RSS Funding Controversy: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की फंडिंग और रजिस्ट्रेशन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने इस साल जून में RSS के रजिस्ट्रेशन और उसके आर्थिक स्रोतों को लेकर सवाल उठाए थे। अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने पिछले करीब एक दशक में RSS से जुड़े 20 संगठनों को अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से लगभग 668 करोड़ रुपये दिए हैं। इस दावे के सामने आने के बाद कांग्रेस ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
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मोहन भागवत ने RSS रजिस्ट्रेशन की मांग को बताया अनावश्यक| RSS Funding Controversy
RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत पहले ही संगठन के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने कहा था कि RSS केवल लोगों का एक समूह है और इसे कानूनी रूप से रजिस्टर्ड होने की जरूरत नहीं है। भागवत के अनुसार, सरकार को संघ के अस्तित्व की जानकारी शुरू से रही है और संगठन पर कई बार प्रतिबंध भी लगाए जा चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया था कि रजिस्ट्रेशन की जरूरत आमतौर पर उन संस्थाओं को होती है जो सरकार से फंड मांगती हैं, जबकि RSS स्वयंसेवकों के योगदान से चलता है। संघ का कहना रहा है कि उसे मिलने वाला पैसा स्वयंसेवकों की ओर से दी जाने वाली ‘गुरुदक्षिणा’ और अन्य योगदान से आता है। हालांकि, अब ONGC के CSR फंड से जुड़े दावों के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
It was a memorable visit. When I introduced more than 125 small big donors and doctors present in the hall, he said “Doc, you know them by heart each and everyone. That’s amazing. It seems you have special bond with everyone” https://t.co/bUPT0HQDf7
— Dr Anant Pandhare (@apandhare1) October 10, 2024
रिपोर्ट में 20 संस्थाओं को 668 करोड़ रुपये मिलने का दावा
द न्यूज़ मिनट की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ONGC ने साल 2015 से 2025 के बीच अपने CSR फंड से देशभर की 2,000 से ज्यादा संस्थाओं और परियोजनाओं को कुल 4,531 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें से करीब 668.01 करोड़ रुपये यानी कुल CSR खर्च का लगभग 14.7 प्रतिशत हिस्सा उन 20 संस्थाओं को मिला, जिन्हें रिपोर्ट में RSS से जुड़ा बताया गया है।
₹668 crore of public money from a state-owned PSU has reportedly found its way to 20 RSS-linked organisations through CSR over the last decade.
PSU money diverted to RSS.
Temple offerings diverted to RSS.
Disaster relief funds diverted to RSS.
COVID relief diverted to RSS.…— Priyank Kharge / ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ ಖರ್ಗೆ (@PriyankKharge) July 19, 2026
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2013 से RSS से जुड़े संगठनों को कुल 670.97 करोड़ रुपये दिए गए। इसमें शुरुआती वर्षों में तीन संस्थाओं को 3 करोड़ रुपये से कम राशि मिली, जबकि बड़ी रकम अगले दस वर्षों में जारी की गई।
किस आधार पर RSS से जुड़ी बताई गईं संस्थाएं?
रिपोर्ट के अनुसार, जिन 20 संस्थाओं की पहचान की गई, उनमें नौ संगठन सीधे RSS से जुड़े बताए गए हैं। वहीं नौ संस्थाएं ऐसी बताई गई हैं, जिन्हें RSS से जुड़े लोगों ने शुरू किया या जिनका नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में है जिनके संघ से संबंध रहे हैं। दो संस्थाओं के बारे में दावा किया गया है कि उन्होंने RSS के साथ मिलकर काम किया है। इन संस्थाओं की पहचान ‘Seeing the Sangh’ नाम की एक शोध परियोजना के आधार पर की गई, जिसमें RSS से जुड़े 2,500 से ज्यादा संगठनों का डेटाबेस तैयार किया गया है।
कौन-कौन सी संस्थाएं रिपोर्ट में शामिल हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा राशि असम के शिवसागर जिले स्थित स्वर्गदेव सियू-का-फा अस्पताल को मिली। दावा किया गया है कि ONGC ने साल 2016 से 2024 के बीच इस अस्पताल के लिए करीब 434 करोड़ रुपये CSR फंड से दिए। यह अस्पताल ONGC और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान (BAVP) के सहयोग से संचालित किया जाता है। रिपोर्ट में BAVP को RSS विचारधारा से जुड़ा संगठन बताया गया है। अस्पताल का उद्घाटन 2023 में हुआ था और यहां आयुष्मान भारत योजना के तहत भी इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अनंत पंधारे BAVP के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में शामिल हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में RSS शाखा से जुड़े अपने अनुभव का भी जिक्र किया था। उन्होंने एक मीडिया बातचीत में कहा था कि उनकी संस्था RSS से जुड़ी है और उसका उद्देश्य सेवा करना है।
नागपुर के कैंसर संस्थान को भी मिला बड़ा फंड
रिपोर्ट में दूसरा बड़ा लाभार्थी डॉ. आबाजी थत्ते सेवा एवं अनुसंधान संस्थान को बताया गया है। दावा है कि ONGC ने 2017 से 2022 के बीच इस संस्था को करीब 140 करोड़ रुपये दिए। इस राशि का इस्तेमाल नागपुर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना में किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस संस्था से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के संबंध RSS और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से रहे हैं।
अन्य संस्थाओं को भी मिला CSR फंड
रिपोर्ट के मुताबिक, ONGC ने RSS से जुड़े अन्य संगठनों को भी CSR के तहत आर्थिक सहायता दी। इनमें शामिल हैं:
- सेवा भारती की विभिन्न शाखाओं को करीब 95 करोड़ रुपये
- राष्ट्रोत्थान परिषद को करीब 6 करोड़ रुपये
- एकल विद्यालय फाउंडेशन को करीब 69 करोड़ रुपये
- विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट को करीब 47 करोड़ रुपये
- विवेकानंद केंद्र को करीब 96 करोड़ रुपये
- परम शक्ति पीठ को करीब 49 करोड़ रुपये
इसके अलावा विद्या भारती से जुड़े कई स्कूलों, छात्रावासों, योग केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी फंड मिलने का दावा रिपोर्ट में किया गया है।
कर्नाटक कांग्रेस ने उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने ONGC के CSR फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में ONGC का 668 करोड़ रुपये का CSR फंड RSS से जुड़ी संस्थाओं तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हरिप्रसाद ने RSS के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि संगठन सरकारी फंड नहीं लेता। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी संस्थानों और करदाताओं के पैसे से चलने वाले संसाधनों के जरिए सहयोगी संस्थाओं को फंड मिल रहा है, तो RSS के सरकारी धन नहीं लेने के दावे को कैसे देखा जाए।
ONGC और RSS की ओर से आधिकारिक जवाब नहीं
हरिप्रसाद ने कहा कि अब बहस केवल RSS के रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि मुद्दा यह है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है और इसकी जानकारी लोगों को मिलनी चाहिए। उन्होंने RSS से अपने वित्तीय स्रोतों को लेकर जवाब देने की मांग की है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार ONGC से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया। RSS की ओर से भी इस रिपोर्ट या प्रियांक खरगे के आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
































