भोजपुरी सिनेमा की रखी नींव और बॉलीवुड में कमाया नाम, फिर भी नहीं मिला कोई सम्मान, कुछ यूं रही नजीर हुसैन की जिंदगी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 जून 2024, 05:30 AM Updated: 05 जून 2024, 05:30 AM
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बॉलीवुड में एक ऐसा एक्टर हुआ है जिसने कई बड़े एक्टर्स के साथ काम किया है…उन्होंने 500 फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग से फिल्मी दुनिया में जगह बनाई, उन्हें भोजपुरी सिनेमा का जनक तक कहा गया। हालांकि इतना कुछ हासिल करने के बाद इस एक्टर को न तो उनके टैलेंट की सराहना मिली और न ही उन्हें कोई सम्मान दिया गया। दरअसल हम बात कर रहे हैं नजीर हुसैन की। नजीर ही वो शख्स थे जिन्होंने भोजपुरी सिनेमा की नींव रखी। नजीर ने फिल्मों में ज्यादातर पिता, दादा, चाचा और मामा का किरदार निभाया। लेकिन दुख की बात ये है कि उन्हें वो पहचान नहीं मिली जिसके वो हकदार थे।

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फैंस उनके किरदारों को नहीं भूल पाए हैं

फिल्मों में धर्मेंद्र के ससुर और हेमा मालिनी के पिता का किरदार निभाकर मशहूर हुए नजीर हुसैन आज भी दर्शकों के दिलो-दिमाग पर राज करते हैं। बेशक आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किरदारों को आज तक फैंस नहीं भूले हैं। नजीर हुसैन ने देव आनंद, अशोक कुमार, गुरु दत्त, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और गोविंदा जैसे सुपरस्टार्स के साथ काम किया। मधुबाला, मीना कुमारी, वहीदा रहमान, आशा पारेख, मुमताज, हेमा मालिनी और रेखा उनकी ऑन-स्क्रीन बेटियां बनकर मशहूर हुईं।

1950 से 1970 तक नजीर ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। उन्होंने ‘परिणीता’, ‘जीवन ज्योति’, ‘मुसाफिर’, ‘अनुराधा’, ‘साहिब बीवी और गुलाम’, ‘नया दौर’, ‘कटी पतंग’, ‘कश्मीर की कली’ जैसी कई हिट फिल्में दीं। एक्टर होने के साथ ही साथ वो बेहद ही होनहार स्क्रिप्ट राइटर, डायलॉग राइटर थे। वे फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी थे।

नजीर हुसैन का प्रारंभिक जीवन

नजीर हुसैन का जन्म 15 मई 1922 को उत्तर प्रदेश के उसिया गांव में हुआ था। उनके पिता शाहबाज खान भारतीय रेलवे में गार्ड हुआ करते थे। खबरों की मानें तो एक्टर बनने से पहले नजीर रेलवे में फायरमैन की नौकरी भी करते थे। फिर वे ब्रिटिश आर्मी में शामिल हो गए। इसी दौरान जब दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ तो आर्मी ने उन्हें युद्ध के मैदान में भेज दिया। कुछ समय तक नजीर मलेशिया और सिंगापुर में तैनात रहे। हालात खराब होने पर उन्हें युद्ध के दौरान पकड़ लिया गया और मलेशिया की जेल में बंद कर दिया गया। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया और भारत भेज दिया गया। इसके बाद वे थिएटर से जुड़ गए। इस तरह कोलकाता में नजीर हुसैन की मुलाकात निर्देशक बिमल रॉय से हुई और वे उनके सहायक बन गए। बिमल रॉय ने ही उन्हें सिनेमा से परिचित कराया।

पहली फिल्म से छा गए थे

आपकी जानकारी के लिए बता दें नजीर हुसैन ने बिमल रॉय के साथ मिलकर ‘पहला आदमी’ नाम की फिल्म बनाई थी। यह फिल्म आजाद हिंद फौज के अनुभव पर आधारित थी। यह फिल्म 1950 में रिलीज हुई थी और रिलीज होते ही हिट हो गई थी। इस फिल्म के बाद नजीर हुसैन बिमल रॉय की लगभग हर फिल्म का हिस्सा बन गए।

भोजपुरी के जनक

खबरों की मानें तो नजीर हुसैन को भोजपुरी का जनक इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से भोजपुरी सिनेमा की संभावनाओं पर चर्चा की थी। नजीर ने पहली भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ बनाई थी, जो साल 1963 में रिलीज हुई थी। उन्हें आज भी 1970 के दशक की हिट भोजपुरी फिल्म ‘बलम परदेसिया’ के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई भोजपुरी फिल्मों में भी काम किया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि नजीर हुसैन को कभी कोई सम्मान या पुरस्कार नहीं दिया गया।

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