Bihar News: अगर विरासत ना हो, तो एक सरकारी बाबू के पास वैध तरीके से कितने रुपए-पैसे और जमीन-जायदाद हो सकती है? कहते हैं जब इंसान के मन में लालच आता है, तो वह सिर्फ अंधाधुंध पैसे की ओर ही भागता है। बिहार के एक सरकारी इंजीनियर ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की रेड में योजना एवं विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के मुजफ्फरपुर वाले फ्लैट से 50 लाख रुपये कैश और आय से 64% से ज्यादा की काली कमाई का खुलासा हुआ है।
लगातार मिल रही थीं भ्रष्टाचार की शिकायतें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नारद कुमार दास मूल रूप से भागलपुर के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंगेर में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (LAEO) में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात हैं। साथ ही, उनके पास जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता का अतिरिक्त प्रभार भी है। दरअसल, EOU को लगातार गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से अकूत काली कमाई जमा की है।
प्राथमिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा
EOU के आर्थिक अपराध प्रभाग द्वारा कराई गई प्राथमिक और गोपनीय जांच में यह बड़ी बात सामने आई है। जांच के अनुसार, कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के पास अपनी ज्ञात और वैध आय (Salary & other legal sources) की तुलना में 83,53,200 रुपये (83.53 लाख) से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति है। यह संपत्ति उनकी कुल कानूनी आय से करीब 64.93 प्रतिशत अधिक आंकी गई है।
मुकदमा दर्ज और कोर्ट से मिला सर्च वारंट
शुरुआती जांच में ठोस सबूत मिलने के बाद, 7 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित आर्थिक अपराध इकाई थाने में नारद कुमार दास के खिलाफ कांड संख्या- 28/26 दर्ज किया गया। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत दर्ज हुआ है। एफआईआर दर्ज करने के तुरंत बाद ईओयू ने पटना की विशेष न्यायालय (निगरानी) से उनके ठिकानों की तलाशी के लिए सर्च वारंट हासिल किया।
5 ठिकानों पर एक साथ छापा
सर्च वारंट मिलते ही 8 अक्टूबर 2026 की तड़के सुबह करीब 5 बजे ईओयू (EOU) एक्शन में आ गई। पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने बिहार के चार जिलों में फैले उनके 5 ठिकानों पर एक साथ धावा बोल दिया। इस दौरान मुजफ्फरपुर स्थित उनके फ्लैट से 50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं, जिसके लिए नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी। फिलहाल ईओयू की टीमों द्वारा सभी ठिकानों पर जमीन, मकान और निवेश से जुड़े पेपर्स की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद काली कमाई का सारा ब्योरा और आंकड़ा पूरी तरह साफ हो पाएगा।











































