Avtar Singh judo player: पंजाब का नाम हमेशा से ही खेल में काफी उंचा रहा है, पंजाब के खिलाड़ियों ने समय समय पर ये साबित किया है कि आखिर क्यों पंजाब की ताकत को कोई टक्कर नहीं दे सकता है.. दौड़ हो या कबड्डी, निशानेबाजी हो या जूडो.. सभी जगहों पर पंजाब के खिलाड़ियो ने अपनी जीत का परचम लहराया है.. इन्हीं में से एक है जूडो ओलंपियन अवतार सिंह। एक किसान परिवार से आने वाले, और किसान माता पिता की संतान अवतार सिंह ने अपने जूडो से अच्छे अच्छो को भौचक्का किया है। अपने इस वीडियो में हम अवतार सिंह के बारे में बात करेंगे.. कैसे शुरु हुई उनकी जूडो ओलंपियन बनने की जर्नी शुरु… और उनकी अब तक उपलब्धियों के बारे में।
जानें कौन है अवतार सिंह? – Who is Avtar Singh?
3 अप्रैल 1992 को पंजाब के गुरदासपुर के कोठे घुराला’ गाँव में जन्मे अवतार सिंह के पिता का नाम शिंगारा सिंह और मां का नाम सुखबिंदर कौर है। अवतार सिंह के पिता उनके पिता शिंगारा सिंह स्वास्थ्य विभाग में क्लास-4 श्रेणी के कर्मचारी थे, लेकिन उसी के साथ वो खेती किया करते थे, जिसमें उनकी मां भी उनका पूरा हाथ बंटाती थी। बचपन से ही एक किसान का अनुशासन उन्होंने सीखा था.. अवतार सिंह ने अपनी शुरुआती स्कूलिंग गुरदासपुर के ही सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी थी। इस स्कूल में मौजूद जिम में उन्होंने पहली बार 13 साल की उम्र में जूडो के बारे में जाना था। जहां उन्हें जूडो सीखने की इच्छा हुई.. और उन्होंने प्रशिक्षण शुरु किया था। लेकिन जब वो 16 साल के हुए तो एक विवादित हार के कारण उन्होंने जूडो से दूरी बना ली थी, लेकिन उनके पिता शिंगारा सिंह ने हार नहीं मानी औऱ बेटे के सपने को अपना सपना बना लिया।
राष्ट्रमंडल खेलो में जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप
उन्होंने अवतार सिंह को फिर से खेलने के लिए प्रेरित किया औऱ पिछली हार को भुला कर अवतार सिंह ने प्रशिक्षण शुरु किया, औऱ पिता की उम्मीदो पर खरा उतरते हुए साल 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलो में जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण जीत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दिया था। इसके दो महीने बाद ही राष्ट्रमंडल जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड जीत कर 2011 में मंगोलिया में होने वाले राष्ट्रीय विश्व कप में सीधा प्रवेश कर लिया था। अवतार ने भले ही भारत का नाम रोशन किया हो, लेकिन अभी उनके रास्ते मुश्किल होने वाले थे। 2015 में उन्हें रियो जाने के लिए सेलेक्ट कया गया था, लेकिन विडंबना ये थी सेलेक्टर्स ने उन्हें अपने पैसे खर्च कर जाने के लिए कहा था। लेकिन अवतार के पास इतने पैसे नही थे कि वो रियो जा सकें, वो निराश होकर वापिस गांव लौट आये.. जिसके बाद उनके माता पिता ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी बेटे दे दी.. और देश के लिए मैडल लाने की बात की।
2024 में गोल्ड जीतने में कामयाब
उन्होंने काफी प्रेक्टिस कर अपना पोटेंशियल साबित किया था जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय जूडो महासंघ (आईजेएफ) ने अवतार को रियो भेजने का फैसला किया। अवतार सिंह ने 90 किलोग्राम वर्ग में रियो ओलंपिक में भाग लिया अपने माता पिता की उम्मीदो पर खरा उतरते हुए बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड अपने नाम किया। जिसके बाद उन्होंने दक्षिण एशियाई खेलों में भी अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा और यहां भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अवतार ने कई बार राष्ट्रमंडल खेल में हिस्सा लिया, जिसमें 2014 में ग्लासगो में पुरुषों के 90 किलोग्राम वर्ग में वो राउंड ऑफ 16 में बाहर हो गए थे , तो वहीं ग्लासगो 2026 में भी 100 किलोग्राम हाफ हेवीवेट वर्ग में हिस्सा लिया लेकिन यहां भी वो राउंड ऑफ 16 में बाहर हो गए, लेकिन वहीं राष्ट्रमंडल जुडो चैम्पियनशिप में वो 2018 में और 2024 में गोल्ड जीतने में कामयाब हुए थे। 2010 से लेकर 2015 तक अवतार सिंह की परफोर्मेंस के कारण उन्हें खेल कोटा से पंजाब पुलिस में सहायक सब इन इंस्पेक्टर (एएसआई) के रूप में नियुक्त किया गया। अवतार की मेहनत ऐसी है कि उन्होंने ओलंपिक क्वालिफाई करने के लिए शीर्ष 200 खिलाड़ी के रैंक से अपनी कड़ी मेहनत के दम पर 79वा स्थान हासिल किया था. जो उनकी एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। वो एक ऑन ड्य़ूटी एथलीट है, जिन्हें पंजाब पुलिस स्पोर्ट्स विंग (पीएपी पंजाब सशस्त्र पुलिस जालंधर में पहली नियुक्ति दी गई। अवतार अब भी सक्रिय रूप से अपने खेल में एक्टिव है। हालांकि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स ग्लासगोमें अवतार सिंह राउंड ऑफ 16 में हार गए, और आउस हो गए.. लेकिन फिर भी वो लगातार भारत को जूडो में प्रेजेंट कर रहे है। उनकी उपलब्धि उनके पूरे परिवार को गर्वित महसूस कराती है।












































