Punjab History: जब आप पंजाब का नाम सुनते हैं तो सबसे पहले आपके जेहन में क्या आता है। जी हां, पंजाब की शान वहां के सिख, वहां की पांच नदियां, लहलहाते खेत, गिद्दा और भंगड़ा का जोश, मक्के की रोटी और सरसों का साग का अनूठा संगम। लेकिन क्या पंजाब यही तक सीमित है। क्योंकि जब सिख धर्म नहीं था तब भी पंजाब था। जब गिद्दा और भंगड़ा वहां की पहचान नहीं थे तब भी पंजाब इतनी ही शान से था। पंजाब जो भारत का द्वार था, जिसने भारत की धरती को अलग अलग रूपो में देखा, जिसने सैकड़ों आक्रमण देखे, करोड़ों बेटों को शहीद होते देखा, लेकिन 14 सदी के बाद पंजाब बदलने लगा। पंजाब क्या था, क्या बना और अब क्या बन गया है। कैसे बहादुरों और साहसी योद्धाओं की धरती आज अलगाववाद की आग में झुलस रही है, कभी पंजाब की धरती का गौरव बढ़ाने वाले युवा, आज नशे की चक्रव्यू में फंसे हुए है.. पंजाब का वो इतिहास जिसने उसे दशकर्म भंडार बना दिया। अपने इस वीडियो में हम आज 14वीं सदी के बाद पंजाब में क्या क्या बदलाव आए, जानेंगे नए पंजाब की कहानी, खुद पंजाब की ही जुबानी।
पंजाब का गौरवशाली इतिहास
पंजाब.. पांच नदियों के होने से नाम मिला पंजाब.. और वो भी फारसी भाषा में पंज का मतलब पांच और आब का मतलब जल स्त्रोत होता है.. तो जरा सोचिये कि पंजाब को ये नाम कब मिला.. ऋग्वेद में दिये गए वर्णन के अनुसार भारत का वो क्षेत्र जहां सात नदियां हुआ करती थी, और उत्तरी भाग में मौजूद था वो एरिया सप्त सिंधु कहलाता था। लेकिन इस क्षेत्र को महाभारत काल में पंचनद के नाम से जाना जाता था..लेकिन जब 15वी सदी में मुगलों का शासन शुरु हुआ तब बादशाह अकबर ने अरबी भाषा का प्रयोग किया नामों को लिखने के लिए और उसे आसानी से समझने के लिए… जिसके कारण इस क्षेत्र को आधिकारिक रूप से पंजाब नाम मिला। 14 सदी में सिख धर्म की स्थापना से पहले पंजाब की स्थिति बिल्कुल अलग थी.. भारत की सबसे विकसित और संपन्न सिँधू घाटी सभ्यता पंजाब की ही सिंधु नदी के आसपास स्थापित हुई थी।
इसलिए कारण 3300-1300 ईसा पूर्व से ही पंजाब का एख विकसित और संपन्नता का इतिहास रहा है। तो वहीं लगभग 1000 ईसा पूर्व पंजाब की धरती पर स्थापित हुए तक्षशिला शहर की ऐतिहासिक वैल्यू को भला कौन भुला सकता है.. तक्षशिला जो कि वैदिक और बौद्ध स्कोलरशिप का पौराणिक केंद्र, जिसे आज तक कोई टक्कर नहीं दे सका। यूनेस्को विश्वधरोहर में से एक.. ये शहर औऱ विश्वविद्यालय साक्षी है कि पंजाब की धरती पर सबसे पहले स्कॉलर्स ने बौद्धिक क्षमता को सांइस की कसौटी पर उतारा गया था। चरक और चाणक्य जैसे महान शिक्षक पंजाब की ही धरती पर विकसित हुए। इसिलए पंजाब के इतिहास को हम उसकी आज की स्थिति से नहीं आंक सकते है।
पंजाब की भौगोलिक स्थिति
हालांकि 10वी शताब्दी के बाद पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने उसे काफी नुकसान भी पहुंचाया। भारत में पंजाब एक प्रवेश द्वारा बन गया था और श्वेत ह्वूणों ने, महमूद गोरी और महमूद गजनी जैसे इस्लामिक शासको ने भारत पर हमला कर दिया. उसे काफी लूटा और उसकी ऐतिहासिक धरोहरों को भी काफी नुकसान पहुंचाया। तक्षशिला जैसी धरोहर को पांचवी सदी में श्वेत ह्वूणों ने पहली बार तबाह किया और बाकि कसर इस्लामिक शासकों ने पूरी कर दी.. लेकिन 14 शताब्दी के बाद पंजाब की न केवल भौगोलिक स्थिति बल्कि राजनैतिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव आया।
