स्क्वाश में भारत का नाम रोशन करने वाली अनाहत सिंह के नाम का जानिए क्या है आध्यात्मिक अर्थ – Anahat Singh

Shikha Mishra | Nedrick News Delhi Published: 14 सितम्बर 2026, 05:06 PM Updated: 14 सितम्बर 2026, 05:06 PM
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Anahat Singh: सिख धर्म के मानने वाले पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अपना ग्यारहवां और जीवित गुरु मानते हैं; उनका मानना ​​है कि अगर *संगत* (समूह) सच्चे दिल से—और अपना सारा अहंकार त्यागकर—’वाहेगुरु’ का जाप करे, तो सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। ‘वाहेगुरु’ सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि एक ईश्वरीय नाम है; इसके ध्यान से ही सारे दुख मिट जाते हैं और इंसान अंधेरे से रोशनी की ओर बढ़ता है। सच तो यह है कि गुरु ग्रंथ साहिब की हर रचना में गहरे रहस्य छिपे हैं, और हर शब्द का असर इतना ज़बरदस्त होता है कि वह किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को ही बदल सकता है। ऐसा ही एक नाम है ‘अनाहत’।

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अनाहत सिंह की ऐतिहासिक सफलता

हाल ही में, इस नाम ने काफ़ी ध्यान खींचा है, और इसका श्रेय एक युवा सिख महिला को जाता है, जिसने न सिर्फ़ सिख समुदाय बल्कि पूरे भारत का नाम रोशन किया है। जी हाँ, 18 साल की अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी इस शानदार कामयाबी की तारीफ़ तो होनी ही चाहिए, लेकिन उनके नाम के महत्व ने उनके बारे में हो रही चर्चा को और बढ़ा दिया है—एक ऐसा नाम जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब की महिमा का जीता-जागता सबूत है। आइए, इस शब्द के अर्थ को समझते हैं।

एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, उन्होंने 26 जुलाई 2026 को कनाडा के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप 2026 के फ़ाइनल में मिस्र की रुकैया सलेम को 3-0 से हराया। इस जीत से उन्होंने न सिर्फ़ सिख समुदाय बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। अनाहत सिंह जूनियर वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बन गई हैं। 13 मार्च 2008 को दिल्ली के पंचशील इलाके में जन्मी अनाहत के बारे में अक्सर गलतफहमी होती है कि वह पंजाब से हैं; हालांकि, उनका परिवार पीढ़ियों से दिल्ली में रह रहा है और वह यहीं की रहने वाली हैं। उनके पिता गुरशरण सिंह दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं, जबकि उनकी मां तानी चक्रवर्ती एक इंटीरियर डिज़ाइनर हैं। अनाहत की बड़ी बहन अमीरा सिंह भी एक बेहतरीन स्क्वैश खिलाड़ी हैं; उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान अंडर-19 नेशनल स्क्वैश टीम के लिए खेला था।

अनाहत का नाम गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़ा है इसका रहस्य

अनाहत ने नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित द ब्रिटिश स्कूल से अपनी स्कूलिंग पूरी की और चैंपियनशिप जीतने के बाद वो बहन की तरह ही हावर्ड यूनिवर्सिटी जाने की तैयारी में है, लेकिन फिलहाल के लिए उन्होंने पढ़ाई से ब्रेक लेकर एशियन गेम्स 2026 और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक गेम्स पर फोकस करने का फैसला किया है। उनका सपना है कि वो भारत के गोल्ड जीत कर लाये। अनाहत ने नोएडा के ‘डिफेंस सर्विसेज क्लब’ से ट्रेनिंग पूरी की थी। अनाहत बचपन में बैडमिंटन खेलती थी लेकिन 8 साल की उम्र में उनका इंटरेस्ट स्क्वैश की तरफ मुड़ गया जब उन्होंने अपनी बहन को स्क्वैश खेलता देखा। अनाहत के माता पिता अपने बच्चों के सपने को पूरा सपोर्ट करते है।

अब सवाल यह उठता है कि उस शब्द से जुड़े व्यक्ति के बजाय खुद उस शब्द पर ज़्यादा चर्चा क्यों हो रही है? असल में, ‘अनहत’ शब्द ‘जपजी साहिब’ में आता है—जो ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ का एक हिस्सा है। ‘जपजी साहिब’ की एक खास पंक्ति है: “आदि अनील अनादि अनहत जुग-जुग एको वेस…” ये पंक्तियाँ ‘वाहेगुरु’ (ईश्वर) के असली स्वरूप को बताने के लिए पढ़ी जाती हैं। ये ऐसे ‘वाहेगुरु’ के बारे में बताती हैं जिनकी न तो कोई शुरुआत है और न ही कोई अंत; जो सभी रूपों और दिखावे से परे हैं; जो अजन्मे, अमर और अविनाशी हैं—यानी जिन पर किसी भी चोट या हमले का कोई असर नहीं होता। यहाँ, ‘अनाहत’ शब्द ईश्वर के लिए इस्तेमाल हुआ है—वे जो कभी पैदा नहीं हुए और कभी मरेंगे नहीं, और जो समय और उम्र बढ़ने के नियमों से परे हैं।

अनाहत शब्द ईश्वर के लिए इस्तेमाल हुआ

जो हर दर्द, हर चोट से रहित है, जो खुद ही अडिग है.. वो शक्ति जिसे कोई हिला नहीं सकता है। अनाहत, जिसका कोई कभी भी कुछ भी आहत नहीं कर सकता, कुछ नहीं बिगाड़ सकता है.. ये वो ध्वनि है, जो स्वयं से पैदा हुआ है.. एक ब्रह्मांजीय उर्जा किसी बिना किसी टकराव के गूंज रही है। ये वो दिव्य संगीत है जो आपको स्वंय को गहराई से देखने के बाद सुनाई देता है। जिसे एक बार पाने के बाद आप परम शांति को पा लेते है। जो बिना विचलित हुए हमेशा शांत और एकसमान ही रहता है। अनाहत शब्द की महिमा को जितनी कही जायें वो कम ही होगी.. इसलिए नाम केवल सिखों के लिए ही नही बल्कि अन्य के लिए भी चर्चा का कारण बन गया है। कहते है कि नाम का असर व्यक्ति के व्यक्तित्व पर भी पड़ता है वैसे ही अनाहत सिंह भी अपने नाम की तरह आगे बढ़ रही है.. बिना रूके.. जल्द ही वो अपना सपना भी पूरा करेंगी।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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