सरकारी जमीन से अतिक्रमण न हटाने पर BMC पर भड़का सुप्रीम कोर्ट: कमिश्नर की सैलरी अटकी, 5 लाख का जुर्माना| Supreme Court BMC encroachment

[nedrick_meta]
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google
[modern_share]

Supreme Court BMC encroachment: सरकारी जमीन से अवैध कब्जा न हटाने को लेकर देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा चाबुक चला है। अदालत के बार-बार दिए गए आदेशों को हवा में उड़ाना बीएमसी को इस बार भारी पड़ गया। शीर्ष अदालत ने न सिर्फ नगर निगम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है, बल्कि सख्त रुख अपनाते हुए बीएमसी कमिश्नर की एक महीने की सैलरी रोकने का फरमान भी सुना दिया है।

और पढ़ें: कार्रवाई करनी है तो मुझ पर करो… जवानों के लिए लड़े ACP मनस्वी वशिष्ठ हुए निलंबित| Delhi police protest

क्या है पूरा मामला? Supreme Court BMC encroachment

यह पूरा विवाद मुंबई के बोरीवली इलाके में ‘बेस्ट’ (BEST) बस स्टैंड के लिए तय जमीन से जुड़ा हुआ है। इस सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा जमाया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही निगम को इस भूखंड से अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद बीएमसी प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा और जमीन खाली कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस लापरवाही पर प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया और निगम अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।

कोर्ट की अवमानना का नोटिस, मिलीभगत पर उठे सवाल

तीन जजों की पीठ ने बीएमसी कमिश्नर को सीधे कोर्ट की अवमानना (कंटेम्प्ट) का नोटिस थमा दिया है। पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए याद दिलाया कि 13 नवंबर 2025 और फिर 28 जुलाई 2026 को निगम को अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है। अदालत में सीजेआई ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कदम न उठाना सीधे तौर पर मिलीभगत की तरफ इशारा करता है। ऐसा लगता है कि प्रशासन खुद इन कब्जों को संरक्षण दे रहा है।

‘सीधे जेल भेजेंगे’… महाराष्ट्र सरकार को भी सख्त निर्देश

अदालत ने बीएमसी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए दो-टूक कहा कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो अफसरों को सीधे सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि ये लोग शालीन भाषा नहीं समझते, इसलिए इन्हें अब आदेश की भाषा समझनी होगी। जब वे जेल जाएंगे, तब उन्हें अदालत के आदेशों की अहमियत समझ में आएगी।

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार और नगर निगम को साफ निर्देश दिया कि जब तक अदालत के सभी आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हो जाता, तब तक बीएमसी कमिश्नर का वेतन किसी भी हाल में जारी न किया जाए।

अतिरिक्त समय की अर्जी खारिज

सुनवाई के दौरान जब बीएमसी के वकीलों ने कार्रवाई पूरी करने के लिए अदालत से कुछ और मोहलत मांगी, तो पीठ ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि नगर निगम को पहले ही बहुत समय दिया जा चुका है, अब एक दिन की भी अतिरिक्त छूट नहीं मिलेगी। अफसरों को अब बहाने बनाने के बजाय काम करके दिखाना होगा, वर्ना कार्रवाई भुगतने के लिए तैयार रहें।

और पढ़ें: 5 चुनावी राज्यों में वोटर लिस्ट से 2.29 करोड़ नाम गायब: अकेले यूपी में कटे 2 करोड़ वोट| Voter list special revision

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds