहतर और ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।





























