Satluj Movie Controversy: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। लंबे इंतजार और कई विवादों के बाद यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फैसले ने फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है। निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है, जबकि पंजाब के कई राजनीतिक नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, सरकार की ओर से सुरक्षा कारणों और तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
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तीन साल तक अटकी रही फिल्म, फिर अचानक रिलीज और दो दिन में हट गई|Satluj Movie Controversy
‘सतलुज’ की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई थी और साल 2022 में सेंसर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया गया था। हालांकि, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म में 127 बदलाव सुझाए थे। फिल्म के निर्माताओं ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद इसकी रिलीज लंबे समय तक अटक गई। करीब तीन-चार साल बाद फिल्म को नए नाम ‘सतलुज’ के साथ 3 जुलाई 2026 को ZEE5 पर रिलीज किया गया, लेकिन 48 घंटे के भीतर ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। ZEE5 ने भी इसकी पुष्टि करते हुए दर्शकों से माफी मांगी और कहा कि अगले आदेश तक फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी।
सरकारी अधिकारी ने बताई हटाने की वजह
फिल्म को हटाए जाने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इस बीच एक सरकारी अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि फिल्म के निर्माताओं ने पहले सेंसर बोर्ड की ओर से सुझाए गए 127 कट्स स्वीकार नहीं किए थे। बाद में बिना उन बदलावों को लागू किए फिल्म को नए नाम से सीधे OTT पर रिलीज कर दिया गया।
अधिकारी के मुताबिक, भले ही OTT प्लेटफॉर्म सीधे CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, लेकिन उन्हें मध्यस्थ दिशानिर्देशों (Intermediary Guidelines) का पालन करना होता है। मामला सरकार के संज्ञान में आने के बाद ZEE5 को सुरक्षा कारणों से फिल्म हटाने का निर्देश दिया गया। अधिकारी ने कहा कि अगर कोई फिल्म थिएटर और OTT दोनों माध्यमों पर रिलीज करनी है, तो संबंधित नियमों का पालन जरूरी है।
डायरेक्टर हनी त्रेहान बोले- आज तक नहीं पता किसे दिक्कत थी
फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने पूरे विवाद पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि आज तक उन्हें यह नहीं बताया गया कि आखिर फिल्म से किसे आपत्ति थी। उन्होंने कहा, “अगर कोई मुझसे पूछे कि फिल्म से किसे दिक्कत थी, तो मेरे पास इसका जवाब नहीं है। न कोई चेहरा सामने आया और न ही किसी ने सीधे बातचीत की। जो भी संवाद हुआ, वह तीसरे पक्ष या वकीलों के जरिए हुआ। एक वक्त ऐसा भी आया जब बातचीत पूरी तरह बंद हो गई। बाद में ZEE5 की पहल से फिल्म रिलीज हो सकी।”
हनी त्रेहान ने यह भी कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कड़वाहट नहीं है। उनके मुताबिक, देश चलाने वालों की जिम्मेदारियां बड़ी होती हैं और संभव है कि कई बार परिस्थितियां भी फैसलों को प्रभावित करती हों। उन्होंने कहा कि वह सभी संस्थाओं और संवैधानिक पदों का सम्मान करते हैं।
FWICE ने दिलजीत दोसांझ के फिल्म चयन पर उठाए सवाल
फिल्म पर लगे प्रतिबंध के बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) ने भी प्रतिक्रिया दी। संगठन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ की फिल्मों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अक्सर ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनते हैं, जो विवादों में घिर जाते हैं। उन्होंने कहा कि दिलजीत पंजाब के बड़े कलाकार हैं और उनके करोड़ों प्रशंसक हैं। ऐसे में उन्हें किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले उसके सामाजिक और राष्ट्रीय प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए। बीएन तिवारी ने यह भी कहा कि एक कलाकार का दायित्व केवल फिल्म करना नहीं, बल्कि देशहित को भी प्राथमिकता देना है।
दिलजीत बोले- पहले दिन से पता था कि ऐसा होगा
फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम लाइव के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस फैसले से बिल्कुल हैरानी नहीं हुई। दिलजीत ने कहा, “जब फिल्म रिलीज हुई थी, तभी मुझे अंदाजा था कि इसे हटा दिया जाएगा। मुझे लगा था कि सोमवार को ऐसा होगा, लेकिन यह रविवार को ही हो गया। यही वजह थी कि हम फिल्म का प्रचार भी नहीं कर सके।”
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्हें इस बात की खुशी है कि रिलीज के दौरान फिल्म बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गई। उनके मुताबिक, पूरी टीम की मेहनत दर्शकों तक पहुंची और यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
गुपचुप रिलीज करने की भी बताई वजह
दिलजीत ने यह भी खुलासा किया कि फिल्म को बिना किसी प्रचार के अचानक रिलीज करने का फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने कहा, “अगर हमने रिलीज से दो दिन पहले भी इसका प्रमोशन किया होता, तो शायद यह फिल्म दर्शकों तक पहुंच ही नहीं पाती। अचानक रिलीज करना ही इसे लोगों तक पहुंचाने का एकमात्र तरीका था।” उन्होंने बताया कि उन्होंने एक गुरुद्वारे में लोगों को फिल्म देखते हुए वीडियो भी देखा, जिससे उन्हें संतोष मिला कि फिल्म अपने दर्शकों तक पहुंचने में सफल रही।
पंजाब की राजनीति में भी मचा घमासान
फिल्म हटाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति भी गरमा गई है। कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा, शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल, दलजीत सिंह चीमा और आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू समेत कई नेताओं ने फिल्म को दोबारा रिलीज करने की मांग की। इन नेताओं का कहना है कि किसी फिल्म को इस तरह हटाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है।
कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
‘सतलज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित है। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और हजारों लावारिस शवों के गुपचुप अंतिम संस्कार के मामलों की जांच की थी। उन्होंने कई श्मशान घाटों से दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाकर इन मामलों को सार्वजनिक किया। 6 सितंबर 1995 को उन्हें उनके घर के बाहर से कथित तौर पर अगवा कर लिया गया। बाद में उनकी हत्या कर शव नदी में फेंक दिए जाने का आरोप लगा। मामले की सीबीआई जांच के बाद 2005 में पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों को अपहरण और हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य आरोपियों को सात-सात साल की जेल हुई।
फिल्म की स्टारकास्ट
‘सतलुज’ में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है। फिल्म में उनके साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्याण भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म की कहानी और विषय पहले से ही चर्चा में थे, लेकिन अब OTT से हटाए जाने के बाद यह विवाद और भी गहरा हो गया है।
































