Lalu money laundering case: आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके पूरे परिवार के लिए अदालत से एक बहुत बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित आईआरसीटीसी (IRCTC) होटल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप (फ्रेम चार्जेस) तय करने का आदेश जारी कर दिया है।
अदालत के इस कड़े रुख के बाद साफ है कि आने वाले दिनों में लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 3 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।
‘लालू के कहने पर टेंडर में हुई हेरफेर’ — अदालत की सख्त टिप्पणी| Lalu money laundering case
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने दो टूक कहा कि पूर्व रेल मंत्री के तौर पर लालू प्रसाद यादव द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करने का गंभीर संदेह पैदा होता है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि रेलवे के तत्कालीन अधिकारियों ने रांची और पुरी के होटलों को पट्टे (लीज) पर देने के लिए लालू यादव के कहने पर टेंडर की शर्तों और प्रक्रिया में हेरफेर की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी साफ किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि जांच राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित थी। जज ने कहा कि ‘लारा प्रोजेक्ट्स’ को जिस तरीके से कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया, उससे खुद लालू यादव की भूमिका पर गहरा शक गहराता है।
लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत इन पर तय होंगे आरोप
अदालत ने जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए हैं, उनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी और सुजाता होटल्स के नाम शामिल हैं। इस आदेश से पहले, 13 अक्टूबर 2025 को भी इसी अदालत ने सीबीआई वाले केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए थे।
क्या है पूरा आईआरसीटीसी घोटाला?
यह पूरा मामला उस समय का है जब वर्ष 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए नियमों की अनदेखी करते हुए रांची और पुरी में मौजूद IRCTC के दो बड़े होटलों का ऑपरेशन सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दिया था। आरोप है कि इस टेंडर हेरफेर के एवज में करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन बाजार भाव से बेहद कम दाम पर एक ऐसी निजी कंपनी को ट्रांसफर कराई गई, जिसके सीधे तार राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से जुड़े थे। इसी प्राथमिक जांच के आधार पर बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत केस दर्ज किया था।
राजनीतिक साजिश का दावा खारिज
यादव परिवार शुरू से ही इस पूरे केस को राजनीतिक साजिश और दुर्भावना से प्रेरित बताता रहा है। उनका कहना रहा है कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और एजेंसियों के पास कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। हालांकि, अदालत में पैरवी के दौरान जब बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं, तो कोर्ट ने उन्हें दरकिनार करते हुए ट्रायल को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया। 3 अक्टूबर से शुरू होने वाली अगली प्रक्रिया लालू परिवार की राजनीतिक और कानूनी राह को और कठिन बना सकती है।












































