72nd National Film Awards: गुजरात के एकता नगर में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस बार साल 2024 में रिलीज हुई बेहतरीन फिल्मों और कलाकारों के शानदार काम को सम्मानित किया गया। समारोह में जहां यामी गौतम स्टारर ‘आर्टिकल 370’ ने देश की बेस्ट फीचर फिल्म का सबसे बड़ा खिताब अपने नाम किया, वहीं हिंदी सिनेमा की बात करें तो राजकुमार राव की फिल्म ‘श्रीकांत’ ने बाजी मारी। इस फिल्म के डायरेक्टर तुषार हीरानंदानी ने खुद मंच पर जाकर यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया। लेकिन सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, इस बार देश की अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों ने भी अपनी जबरदस्त कहानियों और किरदारों से सबका दिल जीत लिया।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत की फिल्मों ने जमाया रंग| 72nd National Film Awards
असमिया सिनेमा के लिए यह शाम बेहद खास रही। डायरेक्टर जादुमोनी दत्ता की फिल्म ‘ज्वइफुल’ को बेस्ट असमी फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस फिल्म ने असमिया सिनेमा को देश के नक्शे पर एक नई पहचान दी है। उधर मणिपुर का नाम रोशन करते हुए फिल्म ‘सुनीता’ ने बेस्ट मणिपुरी फिल्म का खिताब जीता, जिसे डायरेक्टर अजीत यमुनाम ने स्वीकार किया।
उड़िया सिनेमा से अमृत्य भट्टाचार्या के निर्देशन में बनी और झिलिक भट्टाचार्जी द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘लहरी’ को बेस्ट उड़िया फिल्म चुना गया। इसके साथ ही बंगाली सिनेमा की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते हुए अंजन दत्त की फिल्म ‘चालचित्र एकोन’ ने बेस्ट बंगाली फिल्म का अवॉर्ड अपने नाम किया। यह फिल्म मशहूर फिल्ममेकर मृणाल सेन को एक खूबसूरत ट्रिब्यूट के रूप में बनाई गई थी।
गढ़वाली सिनेमा ने रचा इतिहास
उत्तराखंड और पहाड़ी सिनेमा के लिए यह पल सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। फिल्म ‘ढोली’ को साल 2024 के लिए बेस्ट गढ़वाली फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। फिल्म के डायरेक्टर दिनेश भोंसले ने यह अवॉर्ड ग्रहण किया। खास बात यह है कि गढ़वाली भाषा में मिलने वाला यह पहला नेशनल अवॉर्ड है, जिसकी वजह से यह जीत और भी ऐतिहासिक बन जाती है।
साउथ सिनेमा का जलवा, धनुष की ‘रायन’ आगे
साउथ की फिल्मों का दबदबा इस बार भी पूरी तरह कायम रहा। तमिल सिनेमा में सुपरस्टार धनुष की फिल्म ‘रायन’ ने बेस्ट तमिल फिल्म का नेशनल अवॉर्ड झटका। धनुष ने खुद यह सम्मान लिया, जिन्होंने इस फिल्म में एक्टिंग के साथ-साथ इसका डायरेक्शन भी किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी जबर्दस्त कमाई करने में कामयाब रही थी।
तेलुगू में युवाओं पर बनी फिल्म ‘कमेटी कुर्रोल्लू’ ने बेस्ट तेलुगू फिल्म का अवॉर्ड जीता। डायरेक्टर यादु वामसी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह पुरस्कार हासिल किया। इसी फिल्म के लिए पी रवि कुमार को बेस्ट मेकअप आर्टिस्ट का अवॉर्ड भी मिला। कन्नड़ से सुमंत भट्ट की लिखी और डायरेक्ट की हुई फिल्म ‘मिथ्या’ ने बेस्ट फीचर फिल्म का खिताब जीता, जबकि मलयालम में फासिल मोहम्मद की चर्चित फिल्म ‘फेमिनिची फातिमा’ को बेस्ट मलयालम फिल्म का सम्मान मिला। वहीं कर्नाटक के तटीय इलाके की तुलु भाषा में बनी फिल्म ‘इम्बु’ को बेस्ट फिल्म चुना गया, जिसका अवॉर्ड डायरेक्टर शिवध्वज शेट्टी और प्रोड्यूसर प्रशांत राय ने लिया।
मराठी, गुजराती और कोंकणी ने दिखाया दम
मराठी सिनेमा पहले से ही अपनी मजबूत कहानियों के लिए चर्चा में रहता है। ऑस्कर्स की दौड़ में शामिल ‘गोंधल’ की चर्चाओं के बीच, परेश मोकाशी की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिवाड़ी’ ने बेस्ट मराठी फिल्म का अवॉर्ड अपने नाम किया।
गुजराती सिनेमा में अभिषेक जैन को उनकी फिल्म ‘मारन’ के लिए बेस्ट डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड दिया गया। वहीं गोवा की कोंकणी भाषा में बनी शानदार हॉरर-थ्रिलर ‘मोग असुम’ को बेस्ट कोंकणी फिल्म का खिताब मिला, जिसका डायरेक्शन एग्नेलो एंजेलो ब्रागांजा और राधेश्याम पिपलवा ने मिलकर किया था।












































