ब्रिटिश राज से लेकर देश के बंटवारे तक जानिए कैसे पुणे में फले-फूले सिख समुदाय की ये अमिट निशानियां। Gurdwaras in Pune

Shikha Mishra | Nedrick News Pune Published: 22 अक्टूबर 2026, 06:46 PM Updated: 22 अक्टूबर 2026, 06:47 PM
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Gurdwaras in Pune: जब भी आप महाराष्ट्र  का नाम सुनते है तो सबसे पहले आपे जेहन में छत्रपति शिवाजी महाराज की ही छवि आती है.. लेकिन महाराष्ट्र से ज्यादा वीर शिवाजी की वीरता की कहानी कहते हुए खड़ा है पूणे.. जहां उने बचपन का घर हुआ करता था। आज महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी, ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट और डेक्कन की रानी से नामों से प्रचलित पूणे केवल मराठा सम्राज्य के इतिहास से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि उन सिख लड़ाको से भी जुड़ा है, जो पहली बार ब्रिटिश रेजीमेंट का हिस्सा बन कर पूणे आये थे। वहीं बंटवारे के बाद सिख और सिंधी लोगो ने पूणे को अपना गढ़ बनाया। महाराष्ट्र के मूल सिख पुणेरी सिख कहलाते है। जिन्होंने मराठी और पंजाबी अपनी दोनो धार्मिक मान्याताओं को एक साथ जारी रखा और धीरे धीरे वहां गुरुद्वारो का निर्माण कराया, अपने इस लेख में हम पूणे के 5 ऐतिहासिक गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे, जो यहां सिखो के फलने फूलने की कहानी कह रहे है।

हॉलीवुड गुरुद्वारा -Hollywood Gurudwara

आजादी के बाद पूणे के सबसे पुराने और भव्य गुरुद्वारों में से एक हॉलीवुड गुरुद्वारे का आधिकारिक नाम गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार है। ये पैटिंशन रोड कैंप में स्थित है। ब्रिटिश काल के दौरान गुरुद्वारे वाले स्थान पर अंग्रेजो के लिए पार्क और मिलिट्री क्लब हुआ करता था, जिसे तब हॉलीवुड क्लब कहा जाता था। आजादी तक यहां ब्रिटिश हुकुमत की राजशी ठाठ दिखाई देती थी, लेकिन आजादी के बाद यहां आये सिखों ने 1949 में पूणे सिख असोसिएशन ट्रस्ट की मदद से क्लब को बंद कर दिया और गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर यहां गुरुद्वारा स्थापित कर दिया। मौजूदा समय में यहां एक बहुत भव्य गुरुद्वारा है, लेकिन हॉलीवुड क्लब में गुरुद्वारा होने के कारण इस गुरुद्वारे को हॉलीवुड गुरुद्वारा ही कहा जाने लगा। ये गुरुद्वारा मुगल शैली और राजपूती शैली का मिश्रित उदाहरण है। यहां एक संग्रहालय है, जहां सिखों के इतिहास के बारे में जानकारी और उनसे जुड़ी पेंटिंग मौजूद है साथ ही भारतीय सिख सैनिको  सम्मान में भी खूबसूरत पेटिंग्स प्रदर्शित करती है। यहां रोजाना लंगर का आयोजन होता है। वहीं परिसर में गुरु नानक मेडिकल फाउंडेशन द्वारा एक चैरिटेबल अस्पताल और एक पब्लिक स्कूल चलाया जाता है। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 4 बजे खुलता है और रात 9 बजे कर खुला रहता है। वही आने वाले श्रद्धालुओ के लिए निशुल्क कमरे भी बनाये गए है।