15 वी सदी में जब गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की स्थापनी की थी, उससे पहले पंजाब में इस्लाम धर्म ज्यादा प्रभावी थी.. वजह 11 वी सदी से ही गजनवी और मुहम्मद गौरी के हमले के कारण पंजाब पर इस्लामिक शासको का शासन शुरु हो गया था.. जिससे वहां हिंदू और इस्लाम धर्म प्रभावी था.. ऐसे में 15वी सदी में सिख धर्म की नींव रखी गई.. जिसने न केवल पंजाब का इतिहास बदला, बल्कि उसकी भौगोलिक स्थिति पर भी बड़ा बदलाव आने की प्रक्रिया शुरु हुई। सिख धर्म को फॉलो करने वाले अपनी धरोहरो को सहेजने के लिए पंजाब के अलग अलग हिस्से में गुरुद्वारों का निर्माण कराने लगे.. तो वहीं पंजाब के एक हिस्से पर मुगलो का भी शासन था। नतीजा सिख और मुगल हमेशा एक दूसरे से जानी दुश्मन बन कर रहे। 18वी सदी में 1707 में मुगल बादशाह औरंगजेब की मौत के बाद मुगलो कमजोर पड़ गए। एक कुशल नेतृत्व की कमी के कारण मुगलों पर सिख योद्धा भारी पड़ने लगे.. पंजाब में सिख अलग अलग मिसलो में बंटने लगे जिन्होंने अपनी ताकत के अनुसार पंजाब को बांटा और उस पर राज शुरु किया।
खालसा सेना के कुछ लोगो की दगाबाजी
वहीं अंग्रेज तब तक भारत की बाकि की भूमि पर कब्जा करने में लगे थे। इसी दौरान 19वी सदी के शुरुआत में पंजाब पर शासन शुरु हुआ शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह का.. जिन्होंने अपने युद्ध कौशल से पंजाब का विस्तार कश्मीर, अफगानिस्तान, तिब्बत, तक किया था। उन्होंने अपने शासन में पंजाब को सैन्य और आर्थिक दोनो तरीके से काफी मजबूत किया था। उनके शासन के दौरान पंजाब का सांस्कृतिक रूप से उत्थान हुआ.. लेकिन 1839 में उनकी मौत के बाद पंजाब की स्थिति पूरी तरह से बदल गई। खालसा सेना के कुछ लोगो की दगाबाजी के कारण अंग्रेज पंजाब पर हावी हो गए। 1849 में पंजाब पूरी तरह से ब्रिटिश औपनिवेश के हाथों में चला गया.. औऱ भारत की आजादी तक वो उनके ही हाथों में था..हालांकि उन्होंने Modern education system, infrastructure development, और agricultural sector में पंजाब में बड़े डेवलपमेंट किये थे, लेकिन पंजाब को अभी बहुत कुछ देखना था.. अंग्रेज जाने से पहले भारत का बंटवारा कर गए, जिसमे एक तरफ बंगाल बंटा तो दूसरी तरफ पंजाब.. और जन्म हुआ पाकिस्तान का.. पंजाब की करीब 56 प्रतिशत धरती पाकिस्तान को दे दी गई।
बंटवारे ने पंजाब को संप्रादायिक दंगो की आग में धकेला
सिखों की ऐतिहासिक धरोहर के भी टुकड़े हो गए.. जो पंजाब की कभी शान थी.. वो अब खंडहर बन गए। इस बंटवारे ने पंजाब को संप्रादायिक दंगो की आग में धकेल दिया। पूरा पंजाब जलने लगा.. और करीब 1.2 करोड़ लोगो को केवल पलायन करना पड़ा..और दंगो में करीब 2 लाख से 20 लाख लोग की मौत हुई.. ये आज तक कि हिस्ट्री के सबसे बड़े पलायनो में से एक है। उसके बाद से पंजाब में शांति स्थापित करने की कोशिश लगातार जारी है, पंजाब जैसी बड़ी भूमि पर शासन करना आसान नही था तो उसके दो अलग टुकड़े कर भाषा के आधार पर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बना दिया गया। लेकिन बावजूद इसके पंजाब की आंतरिक शांति कभी ज्यादा दिनो तक कायम नही रह सकी। पड़ोसी देश पंजाब में घुसपैठ करने और यहां अशांति फैलाने की कोशिश में पंजाब में अलगाववाद को, नशे को बढ़ावा देता है।
हालांकि पंजाब की स्थिति में सुधार लाने के लिए सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन ला गया.. भूमि सुधार, औद्योगीकरण और हरित क्रांति जैसी कई क्रांतिकारी योजनाएं लाई गई.. जिसने पंजाब को आज भी भारत का खाद्य भंडार बनाया है, लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि पंजाब जिस स्थिति में आज है.. उस स्थिति में पहले कभी नहीं था। ये कहना तो बहुत मुश्किल है कि पंजाब कभी पहले जैसा संपन्न हो पायेगा.. लेकिन अच्छी बात ये है कि सिख धर्म के यहां फूलने फूलने से यहां की धरोहर अब भी बरकरार है। जिन्हें सिखों ने सहेजा है और शायद इसलिए अब पंजाब सिखों के लिए ही प्रचलित है।













































