कब से शुरू हो रहा है सावन? नोट कर लें सावन सोमवार की सभी तारीखें और महत्व | Sawan Somvar Vrat

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 03 जुलाई 2026, 08:43 PM Updated: 03 जुलाई 2026, 08:43 PM
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Sawan Somvar Vrat: सावन का महीना सिर्फ आस्था और उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि यह महादेव और माता पार्वती के अलौकिक प्रेम और अटूट संकल्प का भी प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। माता पार्वती के इसी अनन्य समर्पण और तप से प्रसन्न होकर, स्वयं भगवान शंकर ने इसी पावन सावन महीने में उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

यही कारण है कि यह महीना महादेव को अत्यधिक प्रिय है और आज भी इस दौरान सुयोग्य वर व सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है इस साल सावन का पहला सोमवार कब हैं।

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इस बार कितने व्रत

इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, जिसके बाद साल का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। भगवान शिव के भक्तों के लिए यह दिन अत्यधिक खास होने वाला है, क्योंकि इसी दिन से सावन के सोमवार के व्रतों की शुरुआत होने वाली है। इस बार (साल 2026 में) सावन के महीने में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं। सभी 4 सोमवार की तारीखें:

  • पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026 (इस दिन नागपंचमी का भी शुभ संयोग है)
  • चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

सावन सोमवार व्रत का महत्व

सावन के सोमवार व्रत (Sawan Somvar Vrat) का धार्मिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक तीनों ही दृष्टिकोण से बहुत अधिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में जो भक्त पूरी श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखते हैं, महादेव उनकी मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी करते हैं। सुयोग्य वर की प्राप्ति, सुखी और अखंड दांपत्य जीवन के साथ-साथ कुंडली के चंद्र दोष से मुक्ति पाने के लिए भी लोग इस पावन महीने में व्रत और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

भोलेनाथ को ‘आशुतोष’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है जो बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाएं। सावन के सोमवार को केवल एक लोटा जल और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही महादेव प्रसन्न होकर भक्तों के संकट और बीमारियां दूर कर देते हैं।

क्यों और कैसे शुरू हुआ था यह व्रत?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन से ‘हलाहल’ नामक भयंकर विष निकला, जिससे सृष्टि नष्ट होने लगी। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले में ही रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए।

विष के प्रभाव से महादेव का शरीर अत्यधिक गर्म होने लगा और उन्हें तीव्र जलन होने लगी। तब सभी देवताओं और भक्तों ने शिव जी के शरीर को शीतलता देने के लिए उन पर गंगाजल और दूध बरसाया। तभी से महादेव को शांत और प्रसन्न करने के लिए सावन में जल चढ़ाने और व्रत (Sawan Somvar Vrat) रखने की शुरुआत हुई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले सावन सोमवार का व्रत (Sawan Somvar Vrat) माता पार्वती ने रखा था। सती रूप के बाद जब माता पार्वती ने हिमालय राज के घर पुनार्जन्म लिया, तब उन्होंने भगवान शिव को दोबारा पति रूप में पाने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने सावन के महीने में निराहार रहकर अत्यंत कठिन उपवास और तपस्या शुरू की थी। माता पार्वती की इस निश्छल भक्ति और सोमवार के व्रतों से प्रसन्न होकर इसी महीने में भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए और अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तभी से मनोकामना पूर्ति के लिए इस व्रत की परंपरा संसार में फैल गई।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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