US airstrike Qeshm Island: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होने से ऐन पहले पश्चिम एशिया में तनाव अचानक चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले ईरान के केश्म द्वीप पर जोरदार हवाई हमला किया है। स्थानीय मीडिया और चश्मदीदों के मुताबिक द्वीप पर एक के बाद एक कम से कम पांच भीषण धमाके सुने गए। इस कार्रवाई की पुष्टि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ ईरानी मीडिया ने भी कर दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस हमले का सीधा मकसद ईरान की उन आक्रामक सैन्य क्षमताओं को तबाह करना है, जिनसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शुमार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही थी।
क्यों खास है केश्म द्वीप और अमेरिका की नजर में यह क्यों है बड़ा खतरा? US airstrike Qeshm Island
फारस की खाड़ी में स्थित केश्म द्वीप करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला हुआ है और यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा द्वीप है। कभी यह जगह फ्री ट्रेड जोन और शांत टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर जानी जाती थी, लेकिन बीते कुछ समय में ईरान ने इसे अपने सबसे मजबूत सैन्य गढ़ में तब्दील कर दिया है। यह द्वीप सीधे तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर मौजूद है। दुनिया की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस समुद्री रास्ते से अरब देशों का कच्चा तेल भारत, चीन और दुनिया के बाकी देशों तक पहुंचता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने यहां अपनी रडार प्रणालियां, आधुनिक ड्रोन ठिकाने, तटीय मिसाइल बैटरियां और नौसैनिक साजो-सामान तैनात कर रखे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस द्वीप पर सुरंगों और प्राकृतिक नमक की गुफाओं का एक बहुत बड़ा जाल मौजूद है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ ‘मिसाइल सिटी’ के नाम से जानते हैं। ईरान ने इन खुफिया गुफाओं में अपनी तटीय मिसाइलें और हमलावर नौसैनिक स्पीड बोट्स छिपा रखी हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इसी द्वीप की रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाकर होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही पर दबाव बनाता है और उन्हें रोकने की कोशिश करता है।
पहले भी अमेरिकी निशाने पर रहा है यह द्वीप
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने केश्म द्वीप को निशाना बनाया हो। इससे पहले इसी साल 30 और 31 मई को भी अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर मौजूद ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर सटीक हमले किए थे। उसके ठीक दो दिन बाद यानी 2 जून को अमेरिका ने द्वीप पर बने एक अहम ईरानी मिलिट्री ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को तबाह कर दिया था, जिसका इस्तेमाल इलाके में ईरानी ड्रोन ऑपरेशंस को कंट्रोल और गाइड करने के लिए किया जा रहा था। मिडटर्म वोटिंग से ठीक पहले हुए इस ताजा हमले ने एक बार फिर पूरे खाड़ी क्षेत्र में जंग का सायरन बजा दिया है।













































