Crude oil price hike: मध्य पूर्व में भड़की युद्ध की चिंगारी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में आग लगा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव के तेज होते ही दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से क्रूड सप्लाई रुकने का खतरा पैदा हो गया है। इस सप्लाई रिस्क की वजह से मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा का जोरदार उछाल देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कतर और ओमान की मध्यस्थता बेअसर होने और तेल टैंकरों पर ताजा हमलों ने हालात को बेहद नाजुक बना दिया है, जो आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को महंगाई के नए चक्रव्यूह में धकेल सकता है।
कीमतों में उछाल: पिछले हफ्ते का नुकसान एक झटके में कवर| Crude oil price hike
सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते मंगलवार को तेल अनुबंधों में तेज खरीदारी देखी गई:
- ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): वायदा भाव में 17 डॉलर यानी करीब 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 92.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।
- डब्ल्यूटीआई (WTI): अमेरिकी कच्चे तेल में 48 डॉलर यानी 2.89 प्रतिशत की तेजी आई और यह 88.24 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा।
इस जबरदस्त उछाल के साथ दोनों बेंचमार्क अनुबंधों ने पिछले हफ्ते दर्ज की गई अधिकांश गिरावट की भरपाई कर ली है।
ट्रंप की चेतावनी बनाम ईरान की शर्त
जुलाई के आखिरी दिनों के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीधे हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने गेंद अमेरिका के पाले में डालते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन जून के अस्थायी शांति समझौते की शर्तों पर वापस लौटता है, तो ईरान भी अपने कदम पीछे खींचने को तैयार है। पीवीएम (PVM) के विश्लेषक जॉन इवांस का कहना है कि दोनों तरफ से दागी जा रही मिसाइलें इस बात का साफ संकेत हैं कि यह तनाव इतनी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।
होर्मुज संकट: 14 जहाजों की जगह सिर्फ 5 की आवाजाही
इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ है, जहां से दुनिया की कुल खपत का करीब 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) गुजरती है। सोमवार को सऊदी अरब का कच्चा तेल ले जा रहे दो बड़े तेल टैंकरों पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली एजेंसी ‘केप्लर’ (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, इस घटना के बाद होर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या घटकर महज 5 प्रतिदिन रह गई है, जबकि 10 दिनों का औसत 14 जहाज रोजाना था। हैरानी की बात यह है कि इन पांच जहाजों में एक भी तेल टैंकर शामिल नहीं था।
वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर
कॉमर्जबैंक और सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन के अनुसार, कतर और ओमान की शांति कोशिशों को इस नए टकराव से बड़ा झटका लगा है। रॉयटर्स के ताजा पोल में पहले ही अनुमान लगाया गया था कि समुद्री परिवहन में बाधाओं के चलते 2026 में क्रूड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर टिका रहेगा। अगर होर्मुज का यह संकरा समुद्री रास्ता लंबे समय के लिए ब्लॉक होता है, तो 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर दूर नहीं रहेगा, जिससे पूरी दुनिया में ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ना तय है।














































