Tukaram Mundhe News: महाराष्ट्र में खुले खाने के तेल की बिक्री को लेकर चल रही खींचतान में अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दखल दिया है। सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंडे द्वारा खुले तेल की बिक्री पर लगाई गई रोक पर सरकार ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। व्यापारियों की परेशानी और आम जनता की जेब को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने कारोबारियों को अगले 12 महीने यानी एक साल की राहत दी है। इस अवधि में दुकानदार खुले तेल की बिक्री जारी रख सकेंगे, लेकिन इसके बाद सरकार के कड़े नियमों से कोई छूट नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, कैबिनेट बैठक में 2029 तक महाराष्ट्र को पूरी तरह नशामुक्त करने के लिए एक ऐतिहासिक और व्यापक पॉलिसी को भी हरी झंडी दे दी गई है।
तुकाराम मुंडे की सख्ती से क्यों सहम गए थे कारोबारी? Tukaram Mundhe News
दूध और मिलावटी पनीर के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने खुले खाद्य तेल पर शिकंजा कसा था।
- रोक की असली वजह: खुले तेल में मिलावट, बिना लाइसेंस कारोबार, गलत लेबलिंग और घटिया तरीके से भंडारण की शिकायतें मिल रही थीं। खुले में बिकने वाले तेल का स्रोत (सोर्स) पता लगाना ग्राहकों के लिए लगभग नामुमकिन होता है।
- व्यापारियों की चिंता: अचानक लगे इस बैन से छोटे परचून दुकानदारों और पारंपरिक तेल कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। उनका कहना था कि रातों-रात पैकेजिंग सिस्टम अपनाना उनके बस की बात नहीं है।
जब व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला, तब फडणवीस ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक साल का समय देने का फैसला किया।
FDA और कारोबारियों की बनेगी संयुक्त कमेटी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया कि खाद्य तेल की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि खुले तेल को लेकर नियम 2011 में ही बन चुका था। सरकार का मकसद लोगों को शुद्ध तेल मुहैया कराना है, लेकिन साथ ही जमीनी हकीकत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज भी मजदूर और गरीब तबके का एक बड़ा हिस्सा जरूरत के हिसाब से खुला तेल खरीदता है।
इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सरकार एफडीए अधिकारियों और व्यापारियों की एक साझा कमेटी बनाएगी। यह कमेटी तय करेगी कि पारंपरिक कारोबारियों को पैकेजिंग, लाइसेंस और सुरक्षित भंडारण के नियमों को अपनाने के लिए किस तरह की तकनीकी मदद या बदलाव की जरूरत है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि 12 महीने बाद कोई दूसरी मोहलत नहीं मिलेगी। वहीं, होटलों और रेस्टोरेंट में बार-बार खौलाए जाने वाले (री-हीटेड) तेल पर एफडीए की नजर और सख्ती पहले की तरह जारी रहेगी।
2029 तक महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने का बड़ा रोडमैप
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत साल 2029 तक पूरे महाराष्ट्र को ड्रग्स फ्री बनाने का कड़ा संकल्प लिया।
- सख्त पॉलिसी को मंजूरी: प्राकृतिक और सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध उत्पादन, खेती, तस्करी, बिक्री और सेवन को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक नीति मंजूर की गई।
- टास्क फोर्स से तालमेल: राज्य के सभी विभागों को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- नोडल अफसर: मंत्रालय स्तर पर आपसी तालमेल मजबूत रहे, इसके लिए प्रत्येक संबंधित विभाग में उपसचिव (Deputy Secretary) स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा।














































