Food safety tea regulations: सुबह की शुरुआत जिस चाय की चुस्की के साथ करोड़ों भारतीय करते हैं, उसकी शुद्धता और सुरक्षा को लेकर देश के शीर्ष फूड रेगुलेटर FSSAI ने एक अहम फैसला लिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय की पत्तियों में पाए जाने वाले दो प्रमुख कीटनाशकों ‘एसिटामिप्रिड’ (Acetamiprid) और ‘इमिडाक्लोप्रिड’ (Imidacloprid) के अवशेषों की अधिकतम सीमा (MRL यानी मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट) तय करने का प्रस्ताव रखा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस कदम का मकसद आम उपभोक्ताओं की सेहत की रक्षा करने के साथ-साथ चाय उत्पादक किसानों की फसल सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों के बीच एक बेहतर संतुलन बनाना है।
क्या तय की गई है नई सीमा? Food safety tea regulations
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (संदूषक, विषाक्त पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे के तहत FSSAI ने चाय में इन दोनों कीटनाशकों की कानूनी रूप से अनुमत मात्रा का पैमाना तय किया है:
- एसिटामिप्रिड: इसके लिए अधिकतम सीमा 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (20 PPM) प्रस्तावित की गई है।
- इमिडाक्लोप्रिड: इसके लिए अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (50 PPM) रखने का सुझाव दिया गया है।
मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है, जिसे अंतिम रूप दिए जाने से पहले सभी पक्षों से विचार-विमर्श किया जा रहा है। इन सीमाओं के तय हो जाने से चाय बागानों के मालिकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, व्यापारियों, फूड टेस्टिंग लैब्स और नियमों की निगरानी करने वाले अधिकारियों को काम करने में बिल्कुल साफ कानूनी दिशानिर्देश मिल सकेंगे।
वैश्विक मानकों से ज्यादा सख्त हैं भारतीय नियम
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि यह सीमाएं पूरी तरह वैज्ञानिक रिसर्च, खानपान के जरिए शरीर में पहुंचने वाले रसायनों की मात्रा और समग्र स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की गई हैं। राहत की बात यह है कि भारत में प्रस्तावित सीमा दुनिया के कई विकसित देशों की तुलना में ज्यादा सख्त है। उदाहरण के तौर पर, चाय में एसिटामिप्रिड की जो सीमा भारत में 20 PPM रखी जा रही है, वह जापान में 30 PPM और अमेरिका में 50 PPM तक स्वीकृत है। वहीं, इमिडाक्लोप्रिड की सीमा भी अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स (Codex) मानकों के अनुकूल रखी गई है।
किसानों की जरूरत और सेहत का संतुलन
यह पूरा कदम FSSAI की उस लंबी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत खाद्य सुरक्षा नियमों को आधुनिक बनाया जा रहा है। साल 2024 के संशोधनों के दौरान भी वैश्विक अध्ययनों के आधार पर अत्यधिक जहरीले पाए गए 13 कीटनाशकों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर सूची से बाहर कर दिया गया था।
मंत्रालय का कहना है कि जहां एक तरफ सेहत जरूरी है, वहीं खेती में कीटों से बचाव के लिए कीटनाशकों की सीमित जरूरत को भी नकारा नहीं जा सकता। सही मात्रा और तय नियमों से इस्तेमाल करने पर कीटनाशक फसलों को भारी बर्बादी से बचाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल 0.5 किलोग्राम से भी कम है, जो कि 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के वैश्विक औसत से काफी कम है।












































