दिवाली तक कहां पहुंचेगा सोना? अभी खरीदें या थोड़ा और करें इंतजार, जानिए एक्सपर्ट्स की राय| Gold Price Prediction

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 10 जुलाई 2026, 10:13 PM Updated: 10 जुलाई 2026, 10:13 PM
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Gold Price Prediction: अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहा है। इसका प्रभाव ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और खासकर सोने की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने महंगाई की आशंकाओं को फिर से बढ़ा दिया है, जिसके चलते निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना एक बार फिर करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।

वहीं भारतीय बाजार में सोने की कीमतें फिलहाल लगभग 1.40 लाख से 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में बनी हुई हैं। हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अब सोने में बड़ी गिरावट की संभावना काफी कम रह गई है।

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क्या अब और सस्ता होगा सोना? Gold Price Prediction

बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर सोना अपने निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। उनके अनुसार यहां से अधिकतम 5 प्रतिशत तक की गिरावट संभव है, लेकिन इससे ज्यादा कमजोरी आने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग केवल इस उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं कि सोना और सस्ता होगा, उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहिए। घरेलू बाजार में करीब 1.35 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

आखिर कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस समय सबसे बड़ा कारण है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसका असर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों पर देखने को मिलता है। इसके अलावा निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर भी टिकी हुई है। यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सोने पर कुछ दबाव रह सकता है क्योंकि सोना ब्याज देने वाली संपत्ति नहीं है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार में घबराहट पहले की तुलना में कम हुई है और सोना स्थिर दायरे में कारोबार कर रहा है।

ज्वेलरी बाजार में लौट रही है रौनक

सोने की कीमतों में आई नरमी का असर अब ज्वेलरी कारोबार पर भी दिखने लगा है। पिछले कुछ महीनों में ऊंची कीमतों और बाजार में अनिश्चितता के कारण आभूषणों की मांग काफी कमजोर हो गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जहां ज्वेलरी की मांग में 75 से 80 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी, वहीं अब यह गिरावट घटकर लगभग 40 से 45 प्रतिशत रह गई है। यानी बाजार धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है।

व्यापारियों को उम्मीद है कि अगस्त और सितंबर से त्योहारी खरीदारी शुरू होगी और दिवाली तक ज्वेलरी की मांग पिछले साल के बराबर या उससे भी बेहतर हो सकती है।

भारत से ज्वेलरी एक्सपोर्ट क्यों बढ़ रहा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ज्वेलरी के निर्यात में बढ़ोतरी का सीधा संबंध किसी राजनीतिक बयान से नहीं है। इसकी बड़ी वजह भारत में आयात शुल्क में बदलाव है। भारत में बढ़े शुल्क के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय ग्राहक वहीं से ज्वेलरी खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। खासतौर पर दुबई और आसपास के देशों में भारतीय डिजाइन की ज्वेलरी की मांग बढ़ी है। माना जा रहा है कि टैक्स के इस अंतर का फायदा आगे भी भारतीय ज्वेलरी एक्सपोर्ट को मिलता रह सकता है।

दिवाली तक कितना महंगा हो सकता है सोना?

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो जाता है और वैश्विक हालात सामान्य होते हैं, तो दिवाली तक घरेलू बाजार में सोना करीब 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। हालांकि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो सोना 1.35 लाख से 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,800 डॉलर प्रति औंस का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि आगे 5,100 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चांदी में भी तेजी के संकेत

सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी को लेकर भी विशेषज्ञ सकारात्मक नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 60 डॉलर के आसपास मजबूत रह सकती है। घरेलू बाजार में चांदी के लिए 2.20 लाख रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना गया है, जबकि इसकी कीमत 2.28 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना भी जताई गई है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना अभी भी एक बेहतर रणनीति हो सकती है। एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। हालांकि निवेशकों को अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसलों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में यही कारक सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

नोट: यह जानकारी बाजार विशेषज्ञों की व्यक्तिगत राय पर आधारित है। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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