अब नहीं चलेगी स्कूलों की मनमानी! फीस से यूनिफॉर्म तक सम्राट चौधरी ने जारी की गाइडलाइन| Bihar private school New rules

[nedrick_meta]
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google
[modern_share]

Bihar private school New rules: बिहार में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी और अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ संदेश दिया है कि अब निजी विद्यालय अपनी मनमर्जी से नियम नहीं चला सकेंगे। लगातार फीस बढ़ोतरी, हर साल नई किताबें लागू करने और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों पर दबाव बनाने जैसी शिकायतों के बाद सरकार ने कई अहम निर्देश जारी किए हैं।

और पढ़ें: एक दिन में 50 IAS-IPS अफसरों ने खरीदी जमीन, फिर आया ₹3200 करोड़ का बायपास… भोपाल डील पर मचा बवाल| Bhopal Land Scam

फीस बढ़ोतरी और महंगी खरीदारी से परेशान थे अभिभावक| Bihar private school New rules

पिछले कुछ वर्षों में बिहार के कई जिलों से निजी स्कूलों के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। अभिभावकों का आरोप था कि स्कूल हर साल किताबें बदल देते हैं, जिससे उन्हें नए सेट खरीदने पड़ते हैं। इसके अलावा यूनिफॉर्म, कॉपी और स्टेशनरी भी कुछ तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता था, जहां कीमतें सामान्य बाजार से कहीं ज्यादा होती थीं।

मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह खर्च लगातार बढ़ता जा रहा था। कई जगहों पर अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन भी किए और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। अब सरकार ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।

फीस को लेकर पारदर्शिता जरूरी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया है कि अब राज्य के सभी निजी स्कूलों को फीस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूलों को स्पष्ट बताना होगा कि किस मद में कितनी फीस ली जा रही है। बिना उचित कारण फीस में भारी बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।

सरकार का मानना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों को यह समझने में आसानी होगी कि आखिर उनसे किस चीज के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। इससे स्कूलों की मनमानी पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।

अब किसी खास दुकान से खरीदारी की मजबूरी नहीं

सरकार का सबसे बड़ा फैसला किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर आया है। अब कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा।

अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से किसी भी दुकान से सामान खरीद सकेंगे। माना जा रहा है कि यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा, जो हर साल स्कूलों द्वारा तय दुकानों से महंगे पैकेज खरीदने को मजबूर होते थे।

फीस बकाया होने पर नहीं रोका जाएगा रिजल्ट

मुख्यमंत्री ने फीस बकाया रहने की स्थिति में छात्रों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने साफ किया है कि फीस जमा नहीं होने पर किसी छात्र को परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा और न ही उसका रिजल्ट रोका जा सकेगा।

अक्सर देखा जाता था कि निजी स्कूल फीस बकाया होने पर बच्चों पर मानसिक दबाव बनाते थे। कई मामलों में छात्रों को क्लास में अपमानित किया जाता था या परीक्षा से वंचित कर दिया जाता था। सरकार ने अब इस पर कड़ा रुख अपनाया है।

नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई

राज्य सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि जो निजी विद्यालय इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग को भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी लागू हों।

फैसले का स्वागत, अभिभावकों में राहत

शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अगर इन नियमों को ईमानदारी से लागू किया गया तो बिहार की निजी शिक्षा व्यवस्था ज्यादा जवाबदेह और संतुलित बन सकती है।

और पढ़ें: प्रीमियम भरते रहो और क्लेम के वक्त इंतजार करो! बजाज की हेल्थ इंश्योरेंस से लोग क्यों है परेशान? Bajaj health insurance controversy

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds