Italy Protests Updates: यूरोप के कई हिस्सों में भड़की असंतोष की आग अब इटली की सड़कों तक पहुंच चुकी है। बढ़ती महंगाई और लचर सार्वजनिक सेवाओं को लेकर शुरू हुए शांतिपूर्ण धरने अचानक हिंसक झड़पों, आगजनी और लूटपाट में बदल गए। इन बिगड़ते हालातों ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली सरकार को हिलाकर रख दिया है। उपद्रवियों पर लगाम कसने और सार्वजनिक सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए मेलोनी कैबिनेट ने बेहद सख्त सुरक्षा उपायों पर आधारित एक ‘आपातकालीन अध्यादेश’ (Emergency Decree) को मंजूरी दे दी है। इन नए प्रावधानों का सबसे बड़ा असर कम उम्र के उपद्रवियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला है।
नाबालिगों पर नकेल, माता-पिता भी दायरे में| Italy Protests Updates
इटली के उप-प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी के अनुसार, नए कानूनों के तहत पुलिस को असाधारण अधिकार दिए गए हैं। अब 14 से 17 साल की उम्र के किशोरों को केवल संदेह और उनके खतरनाक होने के सबूत मिलने पर भी पुलिस स्टेशन में 12 घंटे तक हिरासत में रखा जा सकेगा भले ही उन्होंने सीधे तौर पर कोई अपराध न किया हो। इसके अलावा, अगर किसी नाबालिग ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, दुकानों में तोड़फोड़ की या आगजनी की, तो उस नुकसान की सीधी भरपाई उनके माता-पिता से कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे परिवारों में बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने की जवाबदेही बढ़ेगी।
5 साल की जेल और 21 लाख का जुर्माना
गृह मंत्रालय के अवर सचिव निकोला मोल्टेनी ने बताया कि संसद में लंबित बिल की जगह इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए आपात आदेश लाया गया है। इसके प्रमुख बिंदु बेहद कड़े हैं:
- कम से कम 5 लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के लिए खतरा बनने पर 5 साल तक की जेल हो सकती है।
- आरोपियों पर अधिकतम 20,000 यूरो (लगभग 21 लाख रुपये) का भारी जुर्माना ठोका जा सकता है।
- यदि प्रदर्शनकारी ने अपना चेहरा नकाब या मास्क से ढका हो या किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाई हो, तो सजा और ज्यादा सख्त होगी।
- संदिग्ध युवाओं को खास संवेदनशील इलाकों या कार्यक्रमों में जाने से सीधे बैन किया जा सकेगा।
टिकटॉक पर लूट की साजिश, मिलान में 500 सैनिक तैनात
साल्विनी ने खुलासा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर कोमो शहर की दुकानों को लूटने की खुली साजिश रची जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार हाथ पर हाथ धरकर शनिवार दोपहर तक इंतजार नहीं कर सकती थी। पिछले हफ्ते मिलान में नकाबपोश युवाओं ने कूड़ेदान जलाकर दुकानों को लूटा था, जिसके बाद अब शनिवार के प्रदर्शनों को देखते हुए अकेले मिलान शहर में 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जा रही है।
यह पूरा मंजर पड़ोसी देश फ्रांस में भड़की हिंसा की याद दिलाता है, जहां हाल ही में लग्जरी स्टोर्स लूटे गए थे।
आर्थिक खाई और जेलों का बढ़ता बोझ
2022 में सत्ता में आने के बाद से मेलोनी ने कई सख्त कानून बनाए हैं। पिछले चार सालों में इटली की जेलों में कैदियों की तादाद 17% (करीब 10,000 कैदी) बढ़ चुकी है। वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि नए नियमों से विरोध प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार भी जोखिम भरा हो गया है, खासकर प्रवासियों के लिए।
इस जनाक्रोश की असली जड़ आर्थिक असमानता है। बैंक ऑफ इटली के अनुसार, देश के शीर्ष 10% सबसे अमीर परिवारों के पास 60% घरेलू संपत्ति केंद्रित है, जबकि आम कामगारों की वास्तविक कमाई महंगाई के चलते स्थिर पड़ी है। ऊर्जा संकट के बीच 2027 के चुनावों से पहले मेलोनी के बजट और टैक्स सुधारों पर भी इन हिंसक प्रदर्शनों ने गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।










































