Jauhar University ED raid: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई सरकारी ठेकों से जुड़े पैसों के कथित हेरफेर और उसे ट्रस्ट व यूनिवर्सिटी के खातों में ट्रांसफर करने के पुख्ता सबूतों के आधार पर की गई है। ईडी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी विभागों से ठेके हासिल करने वाले कई प्राइवेट ठेकेदारों ने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के कंस्ट्रक्शन व अन्य कामों में लगाया था।
अधिकारियों को ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों के बैंक अकाउंट्स के एनालिसिस, प्रॉपर्टी के दस्तावेजों और जब्त किए गए डिजिटल डेटा की पड़ताल के दौरान इन संदिग्ध लेन-देन का पता चला। यह रकम चेक और आरटीजीएस (RTGS) के जरिए भेजी गई थी।
मनी ट्रेल खंगालने में जुटी ईडी की टीम| Jauhar University ED raid
जांच में सामने आया है कि साल 2012 से 2017 के बीच कई सरकारी विभागों के ठेकेदारों, उनके करीबियों और यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुआ था। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठेकेदारों ने डोनेशन, पेमेंट या अन्य लेन-देन के नाम पर किस रूट से यह पैसा जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट तक पहुंचाया। एजेंसी इस पूरे मनी ट्रेल के सोर्स और आखिरी छोर तक पहुंचने में जुटी है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि यह लेन-देन वास्तविक कारोबार और चैरिटी का हिस्सा था या फिर अवैध कमाई को ठिकाने लगाने और काले धन को सफेद करने के लिए रची गई साजिश थी।
₹45 करोड़ का दावा, असल खर्च ₹494 करोड़ होने का शक
सूत्रों के अनुसार, सरकारी फंड के दुरुपयोग, फर्जी दानदाताओं (फेक डोनर्स), डमी ट्रस्टियों और काले धन के इस्तेमाल की जानकारी मिलने के बाद ही ईडी ने यह एक्शन लिया। जांच में एक बड़ा अंतर सामने आया है….ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के 59 भवनों के निर्माण में महज ₹45 करोड़ खर्च होने का दावा किया था, जबकि जांच एजेंसी के वैल्यूएशन में असल खर्च करीब ₹494 करोड़ पाए जाने का अनुमान है। खर्च के इस भारी अंतर को छिपाने और ब्लैक मनी को खपाने के शक में ही मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है।
8 सरकारी विभागों से लगे ₹110 करोड़, सांसद-विधायक निधि का भी इस्तेमाल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण कार्य में 8 अलग-अलग सरकारी विभागों के करीब ₹110 करोड़ खर्च किए गए थे। वहीं एजेंसी को कुछ ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनसे विभागों द्वारा करीब ₹150 करोड़ तक खर्च किए जाने के संकेत मिलते हैं। इतना ही नहीं, तत्कालीन राजनीतिक रसूख के चलते यूनिवर्सिटी कैंपस में निर्माण कार्यों के लिए सांसद और विधायक निधि (MP-MLA Fund) से भी लगभग ₹4.57 करोड़ जारी किए गए थे। फिलहाल ईडी जब्त किए गए सभी डिजिटल सबूतों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।













































