Patna DM Thyagarajan SM: बिहार की धरती ने देश को कई ऐसे प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं, जिन्होंने अपनी कार्यशैली और फैसलों के दम पर अलग पहचान बनाई है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से जारी देश के 100 प्रमुख आईएएस अधिकारियों की सूची में बिहार कैडर के 8 अधिकारियों को जगह मिली है। इस सूची में पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम का नाम भी शामिल है। उनकी सफलता की कहानी न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है।
तमिलनाडु से बिहार तक का सफर| Patna DM Thyagarajan SM
डॉ. त्यागराजन एस.एम मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को हुआ था। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे त्यागराजन ने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल क्षेत्र में करियर शुरू करने के बाद भी उनके मन में समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा बनी रही। डॉक्टरी की प्रैक्टिस के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि प्रशासनिक सेवा के माध्यम से वे ज्यादा लोगों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं। यही सोच उन्हें सिविल सेवा की ओर ले गई और उन्होंने मेडिकल पेशा छोड़ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
पहले बने IPS, फिर हासिल किया IAS का सपना
कड़ी मेहनत के बाद डॉ. त्यागराजन ने वर्ष 2010 में यूपीएससी परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए। उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में करीब एक वर्ष तक सेवाएं दीं। हालांकि उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। इसी वजह से उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी परीक्षा दी और वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हो गए। इस बार उन्हें बिहार कैडर मिला, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया।
बिहार में मजबूत की हिंदी पर पकड़
तमिलनाडु से आने वाले डॉ. त्यागराजन के लिए शुरुआती दिनों में हिंदी भाषा एक बड़ी चुनौती थी। बिहार में पोस्टिंग मिलने के बाद उन्हें हिंदी बोलने और समझने में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। sनालंदा में नगर आयुक्त और बाद में जिलाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने न सिर्फ हिंदी सीखी, बल्कि उस पर अच्छी पकड़ भी बना ली। आज वे लोगों से सहजता से संवाद करते हैं और स्थानीय प्रशासनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से समझते हैं।
फैसले लेने की क्षमता ने दिलाई अलग पहचान
डॉ. त्यागराजन की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में है जो शांत स्वभाव के होने के बावजूद कठिन परिस्थितियों में त्वरित और साहसिक फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि एक निर्भीक और परिणाम देने वाले अधिकारी की मानी जाती है। पटना के जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। स्मार्ट सिटी परियोजना को गति देने, अतिक्रमण हटाने के अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने और सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने जैसे कदमों ने उन्हें चर्चा में ला दिया।
टॉप 100 IAS अधिकारियों में मिली जगह
उनकी कार्यशैली, प्रशासनिक क्षमता और जनहित से जुड़े फैसलों का ही परिणाम है कि उन्हें देश के शीर्ष 100 आईएएस अधिकारियों की सूची में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि बिहार प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है। डॉ. त्यागराजन का सफर इस बात का उदाहरण है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने का जज्बा हो, तो कोई भी चुनौती रास्ता नहीं रोक सकती। डॉक्टर से IPS और फिर IAS बनने तक की उनकी कहानी आज हजारों युवाओं को अपने सपनों का पीछा करने की प्रेरणा दे रही है।
































