Hantavirus outbreak: अर्जेंटीना से रवाना हुए डच क्रूज शिप MV Hondius पर फैले हंतावायरस संक्रमण ने दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जहाज पर सवार कई यात्री गंभीर रूप से बीमार हो गए, जबकि अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना के बाद World Health Organization यानी WHO ने स्थिति पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।
WHO ने गुरुवार को बताया कि इस क्रूज से जुड़े कुल 8 मामले सामने आए हैं। इनमें से पांच लोगों में हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि तीन अन्य संदिग्ध मामलों की जांच जारी है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि WHO का कहना है कि फिलहाल इसे महामारी जैसी स्थिति नहीं माना जा सकता।
क्या है हंतावायरस? Hantavirus outbreak
हंतावायरस कोई नया वायरस नहीं है। यह आमतौर पर चूहों और दूसरे कृंतक जीवों से फैलता है। संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है। कई मामलों में बंद जगहों पर वायरस तेजी से फैलने का खतरा भी रहता है। WHO प्रमुख ने मीडिया ब्रीफिंग में साफ कहा कि यह वायरस कोविड-19 जैसा नहीं है। उन्होंने कहा, “यह कोरोना वायरस नहीं है और न ही दुनिया को किसी नई महामारी का सामना करना पड़ रहा है।”
पहली मौत ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, क्रूज पर पहला मामला 6 अप्रैल को सामने आया था। एक पुरुष यात्री में सांस से जुड़ी गंभीर परेशानी के लक्षण दिखे थे। शुरुआत में इसे सामान्य रेस्पिरेटरी बीमारी माना गया, इसलिए उस समय हंतावायरस का संदेह नहीं हुआ और कोई सैंपल भी नहीं लिया गया। 11 अप्रैल को उसी यात्री की जहाज पर मौत हो गई। बाद में जब दूसरे यात्रियों में भी इसी तरह के लक्षण दिखने लगे, तब जांच शुरू हुई। जहाज के डॉक होने के बाद एक अन्य संक्रमित यात्री जोहानसबर्ग पहुंचा, जहां उसकी भी मौत हो गई। इसके बाद जांच में हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। स्विट्जरलैंड में भी इससे जुड़ा एक मामला सामने आया है।
12 देशों को अलर्ट
WHO ने उन 12 देशों को आधिकारिक तौर पर सतर्क किया है, जिनके नागरिक इस क्रूज पर मौजूद थे और बाद में सेंट हेलेना में जहाज से उतरे। इनमें United Kingdom, United States, Canada, Germany, Netherlands, Switzerland, Singapore और Turkey जैसे देश शामिल हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल जहाज पर मौजूद बाकी यात्रियों में कोई गंभीर लक्षण नहीं देखे गए हैं।
जांच में जुटी एक्सपर्ट टीम
WHO ने बताया कि उसकी एक विशेषज्ञ टीम काबो वर्दे में जहाज पर पहुंच चुकी है। टीम में नीदरलैंड के डॉक्टरों और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। ये विशेषज्ञ जहाज के कैनेरी द्वीप तक पहुंचने तक यात्रियों की मेडिकल जांच करेंगे और संक्रमण के खतरे का आकलन करेंगे। WHO का कहना है कि संक्रमण की चेन तोड़ने और जोखिम कम करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इंसानों में कितनी तेजी से फैलता है वायरस?
WHO की विशेषज्ञ डॉ. मारिया के मुताबिक, ज्यादातर हंतावायरस स्ट्रेन इंसानों से इंसानों में आसानी से नहीं फैलते। उन्होंने कहा कि यह SARS-CoV-2 यानी कोरोना वायरस जैसा नहीं है। कुछ मामलों में बेहद करीबी संपर्क या शारीरिक संबंध के जरिए संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वायरस की इनक्यूबेशन अवधि करीब 6 हफ्ते तक हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कुछ और मामले सामने आ सकते हैं।
कैसे पहचानें शुरुआती लक्षण?
हंतावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं। मरीज को तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और थकान महसूस होती है। लेकिन कुछ ही समय में स्थिति गंभीर हो सकती है। यह वायरस शरीर की ब्लड वेसल्स को कमजोर कर देता है, जिससे तरल पदार्थ फेफड़ों में जमा होने लगता है। मरीज को सांस लेने में भारी परेशानी होती है और हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, गंभीर स्थिति में ECMO मशीन की जरूरत पड़ सकती है, जो कृत्रिम रूप से फेफड़ों और हृदय का काम करती है। इसी वजह से अर्जेंटीना और चिली जैसे देशों में हंतावायरस के लक्षण मिलते ही मरीजों को विशेष मेडिकल सेंटर भेजने का नियम है।
फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं और यात्रियों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।
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