Amritpal Singh: पंजाब के खिलाड़िंयों, उनके बाहुबल और उनकी साहस का आकलन करना सबके बस की बात नहीं है.. वो चाहे किसी भी क्षेत्र में हो, अपनी प्रतिभा और निडरता से वो अच्छे अच्छो को झुकने के लिए, घुटने टेकने पर मजबूर करने की ताकत रखते है.. पंजाब के एक ऐसे ही प्रतीभाभाव खिलाड़ी है अमृतपाल सिंह.. जिन्होंने कबड्डी छोड़ कर बास्केटबॉल खेलना शुरु किया था.. लेकिन यहां भी अपना लोहा मनवाते हुए वो पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए जिन्होंने किसी विदेशी टीम के लिए खेलने का कॉंट्रेक्ट साइन किया था। अपने इस लेख में हम अमृतपाल सिंह के बारे में जानेंगे। कैसे उनका रूझान कबड्डी प्लेयर बनने से बास्केटबॉल की तरफ चला गया।
जानें कौन है अमृतपाल सिंह?
5 जनवरी साल 1991 में पंजाब के अमृतसर के पास गन्ना पिंड के फत्तुवाल गाँव में एक सिख किसान परिवार में हुआ था। अमृतपाल ने फिल्लौर के महाराजा रणजीत सिंह पुलिस पब्लिक स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की। अपनी स्कूलिंग के दौरान अपने पिता के साथ खेतों में काम किया करते थे, जहां उनकी शारीरिक बनावट और ज्यादा मजबूत हुई, और वो काम और पढ़ाई के अलावा अपने दोस्तो के साथ पंजाब का पारंपरिक खेल कबड्डी खेला करते थे। करीब 17 साल की उम्र कर वो कबड्डी के ही खिलाड़ी बनना चाहते थे, लेकिन उनकी 6 फीट 11 इंच की हाइट ने उनके करियर चॉइस को बदलने में अहम भूमिका निभाई। 17 साल की उम्र में एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब बास्केटबॉल एसोसिएशन के कुछ अधिकारियों ने उन्हें कबड्डी खेलते देखा था।
नेशनल चैम्पियनशिप से पंजाब टीम में डेब्यू किया
उनका खेल औऱ फीजिक देखकर उन्होंने अमृतपाल को बास्केटबॉल खेलने का ऑफर दिया। अमृतपाल ने भी इस मौके को जाने नहीं दिया और बास्केटबॉल प्लेयर की ट्रेनिंग के लिए 2010 में लुधियाना बास्केटबॉल एकेडमी में शामिल हो गए। यहां उन्हें ट्रेनिंग देने वाले कोच थे एस. सुब्रमण्यम। जिन्होंने एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने में उनकी मदद की। धीरे धीरे वो बास्केटबॉल टीम में सेंटर खिलाड़ी बन गए। साल 2010 में नेशनल चैम्पियनशिप में पंजाब टीम और पंजाब पुलिस की तरफ से डेब्यू किया, जहां उनके बेहतरीन खेल के कारण भारतीय सीनियर राष्ट्रीय बास्केटबॉल टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला और पहली ही बार में उन्हें चीन के वुहान शहर में आयोजित हुए FIBA Asia Championship में खेलने का मौका मिला।
अमरजीत पंजाब पुलिस के अलावा उन्होंने बी.लीग के योकोहामा एक्सीलेंस, ओएनजीसी एफसी और भारत के पुणे पेशवाओं की टीम के लिए भी बतौर खिलाड़ी बास्केटबॉल खेला है। अमृतपाल पहले ऐसे बाल्केटबॉल खिलाड़ी बने है जिन्होंने एक नही बल्कि दो दो विदेशी टीमो के साथ मिलकर खेला है। साल 2015 में उन्होंने नेशनल बास्केटबॉल डेवलपमेंट लीग के टोक्यो एक्सीलेंस के साथ बतौर टीम का हिस्सा बन कर खेला है, इस दौरान उन्होंने बेहतरीन परफोर्मेंस देते हुए टीम को चैम्पियनशिप जीतने में मदद की।
कैसे FIBA एशिया चैम्पियनशिप में पहुचे
उसके बाद साल 2017 में अमृतपाल को ऑस्ट्रेलिया की बास्केटबॉल टीम सिडनी किंग्स के साथ शामिल होकर चीन के एटलस चैलेंज में खेलने का मौका मिला। वहीं 2011 में अमृतपाल सिंह की ही बदौलत ही भारतीय नेशनल टीम FIBAएशिया चैम्पियनशिप में पहुंचा था। इसके बाद भारतीय टीम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके कारण भारतीय बास्केटबॉल टीम को कई बड़ी स्पार्धाओं में खेलने का मौका मिला, वो 2017 में बास्केटबॉल टीन के कप्तान चुने गए थे और 2020 तक कप्तान रहे थे। अपने खेल से पंजाब का नाम रोशन करने वाले अमृतपाल सिंह पंजाब पुलिस में सब इंस्पेक्टर भी है.. हालांकि उनके खेल के दौरान उनके साथ कई विवाद भी जुड़े। 2020 में डोप टेस्ट में फेल हो गए थे, जिसके कारण उन्हे निलंबित कर दिया गया था। उनके ब्लड में टर्बुटालिन पाया गया था।
8 सालो तक कोई भी बास्केटबॉल मैच नहीं खेल सकते
हालांकि बाद में सफाई दी गई कि उन्हें सर्दी खांसी बुखार था और उन्होंने डिकाफ नाम का कफ सिरफ पिया था.. जिसमें टर्बुटालिन मौजूद था। लेकिन उन्हें फिर से खेलना का मौका मिला, मगर 2025 नेशनल गेम्स के दौरान देहरादून में उनका डोप टेस्ट किया गया, औऱ इस टेस्ट में 19 नोरएंड्रोस्टेरोन नाम का स्टेरॉयड पाया गया.. जिसके बाद नाडा पैनल ने कड़ा रूख अपनाते हुए उन पर 8 साल का प्रतिबंध लगा दिया..जो 5 मार्च 2025 से लागू है। इस प्रतिबंध के कारण अब वो 8 सालो तक कोई भी आधिकारिक बास्केटबॉल मैच नहीं खेल सकते है। हालांकि वो पंजाब पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे है। 8 साल का प्रतिबंध काफी लंबा समय है, तो क्या प्रतिबंध खत्म होने के बाद अमृतपाल वापिसी करेंगे.. ये सबसे बड़ा सवाल है।














































