Sikhism in South Korea: साल 1945 की बात है। दूसरा विश्वयुद्ध अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका था, एक तरफ जर्मनी की हार हो चुकी थी तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर पहली बार परमाणु बम गिरा दिया, जिसके बाद जापान को मजबूरी में आत्मसमर्पण करना पड़ा। लेकिन ये हार केवल सैकड़ों लोगों की मौत पर आकर खत्म नहीं हुई बल्कि जापान के हाथों से एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसे कोरिया कहा जाता था वो भी निकल गया। जापान ने 1910 में कोरिया पर कब्जा कर लिया था। कोरिया तब एक ही था लेकिन जापान की हार के बाद कोरिया में दो बड़े देशों की एंट्री हुई, पहला सोवियत संघ (रूस) और दूसरा संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका)। वहां की स्थिति को सुधारने के लिए कोरिया के उत्तरी हिस्से को कम्युनिस्ट विचारधारा वाले सोवियत संघ ने कब्जा कर लिया तो वहीं दक्षिणी हिस्से पर अमेरिका ने अधिकार कर लिया। अमेरिका पूंजीवादी और लोकतांत्रिक विचारधारा को मानती थी। दोनों की अलग विचारधारा के कारण आखिरकार अगस्त 1948 में गठन हुआ साउथ कोरिया का, जिसे आधिकारिक तौर पर कोरिया गणराज्य (आरओके) कहा गया। अमेरिका की छत्रछाया के कारण साउथ कोरिया कम्युनिस्ट विचारधारा से बाहर निकल कर विकास के रास्ते पर चली, वहां लोकतंत्र स्थापित हुआ और धीरे धीरे व्यापार, रोजगार के अवसर बढ़े। जिसे देखते हुए पहली बार भारत के सिखो ने भी दक्षिण कोरिया का रुख किया, जहां आज उनके योगदान ने उन्हें वहां एक अलग पहचान दिलाई है। अपने इस लेख में हम साउथ कोरिया में फलते फूलते सिख धर्म के बारे में जानेंगे, जो वहां की इकॉनमी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे है।
दक्षिण कोरिया का इतिहास
कोरिया में जब 1945 में अमेरिका और सोवियत संघ ने एंट्री की तो दोनो ही देश अपने हिसाब से कानून बनाना चाहते थे, लेकिन जब बात नहीं बनी दो कोरिया दो हिस्सों में बांटा गया.. और 38वीं पैरेलल लाइन खींची गई। 15 अगस्त 1948 को दक्षिण कोरिया आधिकारिक रूप से एक देश, एक गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया था। ये पूर्वी एशिया का एक देश है। इसका वर्तमान संविधान 29 अक्टूबर 1987 को लागू हुआ था। दक्षिण कोरिया का क्षेत्रफल 100,472 वर्ग किलोमीटर है, वहीं 2026 में इसकी आबादी लगभग 5 करोड़ 11 लाख 6 हजार 229 के आसपास है। इसकी राजधानी सियोल है.. जहां दक्षिण कोरिया की आधी आबादी रहती है, सियोल दुनिया का नौवां सबसे अधिक आबादी वाला महानगर क्षेत्र है। दक्षिण कोरिया में बढ़ते व्यापार और यहां के बाकि इंडस्ट्री में मिलने वाले बढ़ावे के कारण यहां की जीडीपी में कुछ दशकों में भारी उछाल आया है, औऱ इस देश की जीडीपी 14वे नंबर पर है। यहां सबसे ज्यादा शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है। इस कारण दुनिया के सबसे शिक्षित देशों में से एक है, ये दक्षिण कोरिया दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा निर्यातक और सातवाँ सबसे बड़ा आयातक था। पर्यटन की दृष्टि मे दक्षिण कोरिया तेजी से विकसित होने वाला देश है.. यहां कई कारकों से प्रेरित है, जिसमें कोरियाई पॉप संस्कृति को वैश्विक तौर पर मिली पहचान सबसे आगे है।
दक्षिण कोरिया में सिख धर्म
जब दक्षिण कोरिया में गणराज्य बना तो वहां पर विदेशी बाजार के लिए भी दरवाजे खोल दिये गये। शुरुआत में 50 के दशक के बाद सिख कोरिया में कपड़ा व्यापारी और व्यावसाई के रूप में आये थे। लेकिन उस वक्त वहां के निवास कानून इतने सख्त थे कि सिखो को थोड़े ही समय में वापिस लौटना पड़ा। लेकिन 80 के दशक में फिर से साउथ कोरिया के कानून में बदलाव हुए, तब सिखों ने फिर से कोरिया का रूख किया, पहले वो वहां बतौक मजदूर काम करने लगे थे। लेकिन जैसे जैसे कोरिया ने तरक्की की वैसे वैसे वहां सिखों की आबादी भी बढ़ी। मौजूदा समय में भी वहां लगभग 550 सिख रहते है। सिख वहां के इंडस्ट्री सेक्टर की बैक बौन बनने लगे.. जिससे उन्हें कोरिया में पहचान मिलनी शुरु हो गई.. सिखो को कोरिया में बसाने के लिए 1998 में पहली बार सुंगरी में एक किराये पर गुरुद्वारा स्थापित करने की भी परमिशन दी गई। लेकिन दुख की बात है कि करीब डेढ़ साल बाद इस गुरुद्वारे में आग लग गई।
हालांकि सिखो ने फिर से हिम्मत जुटाई और 2004 में फिर से गुरु द्वारा सिंह साहिब की स्थापना की। जो कि ग्योंगगी डो प्रांत में स्थित है। यहां रहने वाले सिख पगड़ी पहनते है, दाढ़ी रख सकते है.. कोरिया में सिखो की देखभाव औऱ उने अधिकारों से जुड़े मुद्दो की रक्षा के लिए पंजाबी एसोसिएशन ऑफ कोरिया (पीएओके) का गठन हुआ है। वहीं सियोल में रहने वाले सिख समुदाय काफी लंबे समय से इस कोशिश में लगे है कि सियोल में भी एक सिख गुरुद्वारा स्थापित हो सकें। जिसके लिए एसोसिएसन काम कर रहा है। यहां रहने वाले ज्यादातर सिख खेती करने के साथ साथ व्यापार, कॉरपोरेट और रेस्ट्रोंट सेक्टर में काम करते है। सिखो को मिलने वाले सम्मान का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि मई 2024 में ब्रिटिश सिख अभिनेता के साथ वर्ल्ड फेमस कोरिया बैंड ग्रूप बीडीएस के लीडर किम नामजून की एक म्यूजिक वीडियो लॉस्ट में नजर आये थे। धीरे धीरे ही सही कोरिया में सिखो को एक मजबूत पहचान मिल रही है, यहां तक कि अभी हाल ही में सुथ कोरिया की सरकार ने सिखों को कोरिया की नागरिकता देने का फैसला किया है। जो सिखो को दक्षिण कोरिया की तरफ और ज्यादा आकर्षित करने वाला है।












































