Arvind Kejriwal news: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी का दामन छोड़कर जाने वाले राज्यसभा सांसदों पर तीखा हमला बोला है। पणजी में गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन के ऐलान के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने पार्टी के भीतर हुई टूट पर खुलकर बात की। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि जिन लोगों को पार्टी ने उच्च सदन यानी राज्यसभा भेजा था, उन्होंने पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। केजरीवाल ने साफ किया कि अब पार्टी ने इस पूरे प्रकरण से बड़ा सबक लिया है और भविष्य में किसी भी नेता को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी निष्ठा, नीयत और विश्वसनीयता को सौ बार ठोंक-बजाकर परखा जाएगा।
‘जनता ने नहीं, पार्टी ने बनाया था सांसद; उन्होंने दिया धोखा’| Arvind Kejriwal news
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरविंद केजरीवाल के निशाने पर मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत वे तमाम सांसद रहे जो पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह आम आदमी पार्टी के लिए बेहद दुखद और अफसोस की बात है। उन्होंने कहा, “राज्यसभा के जो सांसद हमें छोड़कर गए, उन्होंने जनता को नहीं बल्कि पार्टी को धोखा दिया है। उन्हें जनता ने सीधे चुनकर नहीं भेजा था, बल्कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताकर राज्यसभा भेजा था। उन्होंने पार्टी के विश्वास के साथ छल किया है।” हालांकि, केजरीवाल ने यह भी जोड़ा कि पार्टी के लिए यह एक बड़ी सीख है ताकि आगे ऐसी गलती दोहराई न जाए।
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— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 13, 2026
‘हमारे चुने हुए विधायक चट्टान की तरह वफादार रहे’
राज्यसभा सांसदों के दलबदल के उलट केजरीवाल ने जनता द्वारा सीधे चुने गए पार्टी विधायकों की जमकर तारीफ की। उन्होंने दावा किया कि विरोधी दलों की तमाम कोशिशों और दबाव के बावजूद ‘आप’ के निर्वाचित प्रतिनिधि हमेशा पार्टी और जनता के प्रति पूरी तरह वफादार रहे हैं। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने दिल्ली से लेकर गुजरात तक के कई राजनीतिक घटनाक्रम गिनाए:
- दिल्ली (2013): जब पार्टी ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और उसे 28 सीटें मिलीं। उस समय सरकार बनाने के लिए विरोधी दल को महज चार विधायकों की दरकार थी और आप विधायकों को तोड़ने की हर मुमकिन कोशिश हुई, लेकिन एक भी विधायक नहीं डिगा। बाद में दोबारा चुनाव हुए तो पार्टी ने ऐतिहासिक 67 सीटें जीतीं।
- गोवा (2022): राज्य में 2022 के चुनाव में पार्टी के दो विधायक जीतकर आए। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों से दोनों विधायकों को पाला बदलने के लिए लगातार लालच और दबाव दिया गया, लेकिन वे अपनी जगह अडिग रहे।
- जम्मू-कश्मीर: घाटी में पार्टी का एक विधायक है और वहां भी उन्हें तोड़ने की कोशिशों के बावजूद वह मजबूती से पार्टी के साथ खड़े हैं।
- गुजरात: गुजरात में पार्टी के पांच विधायक जीते थे। इनमें से एक विधायक ने इस्तीफा जरूर दिया, लेकिन उसके बाद हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने सत्ताधारी दल को हराकर फिर से अपनी ताकत साबित की।
केजरीवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि जहां-जहां जनता ने हमारे प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा, वहां किसी ने भी जनता के साथ गद्दारी नहीं की। गद्दारी केवल उन लोगों ने की जिन्हें पार्टी ने सीधे ऊपरी सदन की कुर्सी सौंपी थी। यही वजह है कि अब पार्टी किसी भी नेता के ट्रैक रिकॉर्ड और वफादारी की पूरी पड़ताल के बाद ही उसे उच्च सदन भेजने का फैसला करेगी।












































