Char Dham helicopter crisis: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हवाई सफर को लेकर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। चमोली जिले में हाल ही में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। नियामक ने 2 नवंबर से चार धाम की सभी चार्टर उड़ानों के लिए दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य कर दी है। हालांकि, इस नए फैसले से हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स नाराज हो गए हैं और उन्होंने 2 नवंबर से ही अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दे डाली है।
DGCA के नए कड़े नियम: दो पायलट और पूर्व-मंजूरी जरूरी| Char Dham helicopter crisis
चमोली हादसे के ठीक अगले दिन शनिवार को DGCA ने सभी हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनियों के साथ एक आपात बैठक की। इसके बाद जारी दिशा-निर्देशों में साफ किया गया कि अब हर चार्टर उड़ान में दो पायलट मौजूद रहेंगे। इसमें खास बात यह जोड़ी गई है कि को-पायलट के पास भी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का विशेष अनुभव यानी ‘हिल क्वालिफिकेशन’ होना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही, अब कोई भी हेलीकॉप्टर मनमाने तरीके से उड़ान नहीं भर सकेगा। हर उड़ान से पहले क्रू को देहरादून के सहस्रधारा स्थित कंट्रोल रूम से अपने रूट और लैंडिंग स्थल की स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी। लैंडिंग के तुरंत बाद पायलटों को कंट्रोल रूम में अपनी ‘पायलट रिपोर्ट’ (PIREP) जमा करनी होगी, जिसमें रास्ते के मौसम और परिस्थितियों का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के हेड ऑफ ऑपरेशंस को इन नियमों का कड़ाई से पालन कराने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का जिम्मा सौंपा गया है।
ऑपरेटरों की दलील: खर्च बढ़ेगा, सेवाएं जारी रखना नामुमकिन
DGCA के इस फरमान के विरोध में हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स लामबंद हो गए हैं। 31 अक्टूबर को नियामक को लिखे साझा पत्र में उन्होंने कहा कि इस नियम को मौजूदा स्वरूप में लागू करना उनके लिए मुमकिन नहीं है। ऑपरेटरों का तर्क है कि हर उड़ान में दो ट्रेंड पायलट रखने से क्रू की भारी कमी हो जाएगी। साथ ही पायलटों के वेतन, रहने और लॉजिस्टिक्स के चलते परिचालन लागत काफी बढ़ जाएगी।
कंपनियों का कहना है कि तय चार्टर दरों और सीमित मार्जिन के चलते यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना व्यावहारिक नहीं है, और न ही इसे अचानक यात्रियों की जेब पर डाला जा सकता है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर नियम की समीक्षा नहीं हुई, तो वे 2 नवंबर से अपनी उड़ानें बंद कर देंगे।
बातचीत से समाधान की तलाश
ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा और UCADA सचिव विनय शंकर पांडे को भी पत्र भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सुरक्षा मानकों और DGCA के अधिकारों का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन बिना जमीनी और आर्थिक आकलन किए यह फैसला थोपना गलत है। ऑपरेटर्स ने तुरंत एक संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की है ताकि सुरक्षा और सेवा दोनों के बीच संतुलन बन सके। फिलहाल अगर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध नहीं सुलझा, तो चार धाम जाने वाले हजारों तीर्थयात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।













































