Atishi Marlena Detained: देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित धांधली और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने रोक दिया। पटेल चौक और जंतर-मंतर के आसपास पुलिस ने कड़े सुरक्षा घेरे और बैरिकेड्स लगा रखे थे। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना, आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और आईसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा समेत सैकड़ों लोगों को हिरासत में ले लिया।
पटेल चौक से जंतर-मंतर तक हाई वोल्टेज ड्रामा| Atishi Marlena Detained
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता, छात्र और आम नागरिक बड़ी संख्या में पटेल चौक पर जुटे थे। इस मार्च में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन और पल्लव सिसौदिया जैसे कानूनी चेहरे भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत रद्द करने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
पटेल चौक से आगे बढ़ते ही पुलिस ने उन्हें पहली बैरिकेडिंग पर रोका। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर जाना चाहते हैं। तकरार बढ़ी और कार्यकर्ताओं ने दो बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए सभी को बसों में भरकर अलग-अलग थानों में भेजना शुरू कर दिया।
500 से अधिक लोग हिरासत में, थानों में भी जारी रही नारेबाजी
पुलिस ने इलाके में 10 से ज्यादा लोगों के एक साथ जुटने पर रोक लगा रखी थी। AISA का दावा है कि पुलिस ने छात्रों, वकीलों और नेताओं समेत 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। नेहा बोरा समेत करीब 10 लोगों को कोतवाली थाने, जबकि योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, अंजलि भारद्वाज और अन्य कार्यकर्ताओं को बदरपुर व बाहरी दिल्ली के थानों में ले जाया गया। हिरासत में लिए जाने के बावजूद कार्यकर्ता लगातार ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे लगाते रहे।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाना लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शन की पूर्व सूचना दी गई थी, तो फिर रास्ता क्यों रोका गया? कार्यकर्ताओं का कहना है कि मतदान का अधिकार सीधे लोकतंत्र से जुड़ा है और जब तक चुनाव आयोग में जवाबदेही तय नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली के बाद अब मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’
इधर दिल्ली में माहौल गरमाया हुआ है, तो उधर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भी विरोध की आग पहुंच गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क से ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी नेता अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों की मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 में से सिर्फ 9 सीटें जीतने वाली भाजपा कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव में अचानक बड़ा उलटफेर कैसे कर गई? उन्होंने कहा कि दिल्ली की सत्ता की रक्षा हमेशा से महाराष्ट्र करता आया है, इसलिए यह लड़ाई मुंबई से भी लड़ी जाएगी।













































