खतरे में पड़ी बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी, खरीद-फरोख्त मामले में कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 Apr 2021, 12:00 AM | Updated: 01 Apr 2021, 12:00 AM

देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनावों में राजनीतिक पार्टियां बहुमत हासिल करने या गठबंधन कर सरकार बनाने के बावजूद अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाती है। पिछले कुछ सालों से ऐसा लगातार देखने को मिल रहा है। 

मध्यप्रदेश, कर्नाटक और गोवा जैसे राज्यों में यह देखने को मिल चुका है कि कैसे नाटकीय तरीके से विधायक पार्टी से इस्तीफा दे देते हैं और अल्पमत में आने के कारण सरकार धराशायी हो जाती है। जिसके बाद प्रदेश में बीजेपी सरकार बना लेती है। 

कर्नाटक (Karnataka) में भी ऐसा ही खेल देखने को मिला था, जब जेडीएस-कांग्रेस (CON-JDS) के 15 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी ने बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) के नेतृत्व में सरकार बना ली थी। लेकिन अब इस मामले को लेकर अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) की मुश्किलें बढ़ने वाली है। 

कर्नाटक हाई कोर्ट ने ऑपरेशन कमल (Operation Lotus) मामले में राज्य के सीएम बीएस येदियुरप्पा की भूमिका की जांच की मंजूरी दे दी है। उनपर पर प्रदेश की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को गिराने के लिए साजिश रचने का आरोप है।

वायरल हुई थी ऑडियो क्लिप

खबरों के मुताबिक एक ऑडियो क्लिप (Audio Clip) सामने आई थी, जिसमें येदियुरप्पा कथित तौर पर एक विधायक के बेटे को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करते सुने गए कि वह अपने पिता से इस्तीफा दिलवाए और पार्टी बदल ले। 

दरअसल, कांग्रेस-जेडीएस के 15 विधायकों ने जून 2019 में विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और मुंबई चले गए थे। विधायकों के इस्तीफे के तुरंत बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ने उन विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया।

जिसके बाद 14 महीने पुरानी कांग्रेस-जेडीएस सरकार जुलाई में कर्नाटक में बहुमत साबित नहीं कर पाई और सरकार गिर गई। इसके बाद बीएस येदियुरप्पा ने चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। अब उनकी कुर्सी खतरे में पड़ती दिख रही है।

कर्नाटक की सियासत में सीटों का गणित

बता दें, कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 (Karnataka Assembly election 2018) में किसी भी राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली थी। 224 विधानसभा सीटों वाले कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को 104 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस पार्टी ने 80 सीटें और प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी जेडीएस ने 37 सीटों पर कब्जा जमाया था। 

तब कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने मिलकर एचडी कुमारास्वामी के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार बनाई। लेकिन सरकार बनाने के करीब 1 साल के भीतर ही कथित तौर पर बीजेपी ने खेल कर दिया और कांग्रेस-जेडीएस के कई विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। 

जिसके बाद अल्पमत में आने के कारण कुमारास्वामी के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। कांग्रेस और जेडीएस की ओर से बीजेपी पर लगातार विधायकों को तोड़ने और खरीदने के आरोप लगाए जा रहे थे। तब बीजेपी ने बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार का गठन किया।

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds