जानिए कांशीराम को राष्ट्रपति क्यों बनाना चाहते थे वाजपेयी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 31 अक्टूबर 2023, 05:30 AM Updated: 31 अक्टूबर 2023, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा देने वाले कांशीराम का सपना था कि समाज में जिन जातियों के साथ जातिगत भेदभाव होता है, जिनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है, जिन अछूतों की व्यक्ति होने के अधिकार तक नही मिले है, उस पिछड़े वर्ग के किसी व्यक्ति को देश के सबसे ऊँचे पद पर बैठाएं. जिसके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया था. जिसके चलते एक बार देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कांशीराम को देश का राष्ट्रपति बनने को भी कहा था, लेकिन दलितों मसीहा कांशीराम ने देश का राष्ट्रपति बनने से इंकार कर दिया था. कांशीराम ने जीवन भर दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगो के लिए काम किया है, उन्होंने बीएस एक ही इंसान के लिए कभी काम नहीं किया, वे इंसान वह खुद है. उन्होंने अपना परिवार भी समाज की सेवा करने के लिए छोड़ दिया था.

दोस्तों, आज हम आपको बताएंगे की दलितों के मसीहा कांशीराम ने वाजपेयी ने जब उन्हें राष्ट्रपति बनने को कहा तो उन्होंने इंकार क्यों किया था ? कांशीराम क्यों राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे ?

और पढ़ें : संविधान से इंडिया नाम हटाने पर जानिए बाबा साहेब के विचार… 

कांशीराम ने राष्ट्रपति बनने से किया था इंकार

कांशीराम को दलितों और पिछड़े वर्ग का मसीहा कहा जाता है. क्यों कि उन्होंने जीवनभर पिछड़े वर्ग के लोगो को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष किया था. इसी कारण उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को देश का राष्ट्रपति बनने से इंकार कर दिया था उन्होंने कहा था कि ‘मैं देश का राष्ट्रपति नही प्रधानमंत्री बनना चाहता हूं’. क्यों कि उनका एक सपना था कि पिछड़े वर्ग के किसी व्यक्ति को देश के सबसे ऊँचे पद पर बैठाएं यानि देश का प्रधानमंत्री बनाएं.

क्यों कि कांशीराम को पता था कि देश के सबसे शक्तिशाली पद प्रधानमंत्री का होता है, देश में राष्ट्रपति का पद बीएस नाम का होता है. कांशीराम इस बात से वाखिफ थे कि वह राष्ट्रपति बनकर अपने लोगो का भला नही कर पाएंगे. वह पिछड़े वर्ग के लोगो को नौकरियां नहीं दिला पाएंगे , न शिक्षा दिला पाएंगे, उनके लिए कानून नहीं बना पाएंगे, संसाधनों पर उनकी हिस्सेदारी नहीं दे पाएंगे. जिसके चलते उन्होंने राष्ट्रपति बनने से मना कर दिया था. हालांकि, कांशीराम का यह सपना आज तक पूरा नहीं हो पाया है, उनके मारने के बाद भी उनका सपना अधुरा ही है. लेकिन इस सपने को काफी हद तक उन्होंने जब पूरा किया था, जब एक बड़ी संख्या वाले हिन्दू राज्य ने एक दलितों महिला मायावती को उन्होंने राज्य का मुख्यमंत्री बनाया था.

कांशीराम को राष्ट्रपति क्यों बनाना चाहते थे वाजपेयी

हम आपको बता दे कि कांशीराम ने दलित संघर्ष में ऐसी रणनीति बनाई जिसने ब्राह्मणवाद को हिला कर रख दिया था. कांशीराम ने जब मुलायम सिंह के साथ हाथ मिलाया तब उन्होंने हिन्दुत्व की लहर के बावजूद भी बीजेपी को हरा दिया था. जिसके बाद वह इतनी बड़ी आवाज बनाकर उभरे, जिससे देखकर वाजपेयी ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने को कहा, वाजपेयी कांशीराम को राष्ट्रपति का पद देकर बैठा देना चाहते थे. क्यों कि उन्हें भलीभांति मालूम था कि राष्ट्रपति का पद बीएस नाम का होता है, जिससे वह दलित उमीदवार को उंच पद पर भी बैठा देते और उनका के बड़ा प्रतिनिधि भी रास्ते से हट जाता. इसका अंदाजा आप दलित राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और द्रौपदी मुर्मू के आने से हो रहे बदलाव से ही लगा सकते है.

और पढ़ें : जानिए क्यों बाबा साहेब के बेटे को कफन तक नसीब नहीं हुआ था…

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds