Noida Engineer Yuvraj Death Case: नोएडा में इंजीनियर की मौत ने खोली प्रशासन की पोल, CEO सस्पेंड, DM पर उठे सवाल

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Noida Engineer Yuvraj Death Case: उत्तर प्रदेश के नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रही, बल्कि इसने प्रशासन, रेस्क्यू सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों की बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है। 16-17 जनवरी की रात घने कोहरे के बीच हुआ यह हादसा अब राजनीतिक बहस, प्रशासनिक कार्रवाई और सिस्टम की जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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घने कोहरे में गड्ढे में गिरी कार (Noida Engineer Yuvraj Death Case)

16-17 जनवरी की रात युवराज मेहता अपने गुरुग्राम स्थित ऑफिस से नोएडा सेक्टर-150 में स्थित घर लौट रहे थे। उस वक्त इलाके में घना कोहरा था और विजिबिलिटी बेहद कम थी। इसी दौरान उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार एक निर्माणाधीन साइट के पास पहुंची, जहां सुरक्षा इंतजाम न के बराबर थे। टूटी हुई बाउंड्री वॉल से टकराने के बाद कार सीधे 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे खुदाई वाले गड्ढे में जा गिरी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो वहां चेतावनी बोर्ड लगे थे और न ही सड़क पर ब्लिंकर या संकेतक मौजूद थे, जो ड्राइवर को खतरे के बारे में आगाह कर सकें।

डेढ़ घंटे तक जिंदगी से जूझता रहा इंजीनियर

हादसे के बाद युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलने में कामयाब रहे और जान बचाने के लिए कार की छत पर चढ़ गए। करीब 90 से 120 मिनट तक वे वहीं फंसे रहे। इसी दौरान उन्होंने अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई और मोबाइल की टॉर्च जलाकर इशारे करते रहे। कॉल पर युवराज लगातार कहते रहे, “पापा, मुझे बचा लो।”

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपों के मुताबिक, इस दौरान पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर मौजूद थी, लेकिन पर्याप्त साधन और तैयारी न होने के कारण समय रहते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बढ़ता आक्रोश

युवराज मेहता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह एस्फिक्सिया यानी दम घुटना और कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया कि अगर समय पर सही तरीके से रेस्क्यू किया जाता, तो क्या उनकी जान बचाई जा सकती थी? इस घटना ने नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकार की कार्रवाई: CEO हटे, SIT गठित

हादसे का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। 19 जनवरी को नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। उन्हें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी पद से भी हटा दिया गया।

इसके साथ ही मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। मेरठ मंडलायुक्त के नेतृत्व में बनी इस SIT में एडीजी जोन मेरठ और PWD के चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं। टीम को पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी है।

सरकार की ओर से एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है, जबकि ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं।

नोएडा CEO ने पहले ही दिए थे नोटिस

हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन भी हुआ। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ डॉ. लोकेश एम ने सड़क पर ब्लिंकर और संकेतक न होने की शिकायत पर यातायात प्रकोष्ठ के वरिष्ठ प्रबंधक और प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही क्षेत्र के कनिष्ठ अभियंता नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई थीं।

सुबह NDRF ने बरामद किया शव

पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-150 के पास निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट में कार गिरने की सूचना रात करीब सवा 12 बजे मिली थी। इसके बाद दमकल विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मिलकर तलाशी अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार सुबह युवराज का शव बरामद किया गया।

AAP का हमला, DM पर उठाए सवाल

इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी ने सरकार की कार्रवाई को नाकाफी बताया है। पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “नोएडा की DM मेधा रूपम ही असल में SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन की जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है।” एक अन्य पोस्ट में सौरभ भारद्वाज ने कहा, “नोएडा की DM, जिनके अंडर रेस्क्यू ऑपरेशन और SDRF आते हैं, ECI ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। ऐसे में आप सोच सकते हैं कि भ्रष्ट IAS अधिकारियों पर केस चलाना कितना मुश्किल है. दोषी ठहराना तो दूर, पूरा सिस्टम ही खराब है।”

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source: X

 

कौन हैं IAS मेधा रूपम?

IAS मेधा रूपम 2014 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं और गौतम बुद्ध नगर की पहली महिला जिलाधिकारी हैं। इससे पहले वे कासगंज की DM रह चुकी हैं और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में अतिरिक्त CEO की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।

उनका जन्म आगरा में हुआ। शुरुआती पढ़ाई केरल में हुई और बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। UPSC 2013 में उन्होंने ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की थी।

शूटिंग में भी रही हैं चैंपियन

मेधा रूपम प्रशासनिक अफसर होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर भी हैं। वे केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं और राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुकी हैं।

प्रशासनिक परिवार से ताल्लुक

अपको जानकार हैरानी होगी कि मेधा रूपम के पिता ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। उनके पति मनीष बंसल भी IAS अधिकारी हैं और फिलहाल सहारनपुर में तैनात हैं। परिवार के कई अन्य सदस्य भी प्रशासनिक सेवाओं में रह चुके हैं।

हादसे ने खड़े किए बड़े सवाल

इस मामले ने कई अहम सवाल छोड़ दिए हैं जैसे बेसमेंट में इतना पानी कैसे भरा था? रेस्क्यू टीम के पास पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं थे? सूचना मिलने के बावजूद दो घंटे में भी युवक को बाहर क्यों नहीं निकाला जा सका?

युवराज मेहता की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की परीक्षा बन चुकी है। जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह तय हो सके कि इस दर्दनाक घटना का असली जिम्मेदार कौन है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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