Sonam Wangchuk की पत्नी की अर्जी पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, NSA के तहत हिरासत को बताया ‘मनमानी’

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 24 नवम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 24 नवम्बर 2025, 05:30 AM
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Sonam Wangchuk: पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक नवाचारों के लिए दुनिया भर में पहचाने जाने वाले सोनम वांगचुक की हिरासत पर आज सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की उस अर्जी पर होगी, जिसमें उन्होंने वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने को गैर-कानूनी, मनमाना, और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

यह मामला अब केवल कानूनी बहस का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि लद्दाख में बढ़ते सामाजिक तनाव, असहमति की आवाज़ों को लेकर सरकारी रवैये और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

और पढ़ें: Sonam Wangchuk Arrested: सोनम वांगचुक को क्यों लिया गया हिरासत में? लद्दाख में हिंसा की शुरुआत कैसे हुई?

29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था जवाब (Sonam Wangchuk)

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को गीतांजलि की बदली हुई याचिका पर केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन से जवाब दाखिल करने को कहा था। आज की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच करेगी। याचिका में कहा गया है कि वांगचुक की गिरफ्तारी एक तरह से “दुरुपयोग” है, जो संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों को आहत करता है।

26 सितंबर को लगे थे एनएसए के तहत

26 सितंबर को वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था। इससे ठीक दो दिन पहले लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठे शेड्यूल की मांग को लेकर बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जो दुर्भाग्य से हिंसक हो गए। उस हिंसा में चार लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया, जबकि उनकी पत्नी की याचिका में कहा गया है कि यह आरोप बिना ठोस सबूतों के, अस्पष्ट FIR, और “अंदाज़ों” पर आधारित है।

याचिका का दावा: “हिरासत का आदेश बेतुका”

याचिका में साफ कहा गया है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे लद्दाख व पूरे देश में शिक्षा, इनोवेशन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से सम्मानित किया गया, उसे अचानक “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताना तर्कसंगत नहीं है।
याचिका में यह भी आरोप है कि चुनावों से ठीक दो महीने पहले वांगचुक के खिलाफ एक साथ कई कार्रवाई हुईं जैसे जमीन का पट्टा रद्द करना, FCRA निरस्त करना, CBI जांच की सिफारिश,और इनकम टैक्स नोटिस भेजना।

पत्नी की अर्जी में कहा गया है कि इन सभी कदमों से यह स्पष्ट होता है कि विपक्ष या असहमति की आवाज़ को “शांत” करने की कोशिश की गई।

हिंसा की उन्होंने खुद निंदा की थी: याचिका

याचिका में बताया गया कि 24 सितंबर की लेह हिंसा का वांगचुक से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने उसी दिन अपने सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और लिखा था कि हिंसा से लद्दाख की पांच साल की शांतिपूर्ण कोशिशें खत्म हो जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि ‘यह मेरी जिंदगी का सबसे दुखद दिन है’ जो दर्शाता है कि वह किसी भी तरह की अराजकता के पक्षधर नहीं हैं।

NSA में क्या है प्रावधान?

याचिका के अनुसार NSA की धारा 8 कहती है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को पांच दिनों के भीतर, और विशेष परिस्थितियों में दस दिनों के भीतर, हिरासत के कारणों की जानकारी देना अनिवार्य है।
NSA केंद्र व राज्यों को देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या सार्वजनिक व्यवस्था पर खतरा पैदा करने वाले व्यक्तियों को 12 महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

1 सितंबर 1966 को लेह के एक छोटे से गांव में जन्मे सोनम वांगचुक बचपन से ही शिक्षा की कमी से जूझते रहे। गांव में स्कूल न होने की वजह से नौ साल की उम्र तक उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली। इसके बाद श्रीनगर में पढ़ाई हुई और फिर उन्होंने अपना पूरा जीवन विज्ञान, इनोवेशन और समाज सेवा को समर्पित कर दिया। फिल्म थ्री इडियट्स का फुनसुख वांगडू का किरदार भी उन्हीं से प्रेरित था।

उनका सबसे चर्चित आविष्कार वह “सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट” है, जो माइनस 20 डिग्री के तापमान में भी अंदर 15 डिग्री का तापमान बनाए रखता है वह भी बिना किसी कोयला या केरोसिन के। इसे सेना के लिए एक पर्यावरण-हितैषी वरदान माना जाता है।

वांगचुक का आंदोलन लद्दाख को राज्य का दर्जा, छठे शेड्यूल का संरक्षण, लोक सेवा आयोग की स्थापना, फास्ट-ट्रैक भर्तियाँ और दो अलग लोकसभा सीटों जैसी मांगों को आगे बढ़ाता रहा है।

जेल में सोनम वांगचुक क्या कर रहे हैं?

अब आते हैं उस सवाल पर कि आखिर जेल में सोनम वांगचुक क्या कर रहे हैं? यह हिस्सा शायद सबसे चौंकाने वाला है क्योंकि जेल के भीतर सोनम वांगचुक वही कर रहे हैं जो वे बाहर करते थे लोगों को रोशनी देना। उनसे मिलने वालों के मुताबिक, जेल की सलाखों के पीछे भी वे खुद को टूटने नहीं दे रहे। वह जेल में आने वाले स्टाफ के बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उन्हें अख़लाक, विज्ञान और जीवन की सीख दे रहे हैं। बच्चों के लिए वे वहां एक “उस्ताद” बन गए हैं। जेल स्टाफ भी उनसे सलाह लेता है कि बच्चों की परवरिश कैसे की जाए। वांगचुक का जवाब बेहद सरल था, “बच्चों की गलतियां कम, और उनकी अच्छी बातें ज्यादा याद रखें यही अच्छी तरबियत है।”

जेल में वे पढ़ाई भी कर रहे हैं। इस समय वे श्री अरविंदो की किताब “टेल्स ऑफ़ प्रिजन लाइफ” पढ़ रहे हैं जो खुद अरविंदो के एक साल की कैद का अनुभव है। वांगचुक ने कहा कि यह किताब उनके हालात से मिलती-जुलती लगती है।

वे सनडायल और चींटियों के व्यवहार पर एक किताब भी पढ़ना चाहते हैं, ताकि समझ सकें कि छोटी-सी मख़लूक मिलकर बड़े काम कैसे करती है।

कैद में भी उम्मीद का चिराग

उनकी पत्नी और नज़दीकी लोग बताते हैं कि वांगचुक जेल में भी शांत, केंद्रित और सकारात्मक हैं।
वे कहते हैं,“इंसान को कैद किया जा सकता है, पर उसके विचार और उसके ज्ञान को नहीं।” जेल के भीतर वह बच्चों के लिए शिक्षक हैं, स्टाफ के लिए सलाहकार, और कैदियों के लिए एक उम्मीद।

और पढ़ें: लद्दाख खुद को संविधान की छठी अनुसूची में क्यों शामिल कराना चाहता है? संविधान के मुताबिक समझें

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