Sikhism In Bangalore: कर्नाटक में जब सिख धर्म के पनपने और फलने फूलने की बात होती है तो ये असल में सिख धर्म के शूरुआत से ही कर्नाटक में मौजूद है। पहले गुरुसाहिब गुरु नानक देव जी जब दूसरी उदासी पर निकले थे तब वो दक्षिण की यात्रा पर निकले थे.. इस दौरान वो साल 1512 में कर्नाटक भी आये थे.. यहा का बीदर का गुरूद्वारा गुरु नानक झीरा साहिब गुरुद्वारा तो दुनिया भर में फेमस है.. लेकिन समय के साथ कर्नाटक के अलग अलग हिस्सों में सिखों ने अपनी पड़ाव डाला और आज वो यहां एक अहम कम्युनीटी बन गई है। कर्नाटक के कई ऐसे शहर है जहां सिखों की आबादी तेजी से बढ़ी, जिसमें से एक है कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरु। अपने इस लेख में हम बैंगलुरु में मौजूद सिख धर्म के बारे में जानेंगे.. सिख कम्युनिटी कैसे यहां की इकॉनोमी का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।
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बैंगलुरू के बारे में इतिहास
1 नवंबर 2014 तक बैंगलौर के नाम से प्रसिद्ध भारत का सबसे बड़ा आईटी हब कहलाना वाला बैंगलुरु शहर कर्नाटक राज्य की राजधानी है। भारत की सिलिकॉन वैली के नाम से प्रचलित बैंगलुरु के क्षेत्रफल को तीन अलग अलग हिस्सो में बांटा गया है, जिसमें शहरी क्षेत्रफल 741वर्ग किलोमीटर है, वही शहरी जिला 2196 वर्ग किलोमीटर तक फैला है तो वहीं इसका मेट्रोपॉलिटन एरिया 8005वर्ग किलोमीटर तक फैला है। वहीं जब हम आबादी की बात करते है तो केवल मेट्रोपॉलिटन एरिया की आबादी 1 करोड़ 40 लाख है, वहीं शहरी एरिया की आबादी 1 करोड़ 27 लाख के आसपास है.. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक बैंगलौर भारत का तीसरा सबसे आबादी वाला शहर था। ये एक ऐसा शहर है जहां मौसम हमेशा सुहावना रहता है. न ज्यादा गर्मी पड़ती है और न ज्यादा सर्दी। शिक्षा हो या नौकरी.. बैंगलोर लगभग सबकी पहली पसंद है। हालांकि दिल्ली के मुकाबले बैंगलुरु थोड़ा एक्सपेंसिव शहर माना जाता है।
बैंगलुरू में सिख धर्म
पूरे कर्नाटक में करीब 2 लाख रहते है, वहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सभी पंजाब मूल से नहीं बल्कि कर्नाटक मूल के ही सिख है। खासकर सिकलीगर और दक्कनी सिख। जो कि कर्नाटक के ही रहने वाले है.. और दसवे गुरु से प्रभावित होकर सिख बन गए। हालांकि बैंगलूरू में सिखों की आबादी भारत की आजादी के बाद बढ़ने लगी। 1984 में दिल्ली में जो सिख दंगे हुए थे उस समय बैंगलुरु में लगभग 10 सिख परिवार रहा करता था। लेकिन दंगो के बाद सिखो ने दिल्ली और उसके आसपास के इलाको का काफी संख्या में पलायन किया था, और फिर बैंगलौर में सिख आबादी बढ़ने लगी.. खासकर 1990 में इसके आईटी हब बनने की शुरुआत के बाद तो सिखों ने बैंगलौर की तरफ रूख करना शुरु कर दिया। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक तब बैंगलौर में 12142 सिख रहा करते थे, जो कि अब बढ़कर लगभग 30 हजार के आसपास हो गई है।
बैंगलौर में करीब 22 गुरुद्वारे मौजूद
वहीं बैंगलोर में आजादी के पहले से ही उल्सूल लेक के सिखों ने रोजगार और व्यापार की बढ़ती मांग को देखते हुए आकर बसना शुरु कर दिया था।, जहां सिख संगतो ने 1943 में अपने पूजा अर्चना औऱ धार्मिक अस्थाओं का मानने के लिए गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की शुरुआत की थी। जो कि 1945 में सिख सगंतो के लिए पहली बार खोला गया था। ये बैंगलुरु शहर का सबसे भव्य, पुराना और बड़ा गुरुद्वारा कहलाता है। समाज सेवा हो, या संकट के समय आगे बढ़कर सबसे पहले खड़े रहने की बात.. सभी में सिखों का योगदान काफी अहम है। आई टी लेकर सर्विस के क्षेत्र तक, बैंगलौर में Sikh सभी क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे है। बैंगलौर में करीब 22 गुरुद्वारे मौजूद है, जो यहां रहने वाले सिखों के योगदान और उनकी योग्यताओं को दर्शाता है। बैंगलूरु में सिख धर्म के बसने की कहानी आपको कैसी लगी हमे लेख करके जरूर बतायें, साथ ही अगर आप बैंगलौर गए है तो आपको वहां क्या सबसे खास नजर आया।














































