Karwa Chauth 2026: साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर (गुरुवार) को रखा जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन बेहद खास होता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि करवा चौथ की मुख्य पूजा दिन में होगी या शाम को? इस साल पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक रहेगा।
अगर आप पहली बार यह कठिन निर्जला व्रत रखने जा रही हैं, तो सरगी से लेकर चंद्रोदय तक के नियमों को जानना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, इस त्योहार को और खास बनाने के लिए पतियों के लिए भी कुछ बेहद जरूरी बातें हैं, जो उनके रिश्ते में मिठास घोल देंगी। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।
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ऐसे करें Karwa Chauth की शुरुआत
• सरगी का सेवन: व्रत के दिन सूर्योदय से पहले सुबह सास द्वारा दी गई सरगी खाएं। इसमें फल, मेवे और मिठाई लें ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे।
• व्रत का संकल्प: सरगी खाने के बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और सूर्योदय के बाद से व्रत शुरू हो जाता है।
उपवास के दौरान सावधानियां
• निर्जला उपवास: यह पूरी तरह निर्जला (बिना अन्न और जल) व्रत होता है। सूर्योदय से लेकर रात में चांद दिखने तक पानी की एक बूंद भी नहीं पी जाती।
• वस्त्रों का रंग: पूजा में लाल, गुलाबी, पीला या नारंगी रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन काले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें।
• श्रृंगार: सुहागिन महिलाओं को शाम की पूजा से पहले 16 श्रृंगार (मेंहदी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि) जरूर करना चाहिए।
• व्यवहार: व्रत के दिन गुस्सा करने, किसी की निंदा करने या अपशब्द बोलने से बचें। घर में शांति का माहौल रखें।
पूजा और कथा के नियम
• शुभ मुहूर्त में पूजा: शाम के समय (प्रदोष काल में) भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश जी की पूजा करें।
• करवा बदलना: पूजा के दौरान महिलाएं आपस में सात बार करवा बदलती हैं (करवा फेरना)।
• कथा सुनना: करवा चौथ की व्रत कथा सुनना अनिवार्य है। कथा सुनते समय हाथ में गेहूं के दाने या चावल रखना शुभ होता है।
व्रत खोलने के नियम
• चंद्र दर्शन: रात में चांद निकलने पर छलनी से पहले चंद्रमा को देखें और अर्घ्य (जल) दें।
• पति का चेहरा देखना: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद छलनी से अपने पति का चेहरा देखें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।
• व्रत खोलना: पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई खाकर ही व्रत खोला जाता है। इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।
बीमारी और गर्भावस्था में नियम
शास्त्रों में संकटकाल या शारीरिक अस्वस्थता के समय नियमों में बदलाव की अनुमति दी गई है। कहा जाता है कि करवा चौथ के दौरान आप अन्न या जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं कर सकते।
लेकिन यदि आप बीमार हैं, दवाइयां चल रही हैं या आप गर्भवती (Pregnant) हैं, तो आप फल, जूस, जल और दूध आदि लेकर भी अपना व्रत रख सकती हैं। इस व्रत के नियम कठिन जरूर हैं, लेकिन भगवान हमारे सच्चे भाव और भक्ति के भूखे हैं, किसी कठोर विधि के नहीं। इसलिए सेहत से समझौता किए बिना पूरे विश्वास के साथ पूजा करें।











































