PM मोदी का दिया गिफ्ट भी नहीं संभाल सकी युनूस सरकार, जेशोरेश्वरी मंदिर से देवी काली का मुकुट चोरी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 11 अक्टूबर 2024, 05:30 AM Updated: 11 अक्टूबर 2024, 05:30 AM
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इन दिनों भारत के कई राज्यों में दुर्गा पूजा मनाई जा रही है, वही बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार जब से आई है, तब से ही हिंदुओं के साथ अत्याचार बढ़ गया है और अब फिर से बड़ी खबर सामने आई है कि बांग्लादेश के प्रसिद्ध जेशोरेश्वरी मंदिर से मां देवी काली का कीमती मुकुट चोरी हो गया. ये मुकुट भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में अपने दौरे के दौरान भेंट किया था. ऐसे में यह मुकुट केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों का भी प्रतीक था.

क्या है पूरा मामला

बांग्लादेश में यूनुस सरकार से पीएम मोदी का दिया खास तोहफा भी सही से संभाला नहीं गया. दरअसल, बांग्‍लादेश के सतखीरा स्थित जेशोरेश्‍वरी मंदिर में देवी काली का मुकुट चोरी हो गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मुकुट साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दौरे के दौरान गिफ्ट में दिया था. वही बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार के मुताबिक, सोने चांदी से बना हुआ यह मुकुट गुरुवार को दोपहर 2:00 बजे से 2:30 बजे के बीच चोरी हो गया. उस समय मंदिर के पुजारी दिलीप मुखर्जी पूजा के बाद मंदिर से बाहर जा चुके थे. बाद में सफाई कर्मचारियों ने पाया कि देवी के सिर से मुकुट गायब है. तभी से ये खबर सोशल मीडिया पर हवा से भी तेज वायरल हो रही है.

हालाँकि मामले की जांच की जारी है. इसके अलवा श्यामनगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर तैजुल इस्लाम ने बताया कि ‘हम मंदिर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं ताकि चोर की पहचान हो सके और अपराधी को जल्द-से जल्द पकड़ा जा सकें. चोरी हुआ मुकुट भक्तों के लिए काफी धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि जेशोरेश्वरी मंदिर भारत और पड़ोसी देशों में फैले 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है और यह घटना नवरात्रि के दौरान हुई है, जो कि एक हिंदू त्योहार है. इसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें मां काली के रूप में भी पूजा जाता है.

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जेशोरेश्वरी मंदिर का इतिहास 

हिन्दू धर्म में देवी के कई शक्तिपीठ है. उन्हीं में से मां दुर्गा का एक शक्तिपीठ बांग्लादेश में भी है, जिसे जशोरेश्वरी काली मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर 400 साल पुराना है. इस मंदिर में 100 दरवाजे है. इस मंदिर को 12वीं शताब्दी एक ब्राह्मण द्वारा बनवाया गया था. बाद में इसका जीर्णोद्धार 13वीं शताब्दी में लक्ष्मण सेन ने करवाया था और अंततः 16 वीं शताब्दी में राजा प्रतापदित्य ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था. वैसे इतिहास में इस मंदिर के निर्माता को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. वहीं कहा जाता है कि 1971 के युद्ध में इस मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था. इसके बाद मुख्य मंदिर के पास एक मंच बनाया गया, जिसे नटमंडिर नाम दिया गया। इस मंच से आज मां काली के दर्शन किए जाते हैं. पुराने मंदिर में आज सिर्फ खंभे देखे जा सकते हैं.

इसके अलावा PM मोदी ने 2021 में बांग्लादेश दौरे पर एक वादा किया था. यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि भारत इस मंदिर में एक बहुउद्देशीय सामुदायिक हॉल का निर्माण करेगा. स्थानीय लोगों के लिए सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक आयोजनों के लिए इसके उपयोग पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि यह चक्रवात जैसी आपदाओं के समय सभी के लिए एक आश्रय स्थल के रूप में कार्य करेगा.

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