सावधान! क्या फिर से लौटने वाला है Work From Home? PM मोदी ने जनता से की ये 7 बड़ी अपीलें! | PM Modi Appeal

Rajni | Nedrick News India Published: 13 May 2026, 11:53 AM | Updated: 13 May 2026, 11:56 AM

PM Modi Appeal: इजरायल-ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव ने भारत सरकार को संकट प्रबंधन मोड में ला दिया है। ईंधन की खपत को तत्काल कम करने और सरकारी खर्चों में कटौती के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस देशव्यापी किफायत अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार दो दिनों की संयम वाली अपील के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि केंद्र सरकार आने वाले समय में कुछ और बड़े आर्थिक कदम उठा सकती है।

आज हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक के बाद माना जा रहा है कि सरकार खर्च में कटौती, ईंधन संरक्षण और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रही है। अब सभी की नजरें सरकार की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया संबोधनों में देशवासियों से “आर्थिक राष्ट्रभक्ति” (Economic Patriotism) दिखाने की पुरजोर अपील (PM Modi Appeal) की है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया (इजरायल-ईरान युद्ध) संकट के कारण दुनिया जिस कठिन दौर से गुजर रही है, उसमें सीमा पर जान देना ही सिर्फ देशभक्ति नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में संसाधनों की बचत करना भी देश के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।

पीएम मोदी ने देशवासियों से मुख्य रूप से 7 बातों को अपनाने की सलाह (7 Appeals) दी है:

  • सोने की खरीद टालें: विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने के आभूषण खरीदने से बचें।
  • ईंधन की खपत घटाएं: पेट्रोल-डीजल का संयमित इस्तेमाल करें। गाड़ियां कम निकालने के लिए कारपूलिंग अपनाएं।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं: सफर के लिए निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग ज्यादा करें।
  • वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स: कोरोना काल की तरह सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम (WFH) और वर्चुअल मीटिंग्स को फिर प्राथमिकता दें ताकि ईंधन बचे।
  • विदेशी यात्राएं और शादियां टालें: डॉलर की बचत के लिए फिलहाल विदेश यात्राएं और विदेशों में होने वाली डेस्टिनेशन वेडिंग्स को कुछ समय के लिए टाल दें।
  • खाद्य तेल का उपयोग सीमित करें: खाने के तेल (Edible Oil) के आयात पर भी भारत का बहुत बड़ा पैसा बाहर जाता है, इसलिए इसकी खपत में थोड़ी कमी लाएं।
  • वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local): विदेशी ब्रांड्स की जगह स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को जन-आंदोलन बनाएं।

सरकार का मानना है कि यदि देश के 140 करोड़ नागरिक एकजुट होकर इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनी आदत बना लें, तो वैश्विक मंदी और तेल संकट के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

क्या फिर लौट सकता है वर्क फ्रॉम होम?

कोविड-19 महामारी के समय जिस तरह वर्क फ्रॉम होम (WFH) आम हो गया था, वैसा ही मॉडल देश में फिर से देखने को मिल सकता है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद अब सरकार, आईटी कंपनियों और उद्योग जगत के बीच इस पर चर्चा तेज हो गई है।

टेक इंडस्ट्री की शीर्ष संस्था NASSCOM ने कहा है कि भारतीय आईटी कंपनियां पहले से ही मजबूत हाइब्रिड मॉडल (घर और ऑफिस दोनों से काम) पर काम कर रही हैं। वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए कंपनियां अब ग्राहकों की जरूरत और प्रोजेक्ट्स के आधार पर वर्क फ्रॉम होम और इन-ऑफिस व्यवस्था को नए सिरे से संतुलित कर रही हैं, ताकि कैंपस में भी बिजली और ऊर्जा की बचत की जा सके।

दूसरी ओर, आईटी कर्मचारियों के बड़े संगठन NITES ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि आईटी और डिजिटल सर्विस सेक्टर के लिए कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य करने की स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए। संगठन का तर्क है कि महानगरों में लाखों कर्मचारियों के दैनिक आवागमन से भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता है, जिसे घर से काम देकर आसानी से बचाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि बड़ी टेक और कॉर्पोरेट कंपनियां अपने कर्मचारियों को रिमोट वर्किंग की अनुमति देती हैं, तो शहरों में ट्रैफिक जाम और देश में पेट्रोल-डीजल की खपत दोनों में भारी कमी आएगी।

सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए?

