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धारा 511 क्या है, कब लगती है और क्या है इससे बचने का प्रावधान

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 01 Aug 2023, 12:00 AM | Updated: 01 Aug 2023, 12:00 AM

धारा 511 क्या है – भारतीय दंड संहिता में कई सारे धाराएं हैं और इन धाराओं के तहत जिस प्रकार का अपराध हो उसी धारा के तहत आरोपी को सजा दी जाती है. जहाँ हर मामले के अनुसार भारतीय दंड संहिता में सजा का प्रावधान है तो वहीं एक अपराध ऐसा है जिसमें धारा 511 लगाई जाती है. वहीं आज इस पोस्ट के जरिए हम आपको धारा 511 के बारे में बताने जा रहे हैं साथ ही इस बात की जानकारी भी देने जा रहे हैं कि इस धारा के तहत क्या सजा का क्या प्रावधान है और इस धारा से इससे बचने का क्या प्रावधान है.

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धारा 511 क्या है

जानकारी के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा तब लगाई जाती है जब अपराध करने का प्रयास किया गया हो यानि कि कोई भी अपराध करने का प्रयास किया हो और ये प्रयास सफल न हो तो इस मामले में धारा 115 लगाई जाती है ये धारा तब भी लगाई जाती है जब इस बात का उल्लेख नहीं हो पाता है कि आरोप क्या किया है सिर्फ आरोप करने का प्रयास किया जाता है इस मामले में धारा 115 लगाई जाती है. वहीं इस धारा के 115 के तहत कारावास या आजीवन कारावास की सजा मिलेगी.

क्या है सजा और जमानत का प्रावधान 

भारतीय दंड संहिता की धारा 511 के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास या अन्य कारावास की सजा दी जाती है. वहीं इसमें ये भी कहा गया है कि जो कोई भी अपराध करने का प्रयास करेगा, वह इस धारा के तहत या तो कारावास या आजीवन कारावास से दंडनीय होगा. वहीं इस धारा के लगने के बाद एक तय समय के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जो कि बढ़ भी सकती है. वहीं हत्या के प्रयास की सजा का प्रावधान है और इस वजह धारा 511  इस मामले में लागू नहीं होगी. धारा 511 लगने के बाद ये मामला समझौते योग्य नहीं है और इस वजह से इस ये मामला गैर जमानती है और इस वजह से इस मामले में जमानत भी कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही मिलेगी.

भारत में अंग्रेजों ने लागू की थी IPC 

भारत में अंग्रेजों ने लागू की थी IPC  आपको बता दें, भारत में IPC अंग्रेजों ने लागू की थी. दरअसल, ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई थी और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. वहीं यह IPC की धारा भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. वहीं जब जम्मू एवं कश्मीर धारा 370 लागू थी तब यहाँ पर भी ये आईपीसी (IPC)  लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई.

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