Royal history of India: वैसे तो आकड़े कहते है कि शराब टॉलरेट करने में पंजाब के पुरुष काफी निचले स्तर पर है लेकिन जब शराब को लेकर शौक की बात होती है तो उनका टक्कर कोई नहीं। अब आप फिल्म यमला पगला दीवाना में सिख जट बने सनी देओल को ही ले लीजिए, जो गिलास या मग से नहीं, बल्कि सीधा बाल्टी से ही पीते है और ये शौक नए नहीं है, बल्कि दशकों से चले आ रहे है, जहां कोई ब्रांडेड पीना पसंद करते थे तो किसी के लिए विदेश से शराब आ आती थी, लेकिन क्या आप ये जानते है कि एक सिख राजा ऐसे भी हुए जिनके लिए न केवल विदेश से स्पेशल मंगाया जाता था बल्कि वो अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शराब में दूध मिलाकर पीते थे। क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर वो दूध मिलाकर पियेंगे तो वो जितना चाहे उतना पिए, उनके लीवर को कुछ नहीं होगा। जी हां, ये थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन पटियाला रियासत के महाराजा भूपिंदर सिंह के अनोखे अंदाज ने आज पटियाला पैग को भी मशहूर बना दिया। अपने इस लेख में हम महाराज भूपिंदर सिंह की उन आदतों के बारे में जानेंगे, जिसके लिए वो पूरी दुनिया में फेमस हो गए।
महाराजा भूपिंदर सिंह के अतरंगी शौकों का सच
जब अंग्रेज इंडिया आए तो उन्होंने देखा कि इंडिया के ज्यादातर रियासतों में राज करने वाले राजाओं के बड़े बड़े और अनोखे शौक हुआ करते थे, ऐसे में उनके शौक को और तराशने का काम किया अंग्रेजी हुकूमत ने। उन्होंने भारतीय को ऐसी ऐसी वस्तुओं से अवगत कराया जिनके बारे में उन्हें पता नहीं था, जिनमें से एक थी विदेश की महंगी और ब्रांडेड शराब। 1849 में अंग्रेजों ने पंजाब को पूरी तरह से हथिया लिया था लेकिन इतने बड़े पंजाब पर शासन करने के लिए उन्हें वहां से स्थानीय और विश्वसनीय राजाओं की जरूरत थी। वो उन्हें महंगे तोहफे दे कर ये जताते की वो केवल उनकी मदद चाहते है राजा तो वो ही है। इसी ही स्थिति थी पटियाला के राजा महाराज भूपिंदर सिंह की।
ठाठ बाठ दिखाने के लिए वो फिजूल खर्ची
12 अक्टूबर 1891 का पटियाला के फुलकियान वंश में जन्मे महाराजा भूपिंदर सिह को सर भूपिंदर सिंह भी कहा जाता है। लाहौर के ऐचिसन कॉलेज में शिक्षा हासिल करने वाले महाराजा भूपिंदर सिंह के पिता की मृत्यु होने के बाद मात्र 9 साल की उम्र में ही उन्हें पटियाला की गद्दी दी गई.. हालांकि वो बचपन से ही भोग विलास में लीन रहने लगे.. उनके दरबार में अंग्रेजो की तरफ से बड़े बड़े मंहगे तोहफे भेजे जाते। जिससे उनकी निष्ठा ब्रिटिश हुकुमत की तरफ बनी रही। महाराजा ने भी उन्हें निराश नहीं किया। कम उम्र में गद्दी मिलने के कारण अपनी ठाठ बाठ दिखाने के लिए वो फिजूल खर्ची भी जमकर करते थे। उन्हें दो चीजो को बहुत शौक था.. पहली मंहगी शराब औऱ दूसरा क्रिकेट खेलने का। लेकिन वो ये भी जानते थे कि जितना वो शराब पीते है उनके जिंदगी ज्यादा लंबी नहीं चलने वाली, इस कारण उन्होंने एक बेहद अनोखा तरीका निकाला,, कहा जाता है कि महाराजा भूपिंदर सिंह शराब से ही सुबह का कुल्ला किया करते थे।
स्कॉच व्हिस्की औंर दूध का अजीब कॉम्बिनेशन
मार्च, 1938 को फेमस ब्रिटिश पत्रिका ‘द लंदन मिरर’ में महाराजा भूपिंदर सिंह को लेकर एक आर्टिकल छपा था..ये आर्टिकल 23 मार्च 1938 में दिल का दौरा पड़ने के कारण महाराज की मृत्यु के बाद उनके सम्मान में लिखा गया था.. उनकी निधन के बाद 5 दिनों का शौक आयोजित किया गया था, वो 46 साल के थे.. आर्टिकल में बताया गया कि महाराजा खाने पीने के इतने शौकिन थे कि रोजाना उनके खाने में लेविस खाना, मांसाहार, और शराब तो जरूर होती थी। लेकिन वो अपने सुबह की शुरुआत भी एक पिंट ऑफ स्कॉच व्हिस्की औंर दूध” से करते थे.. व्हिस्की के साथ दूध का कनेक्शन आपको भी अटपटा लगता है, क्योंकि डॉक्टर्स तो कहते है कि शराब पीने के बाद भी दूध नहीं पीना चाहिए। मगर महाराजा इसके उलट सोचते थे, उन्हें लगता था कि अगर वो व्हिस्की के साथ दूध मिला कर पियेंगे तो उनके लीवर को शराब से होने वाले नुुकसान से बचाया जा सकता है। ये एक “राजसी देसी इलाज ही था, जिसकी सलाह उ्न्हें उनके वैद्य और अंग्रेजी डॉक्टरो ने दी थी। जिनका मानना था कि इससे खाली पेट पीने से इसकी जलन और तासीर की गर्मी कम होगी। वो विदेशी विलासिता के इतने आदी हो चुके थे कि मिल्क पंच को काफी पसंद करते थे, जिसमें रम, ब्रांडी, दूध, मसाले सभी मिक्स करके डाला जाता था।
महाराजा के लिए यूरोप से आती थी स्कॉच व्हिस्की
पीने की शौकिन महाराजा एक बड़े बर्तन में शराब भरवाते थे., जिसे पटियाला पैग कहा गया, वो खुद भी उसी से पीते औऱ दरबारियों को भी पिलाते थे। रोजाना रात को नशे में विदेशी महिलाओं के साथ नाचना गाना उनका एक बड़ा शौक था। कहा जाता है कि महाराजा का पिया जाने वाला स्कॉच व्हिस्की और शैंपेन सीधा यूरोप से आते थे और एक बार में ट्रेन भर भर के शराब पटियाला पहुंचा करता था.. यहां तक कि उनके दरबार में आने वाले मेहमानों के साथ भी वो शराब पीने की शर्त लगाते थे। उनकी मेहमान नवाजी धीरे धीरे पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई थी। हालांकि उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी वो 46 साल की उम्र में ही दुनिया से चले गए.. लेकिन वो जितने भी दिन जिये, पूरे राजसी ठाठ बाट से जिये।। आपको ये अनोखे शौक की कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।












