वैश्विक तेल संकट और बढ़ते आर्थिक दबाव से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने केवल जनता से अपील ही नहीं की है, बल्कि खुद सरकारी स्तर पर भी कई कड़े और बड़े फैसले लागू कर दिए हैं:

  1. सरकारी काफिलों में भारी कटौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मिसाल पेश करते हुए अपने आधिकारिक काफिले की गाड़ियों की संख्या को घटाकर सिर्फ 4 कर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिले को तत्काल प्रभाव से आधा (50%) कर दिया है, ताकि सरकारी ईंधन और खर्च बचाया जा सके।

  1. सोना-चांदी पर बढ़ा आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी)

देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) से डॉलर की निकासी रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा वित्तीय कदम उठाया है। इसके तहत सोने और चांदी पर लगने वाले प्रभावी आयात शुल्क को सीधे 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है, ताकि गैर-जरूरी आयात (Non-essential imports) पर तुरंत लगाम लगाई जा सके।

  1. ईंधन और ऊर्जा संरक्षण पर सख्त निर्देश

सभी सरकारी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बड़े और खर्चीले फिजिकल सेमिनार या कॉन्फ्रेंस के बजाय केवल ऑनलाइन और वर्चुअल मीटिंग्स का आयोजन करें। अधिकारियों की गैर-जरूरी हवाई और विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी गई है।

सरकारी विभागों में नई गाड़ियों की खरीद पर रोक लगाते हुए मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), मेट्रो, रेलवे और कारपूलिंग के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को अनिवार्य किया जा रहा है।

आने वाले दिनों में क्या हो सकते हैं बड़े फैसले?

आर्थिक विशेषज्ञों और वित्तीय विश्लेषकों के मुताबिक, यदि इजरायल-ईरान संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो केंद्र सरकार आने वाले दिनों में देश की राजकोषीय स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए कुछ और सख्त आर्थिक कदम उठा सकती है। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित फैसले शामिल हो सकते हैं:

  • प्रशासनिक खर्चों (Administrative Expenditure) में भारी कटौती: सभी सरकारी मंत्रालयों और विभागों के गैर-जरूरी खर्चों को तर्कसंगत (Rationalise) बनाने के कड़े नियम आ सकते हैं।
  • सरकारी विदेशी दौरों पर और सख्ती: मंत्रियों और अधिकारियों के केवल बेहद जरूरी या रणनीतिक द्विपक्षीय दौरों को ही मंजूरी मिलेगी, बाकी को टाला जाएगा।
  • लक्जरी और गैर-जरूरी आयात पर कड़े नियम: देश से डॉलर बाहर जाने से रोकने के लिए सोने-चांदी की तरह अन्य गैर-जरूरी विलासिता (Luxury) की वस्तुओं पर भी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है।
  • हाइब्रिड वर्क मॉडल को आधिकारिक बढ़ावा: कॉर्पोरेट और निजी क्षेत्र के लिए वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देने के लिए श्रम मंत्रालय की ओर से एक विस्तृत एडवाइजरी जारी हो सकती है।
  • ईंधन की कीमतों में चरणबद्ध बदलाव (Phased Hike): वर्तमान में सरकार युद्ध के इस आर्थिक बोझ को खुद संभाल रही है ताकि आम जनता प्रभावित न हो। लेकिन, JM Financial की रिपोर्ट के अनुसार, संकट लंबा चलने पर तेल कंपनियों के घाटे को संतुलित करने के लिए भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेहद मामूली और धीरे-धीरे (Calibrated) बढ़ोतरी की शुरुआत हो सकती है।
  • ‘नो कार डे’ (No Car Day) जैसी पहल: दिल्ली जैसे महानगरों और सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में एक दिन अधिकारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट या मेट्रो से आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

सरकार की ओर से अभी तक इनमें से किसी भी आगामी कदम का कोई आधिकारिक ऐलान या अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की गई है। ये सभी बिंदु वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर अर्थशास्त्रियों के अनुमानों पर आधारित हैं।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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