Ajit Doval Sikkim mission: देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को यूं ही भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ नहीं कहा जाता। अपने पूरे करियर में उन्होंने अनगिनत ऐसे साहसिक मिशनों को अंजाम दिया है, जिनकी कल्पना भर से रोंगटे खड़े हो जाएं। शनिवार को आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे एनएसए डोभाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शुरुआती दौर का एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने सभागार में मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया। यह कहानी थी उस दौर की, जब एक मिशन के दौरान उनकी पूरी जासूसी टीम को चीनी सेना (PLA) ने पकड़ लिया था और डोभाल को लगा था कि अब उनका करियर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।
सिक्किम विलय का दौर और सीमा पर तनाव| Ajit Doval Sikkim mission
अजीत डोभाल ने बताया कि यह वाकया उनके युवा आईपीएस अधिकारी के दिनों का है, जब वे खुफिया विभाग में बिल्कुल नए थे। उस समय सिक्किम का भारत में विलय हो रहा था और डोभाल को सीमा पर तैनात किया गया था। उनकी मुख्य जिम्मेदारी सीमा पार चीनी सेना की गतिविधियों और हरकतों पर पैनी नजर रखकर खुफिया इनपुट जुटाने की थी।
इसी दौरान एक बेहद गोपनीय मिशन के तहत एक भारतीय खुफिया टीम को सीमावर्ती इलाके में भेजा गया। तय योजना के मुताबिक टीम को एक निश्चित समय सीमा के भीतर वापस लौटना था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी टीम का कोई अता-पता नहीं चला।
कई दिनों तक सन्नाटा और फिर मुख्यालय से आया वो फोन
डोभाल ने उस मानवीय और मानसिक तनाव को याद करते हुए कहा कि वह दौर बेहद डरावना था। उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनके साथी जिंदा भी हैं या नहीं। उस समय इलाके में किसी हिमस्खलन (एवलांच) या दुर्घटना की कोई खबर नहीं थी, जिससे उनके गायब होने की वजह साफ हो सके।
कई दिनों के असहनीय इंतजार के बाद आखिरकार मुख्यालय से संदेश आया कि टीम के सभी सदस्यों को चीनी सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया है। चीनी सेना ने उनसे कड़ी पूछताछ की और बाद में बातचीत के जरिए उन्हें सुरक्षित वापस लौटा दिया गया।
‘लगा था 20 की उम्र में नया पेशा ढूंढना पड़ेगा’
टीम के पकड़े जाने की खबर मिलते ही अजीत डोभाल के पैरों तले जमीन खिसक गई थी। उन्हें पूरा यकीन हो चला था कि इस बड़ी चूक के बाद उनका सरकारी करियर खत्म हो जाएगा। डोभाल ने अपने शब्दों में बयां किया, “उस वक्त मैं अपनी उम्र के 20वें दशक में था। मुझे लगा कि यह मेरे करियर का अंत है और अब मुझे कोई नया काम ढूंढना पड़ेगा।”
हालांकि, बाद में जब पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच बैठी, तो डोभाल को पूरी तरह निर्दोष पाया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि मुख्यालय से फील्ड टीम को जो स्केच और नक्शे मुहैया कराए गए थे, उनमें तकनीकी खामियां और गलतियां थीं, जिसकी वजह से टीम अनजाने में भटककर चीनी कब्जे वाले इलाके में चली गई थी।
‘आज की पीढ़ी पिछले 1000 सालों में सबसे भाग्यशाली’
आईआईटी के नौजवानों में जोश भरते हुए एनएसए डोभाल ने मौजूदा पीढ़ी को पिछले 1,000 वर्षों में सबसे खुशनसीब पीढ़ी करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने गुलामी, पाबंदियों और सीमित संसाधनों का दौर देखा है, जबकि आज का युवा ऐसे दौर में जी रहा है जहां असीमित मौके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में तकनीक ही किसी भी मुल्क की तरक्की, सुरक्षा और संप्रभुता का सबसे बड़ा आधार बनेगी।












































