Kamlesh Bind Encounter: गाजीपुर में 1 लाख के इनामी कमलेश बिंद के एनकाउंटर के बाद भारी बवाल शुरू हो गया है। शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस पर जमकर पत्थर बरसाए, जिसमें कई बड़े अधिकारी घायल हुए हैं। एक तरफ पूरा गाजीपुर हिंसा की आग में झुलस रहा है वहीं दूसरी तरफ, इस मुठभेड़ पर सियासत गरमा गई है और अखिलेश यादव के तीखे बयान ने योगी सरकार की ‘एनकाउंटर नीति’ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है कि क्या है पूरा मामला
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क्या है पूरा मामला?
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में 1 लाख के इनामी बदमाश कमलेश बिंद उर्फ कमलेश चौधरी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद भारी बवाल खड़ा हो गया है। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ बताते हुए पुलिस टीम पर भीषण पथराव कर दिया। इस हिंसक झड़प में सर्कल ऑफिसर (CO), थानाध्यक्ष और कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
1 करोड़ की रंगदारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक अपराधी कमलेश बिंद 29 मई की रात को हुए स्थानीय होटल व्यवसायी के बेटे विनीत राय हत्याकांड का मुख्य आरोपी था। यह हत्या कथित तौर पर 1 करोड़ की रंगदारी न देने के कारण की गई थी, जिसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में थी।
मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी को भी लगी गोली
बुधवार देर शाम पुलिस और स्वाट (SWAT) टीम की घेराबंदी के दौरान दोनों तरफ से फायरिंग हुई, जिसमें कमलेश बिंद ढेर हो गया। इस मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी रोहित मिश्रा को भी गोली लगी है, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन
विवाद तब बढ़ा जब गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन और लगभग 400 ग्रामीणों की भीड़ कमलेश का शव अंतिम संस्कार के लिए ले जा रही थी। भीड़ ने फूलपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। जब पुलिस जाम खुलवाने पहुंची, तो प्रदर्शनकारियों ने उन पर पत्थरों से हमला कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और पुलिस पर हमला करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सोची-समझी रणनीति!
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही कमलेश बिंद का शव फुल्लनपुर क्रॉसिंग के पास पहुंचा, अचानक 100 से 200 की संख्या में महिलाएं पिकअप गाड़ी के आगे आकर बैठ गईं। एक सोची-समझी रणनीति के तहत महिलाओं को आगे किया गया था ताकि पुलिस तुरंत लाठीचार्ज या कड़ी कार्रवाई न कर सके।
जैसे ही मौके पर पहुंचे सर्कल ऑफिसर (CO) शेखर सेंगर और कोतवाली प्रभारी प्रमोद सिंह ने भीड़ को समझाकर शव को हटाने की कोशिश की, अचानक भीड़ में मौजूद कुछ उपद्रवियों ने उकसाने वाले नारे लगाए। इसके ठीक बाद चारों तरफ से पुलिस टीम पर ईंट-पत्थर बरसने लगे।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पथराव इतना भीषण था कि पुलिस बल को पीछे हटना पड़ा। करीब 50 पुरुष और महिला कांस्टेबलों की टीम अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगी। स्थिति यह हो गई थी कि कुछ पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को जान बचाने के लिए पास के एक बैंक और दुकानों के भीतर शरण लेनी पड़ी और शटर गिराने पड़े।
जांच की मांग
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पथराव की शुरुआत में ही सीओ सिटी शेखर सेंगर के सिर पर एक भारी पत्थर लगा, जिससे उनका सिर फट गया और वह लहूलुहान हो गए। बाद में जब अतिरिक्त पुलिस फोर्स और वज्र वाहन मौके पर पहुंचे, तब जाकर घेराबंदी कर घायल अधिकारियों और महिला पुलिसकर्मियों को वहां से सुरक्षित निकाला गया और अस्पताल पहुँचाया गया।
वहीं दूसरी ओर, कमलेश बिंद के भाई संजय चौधरी और उसकी पत्नी का आरोप है कि यह कोई मुठभेड़ नहीं थी। उनके अनुसार पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कमलेश को पकड़ा और उसकी हत्या कर दी। परिजन इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
इस एनकाउंटर को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार की ‘एनकाउंटर नीति’ और कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) खुद अपराधियों की तरह काम कर रही है और केवल अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मुठभेड़ का सहारा ले रही है।
सपा प्रमुख और विपक्षी दलों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज खत्म हो चुका है। पुलिस द्वारा अपराधियों को पकड़ने के बजाय सोची-समझी रणनीति के तहत फर्जी मुठभेड़ें (फेक एनकाउंटर) दिखाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की इन कार्रवाइयों ने जनता का भरोसा तोड़ा है, जिसका नतीजा गाजीपुर में सार्वजनिक गुस्से और पथराव के रूप में देखने को मिला है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है। सरकार राजनीतिक लाभ और चश्मे से देखकर चुनिंदा आधार पर एनकाउंटर को अंजाम दिलवा रही है, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
पुलिस का एक्शन
इस पूरे बवाल पर गाजीपुर के एसपी डॉ. ईरज राजा ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले और सरकारी अधिकारियों पर हमला करने वाले उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो और तस्वीरों के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।






























