CEC Gyanesh Kumar PIL: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग (ECI) के हालिया फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और खुद सीईसी ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली अहम सुनवाई 27 अक्टूबर को तय की गई है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा था कि वह चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी हालिया फैसलों की कानूनी वैधता की बारीकी से जांच करेगी। अगर कोई भी निर्णय कानून और नियमों के दायरे से बाहर पाया गया, तो अदालत उसे रद्द करने में तनिक भी देर नहीं करेगी। यह मामला उन याचिकाओं के बाद उठा है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोनों चुनाव आयुक्तों की आवश्यक सहमति और मंजूरी के बिना ही कई बड़े फैसले एकतरफा ले लिए।
‘अगर CEC को हटाया तो आयोग का काम ठप हो जाएगा’| CEC Gyanesh Kumar PIL
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अदालत से मांग की थी कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक अंतरिम राहत के तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित किया जाए और उन्हें आगे कोई भी नीतिगत निर्णय लेने से तुरंत रोका जाए।
इस मांग पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। सीजेआई ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा, “अगर मुख्य चुनाव आयुक्त को ही सस्पेंड कर दिया गया, तो चुनाव आयोग का कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा। फिर देश में चुनाव कौन कराएगा?” इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि बाकी दोनों चुनाव आयुक्त मिलकर कामकाज संभाल सकते हैं, लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि अदालत सिर्फ अखबारों की सुर्खियों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इतना बड़ा फैसला नहीं दे सकती। इसके लिए आयोग और केंद्र सरकार का आधिकारिक जवाब रिकॉर्ड पर आना बेहद जरूरी है।
फॉर्म 6 में बदलाव पर भी सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलाव के मुद्दे पर भी चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने स्थिति साफ की। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को अपनी मंजूरी नहीं दी है। बेंच ने कहा कि जब पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश किया जाएगा, तब यह देखा जाएगा कि फॉर्म-6 में बदलाव वास्तव में किसने और किस अधिकार से किया।
अब सभी की निगाहें 27 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां केंद्र और चुनाव आयोग को अपने जवाब के साथ अदालत के सवालों का सामना करना होगा।














































