20 साल के लड़के-लड़कियों को हो रही बुजुर्गों वाली ये बीमारी, अस्‍पतालों में बढ़े मरीज

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 01 मई 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 01 मई 2024, 12:00 AM
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आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या युवाओं को इस हद तक प्रभावित कर रही है कि जो बीमारियां उन्हें बुढ़ापे में होनी चाहिए, वे 20-20 साल की उम्र में हो रही हैं। युवाओं में जवानी में बुढ़ापा जल्दी देखने को मिल रहा है। आपने भी अपने आसपास कई युवाओं को अभी से ही कमर दर्द और घुटनों के दर्द की शिकायत करते हुए देखा होगा। डॉक्टरों के मुताबिक, पहले यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों को होती थी और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब यह बीमारी युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। यह बीमारी आगे चलकर रूमेटाइड आर्थराइटिस में बदल जाती है। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है? आइए आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह।

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ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की ओपीडी में आने वाले मरीजों के आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रूमेटाइड आर्थराइटिस से लड़कियां और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। कभी-कभी यह बीमारी इतनी ज्यादा प्रभावित करने लगती है कि हड्डियां खोखली होने की स्थिति तक पहुंच जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या विकसित हो जाती है। रोगी की लम्बाई कम हो जाती है, हड्डियां खोखली हो जाती हैं और टूटने लगती हैं।

रूमेटाइड अर्थराइटिस के बड़े कारण

एआईआईए में इंटरनल मेडिसिन विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आर के यादव कहते हैं कि युवाओं में और खासतौर पर नई उम्र में रूमेटाइड अर्थराइटिस होने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह देखी जा रही है वो है विटामिन डी की कमी। अस्‍पताल में आने वाले 90 फीसदी मरीजों की यही परेशानी है कि उनके पास धूप में रोजाना कुछ देर बैठने के लिए समय ही नहीं है।

इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी और लोगों के पास व्यायाम करने का भी समय नहीं होता है। जिसके कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे खराब होने लगती है और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी ऑटो इम्यून बीमारी उत्पन्न हो जाती है। इसलिए युवाओं को सावधान रहने की जरूरत है। नहीं तो जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ेगी, उन्हें उठने-बैठने में दिक्कत होने लगेगी।

युवा ऐसे करें बचाव

डॉ. का कहना है कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस से बचने या इससे उबरने के लिए चार चीजें करना जरूरी है। सबसे पहले रोज सुबह थोड़ी देर धूप में बैठें। अगर सुबह नहीं तो दिन के किसी भी समय आपकी पीठ पर कम से कम 20 मिनट तक सूरज की रोशनी पड़ना जरूरी है। इससे आपके शरीर में विटामिन डी मौजूद रहेगा। अपने आहार में कैल्शियम, विटामिन, खनिज, प्रोटीन आदि की पर्याप्त मात्रा का ध्यान रखें। जंक फूड से दूर रहो। यदि संभव हो तो प्रतिदिन व्यायाम करें और यदि यह संभव नहीं है तो प्रतिदिन कुछ देर टहलें। घंटों एक ही जगह बैठकर कोई काम न करें, बीच-बीच में टहलें, शरीर को स्ट्रेच करें। तभी आप इस बीमारी से बच सकते हैं।

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