 दशमेश दरबार येरवडा  – Dashmesh Darbar Yerwada

सिखो के दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित येरवड़ा का प्रसिद्ध दशमेश दरबार गुरुद्वारा, डेक्कन कॉले रोड पर स्थित है। इस गुरुद्वारे की स्थापना साल 1957 में ब्रिटिश सेना के तीन पूर्व सिख सैनिक सूबेदार पृथ्वी सिंह ढिल्लों, इंद्रजीत सिंह गोथरा और पूरण सिंह ने की थी। तब से एक छोटे से टिन के अंदर बनाया गया था। रोजाना सुबह 5 बजे खुलने वाला ये गुरुद्वारा रात को 9 बजे तक खुला रहता है। समय के साथ ये सिख संगतो की श्रद्धा का केंद्र बन गया औऱ इसका विस्तार शुरु किया गया। हालांकि पारंपरिक गुरुद्वारो से अलग कंक्रीट की साधारण तरीके से बनाई गई बिल्डिंग है.. जिसपर आज भी नालीदार टिन की शेड डाली हुई है.. एक बड़ा मुख्य हॉल है जहां एक साथ 100 श्रद्धालु बैठकर प्रार्थना कर सकते है। इसी गुरुद्वारे के पास एक अनाथालय है, जिसका संचालन गुरुद्वारा ही करती है।

गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा – Gurudwara Guru Singh Sabha

पूणे के गणेश पेठा में मौजूद है गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, असल में पूणे का सबसे पुराना गुरूद्वारा है। ये गुरुद्वारा पूणे के प्रसिद्ध शनिवार वाड़ा, लाल महल और त्रिशुंड गणेश मंदिर के पास ही स्थित है, इसक निर्माण 1940 में सिख सैनिको द्वारा करवाया गया था, जो ड्यूटी के लिए आये थे। इसकी दीवार पर गुरमुखी भाषा की नक्काशी है, जो सिख धर्म की परंपरा को और महान बनाती है। मुगल वास्कुकला और सिख परंपरा को अनूठा संगम भी यहां देखने को मिलता है। ये एक 3 मंजिला इमारत है, जिसके उपरी हिस्से में बड़ा दरबार साहिब है, और प्रार्थना भवन है। निचली मंजिल पर लंगर हॉल है, जहां 365 दिन लंगर चलता रहता है। वहीं ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 6 बजे खुलता है और रात 9 बजे बंद होता है। इस गुरुद्वारे में सामाजिक कार्य भी किये जाते है..जिसमें मेडीकल कैंप लगाना, मददगारों की मदद करना जैसे काम शामिल है।

रामगढ़िया गुरुद्वारा – Ramgarhia Gurdwara

पूणे के शिवाजीनगर में मौजूद एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा, रामगढ़िया गुरुद्वारा, पंजाब के रामगढ़िया समुदाय को समर्पित है। इस गुरुद्वारे की देखरेख रामगढ़िया बोर्ड पूणे करती है। ये एक ऐसा गुरुद्वारा है जहां हर साल गुरु पर्व और विश्वकर्मा पूजा दोनो ही बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, क्योंकि विश्वकर्मा रामगढ़िया के लिए बेहद अहम भगवान है। ये गुरुद्वारा 1950 से 1955 के बीच बनाया गया था, जो पाकिस्तान के पंजाब से आये रामगढ़िया समुदाय के लोगो के य़हां बसने के बाद बनाया गया था।

गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर जी सिख टेंपल – Gurdwara Guru Tegh Bahadur Ji 

पूणे के व़डगांव शेरी में स्टेला मैरिस स्कूल के ठीक बगल में स्थित एक छोटा सा गुरुद्वारा, गुरुद्वारा गुरू तेग बहादुर जी, नौवें गुरु को समर्पित है। यहां हर रविवार को लंगर का आयोजन होता है साथ ही विशेष कार्यक्रम भी किये जाते है। सुबह 6 बजे खुलने वाला ये गुरुद्वारा रात को 9 बजे बंद हो जाता है। इसके आसपास संकरी गलिया है, इसलिए यहां पैदल जाना बेहतर है। रोजाना होने वाले प्रार्थना और भजन कीर्तन के कारण ये स्थान काफी शांत है.. जबकि एक आबादी वाला स्थान है। ये है पूणे के 5 प्रसिद्ध गुरुद्वारे, जो सिखो की शान बढ़ा रहे है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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