Rinku Singh Father Demise: बेटे को शिखर पर पहुंचाने के लिए ढोए सिलेंडर, आज रिंकू सिंह के सिर से उठा पिता का साया

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Rinku Singh Father Demise: कहते हैं कि पिता का कर्ज तो संतान जीवन भर नहीं चुका सकती, और रिंकू सिंह के मामले में यह बात पूरी तरह सच साबित होती है। जिस पिता ने कंधे पर सिलेंडर ढोकर अपने बेटे के सपनों को नई उड़ान दी, आज उनके जाने से रिंकू के जीवन में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। खासकर ऐसे समय में जब रिंकू T20 वर्ल्ड कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, पिता का साथ छूटना उनके लिए किसी वज्रपात से कम नहीं है।

भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती थे, जहां उन्होंने देर रात अंतिम सांस ली।

संघर्ष भरी जिंदगी, बेटे के सपनों का सहारा

रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का बड़ा संघर्ष रहा। अलीगढ़ की एक गैस एजेंसी में हॉकर का काम करने वाले खानचंद सिंह कंधों पर सिलेंडर ढोकर परिवार चलाते थे। पांच भाई और एक बहन वाले परिवार में रिंकू तीसरे नंबर पर हैं। गैस एजेंसी द्वारा दिए गए दो कमरों के मकान में पूरा परिवार रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के बावजूद पिता ने बेटे के क्रिकेट सपनों को कभी रुकने नहीं दिया। वह अपनी कमाई से रिंकू के लिए बल्ला-गेंद खरीदते और उन्हें अभ्यास के लिए मैदान तक पहुंचाते थे।

कोच ने पहचानी प्रतिभा

रिंकू के कोच मसूद जफर अमीनी उन्हें अलीगढ़ के अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम लेकर आए, जहां से उनकी क्रिकेट यात्रा शुरू हुई। अंडर-16 से लेकर अंडर-19, फिर रणजी और आईपीएल तक रिंकू ने लगातार मेहनत से पहचान बनाई। स्कूल क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने मैन ऑफ द सीरीज भी जीता था।

जिम्मेदारी का बोझ नहीं आने दिया

रिंकू के पिता आखिरी समय तक सिलेंडर ढोते रहे, लेकिन उन्होंने कभी बेटे को काम करने के लिए मजबूर नहीं किया। उनका एक ही सपना था—रिंकू क्रिकेट में नाम कमाए।

5 छक्कों ने रातोंरात बनाया स्टार

2023 में आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेलते हुए रिंकू ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ आखिरी ओवर में लगातार 5 छक्के लगाकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। आखिरी ओवर में 29 रन की जरूरत थी और लगभग सभी ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन रिंकू ने करिश्मा कर दिखाया। उनकी इस पारी से अलीगढ़ में जश्न का माहौल बन गया और वह रातोंरात स्टार बन गए।

35 नंबर जर्सी रही लकी

स्कूल क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक 35 नंबर की जर्सी रिंकू के लिए लकी रही। इस जर्सी में उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और टीम का भरोसा जीता।

रिंकू सिंह की कहानी सिर्फ क्रिकेट की सफलता नहीं बल्कि पिता के त्याग, मेहनत और भरोसे की कहानी है। आज भले ही उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई सीख और संघर्ष रिंकू की जिंदगी और करियर में हमेशा जिंदा रहेगा।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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