Karva Chauth 2025: सुहागिनों के साल का सबसे बड़ा त्योहार,जानें इस बार कब मनाया जाएगा सही समय और तारीख

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 07 अक्टूबर 2025, 05:30 AM Updated: 07 अक्टूबर 2025, 05:30 AM
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Karva Chauth 2025: हर सुहागिन महिला (Married women) के लिए करवा चौथ (Kavwa Chauth) साल का सबसे खास और महत्वपूर्ण दिन होता है। यह सिर्फ़ एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।
इस दिन, विवाहित महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं—सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास—बिना अन्न-जल ग्रहण किए, अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। लेकिन क्या आप जानते है इस साल करवा चौथ कब मनाया जाएगा। अगर नहीं तो चलिए आपको इस लेख में विस्तार से बताते हैं।

करवा चौथ कब मनाया जाएगा?

हिंदी पंचांग के मुताबिक इस साल यानी 2025 में करवा चौथ शुक्रवार, 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यद्यपि चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात से शुरू होती है, उदया तिथि, पूजा का शुभ समय और चंद्रोदय का समय 10 अक्टूबर को है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाएगा। यह पवित्र त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।

विवरणसमय और तिथि
व्रत की तिथि (मुख्य दिन)10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ09 अक्टूबर 2025, रात 10:54 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त10 अक्टूबर 2025, शाम 07:38 बजे
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्तशाम 05:57 बजे से 07:11 बजे तक
पूजा की अवधि1 घंटा 14 मिनट
चंद्रोदय का समयरात 08:13 बजे

 

कैसे करे करवा चौथ व्रत पूजा विधि

करवा चौथ (Karwa Chauth) के दिन, विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान करके और अपनी सास द्वारा दी गई सरगी (मीठा पकवान) खाकर निर्जला व्रत रखने का संकल्प लेती हैं। पूरे दिन उपवास करने के बाद, वे सोलह श्रृंगार करके शाम की पूजा की तैयारी करती हैं।

वही पूजा स्थल पर गौरी और गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती हैं और उन्हें सुहाग का सामान चढ़ाया जाता है। इतना ही नहीं एक करवा (मिट्टी का बर्तन) पानी और अनाज से भरा होता है।

सुहागिन महिला को दे सुहाग का सामान 

सभी विवाहित महिलाएं करवा चौथ व्रत कथा सुनने और गौरी, गणेश और करवा माता की पूजा करने के लिए एकत्रित होती हैं। जब चंद्रमा उदय होता है, तो महिलाएं सबसे पहले छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और अर्घ्य (जल) देती हैं। इसके बाद, वे उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। अंत में, वे अपने पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर अपना व्रत तोड़ती हैं। इसके अलवा आपको बता दें, अपनी सास या किसी अन्य सुहागिन महिला (जेठानी, पंडिताइन) को बायना (पूजन सामग्री, मिठाई, वस्त्र आदि) देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

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