Guru Nanak Dev Ji ने चप्पल से हटाया पत्थर, फूट पड़ा 500 साल पुराना झरना! जानिए पूरी कहानी

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 26 अगस्त 2026, 10:00 PM Updated: 26 अगस्त 2026, 10:00 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Guru Nanak Dev Ji : मन चंगा तो कठौते में गंगा.. ये बोल थे कर्म और परोपकार को पूजने वाले संत रविदास जी के.. जिन्होंने भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिकता के उस लेवल को पार किया जो बड़े बड़े संत नही कर पाते.. संत रविदास जी, एक निचली जाति का होने के बाद भी भक्ति परंपरा को लागू कर उन्होंने साबित किया कि ईश्वर पर किसी एक का अधिकार नहीं है। आपका मन शुद्ध हो तो आपके मन में ही ईश्वर है.. यहीं कारण था कि सिखों के पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी संत रविदास जी की बाणी को शामिल किया गया था.. श्री गुरु ग्रंथ साहिब का एक एक शब्द उस परम पिता परमेश्वर का आदेश है। अगर आपका मन पवित्र है.. तो आप पहाड़ से भी दूध की धारा निकाल सकते है। बंजर धरती से भी पानी का फव्वारा फूट सकता है.. जैसे कि कर्नाटक के बीदर में हुआ था..जहां आदि गुरु गुरु नानक देव जी की खड़ाऊ की एक मार से ही एक चट्टान ढह गई,, और सालों से प्यासी धरती को फिर से पानी की शीतलता मिली। अपने इस लेख  में हम झीरा साहिब में स्थित अमृत कुंड की कहानी जानेंगे।

और पढ़े: क्या धुलने के बाद दोबारा बिकते हैं लग्जरी होटलों के पुराने तौलिए? जानिए भारत के 7000 करोड़ के एक्सपोर्ट का सच| Hotel Towel Recycling Process

गुरु नानक देव जी ने की सिख पंथ की शुरुआत

सिखो के पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने जब सिख पंथ की शुरुआत की थी, तब ये एक धर्म नही बल्कि एक क्रांतिकारी विचारधारा थी… जो जाति धर्म से उठ कर सबको बराबरी समझने के लिए प्रेरित करती थी..गुरु साहिब ने लोगो को पाखंड औऱ अंधविश्वास से निकल कर एक ईश्वर पर भरोसा करने का संदेश दिया.. उन्होंने बताया कि सभी एक ईश्वर की संतान है, इसलिए जाति के नाम पर, धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की विकृत मानसिकता से बाहर निकलकर सबको बराबर समझने पर जोर दिया था.. अपने इन विचारों को ही वो दुनिया के कोने कोने में पहुंचाने के लिए उन्होंने करीब 28 सालो तक यात्रायें की थी। जिसमें वो दुनिया के चारों दिशाओं में यात्रा करने गए थे, इसी दौरान अपनी दूसरी उदासी जो कि 1510ई से लेकर 1515 तक हुई थी, उसमें वो दक्षिण की यात्रा पर गए थे। जिसमें वो कर्नाटक के बीदर शहर में भी पहुंचे थे। जहां वो दो मुसलमान संत पीर जलालुद्दीन और याकूब अली से मिलने के लिए पंहुचे थे।

गुरु नानक देव जी का चमत्कार

गुरु साहिब के साथ भाई मरदाना भी थे.. चुंकि गुरु साहिब के लिए केवल मानवता ही धर्म थी इसलिए वो बीदर के बाहरी हिस्से में जहां, मुस्लिम फकीरों की झोपड़ियाँ हआ करती थीं, उनके पास ही रूकने का फैसला करते है। मुसलमान फकीर गुरु साहिब औऱ भाई मदराना के भजनो से इतने मोहित हो गए कि वो गुरु साहिब के जानने और उन्हें सुनने के लिए गुरु साहिब के आसपास जमा होने लगे। बीदर एक ऐसा इलाका था, जहां नमी कम और सूखा ज्यादा था। लोगों को वहां एक एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ता था। कुछ दिनों तक गुरु साहिब ने लोगो की परेशानी को देखा औऱ उसे महसूस किया.. गुरु साहिब ने देखा कि पानी के लिए लोगो ने कुआं खोदने की भी कोशिश की, लेकिन या तो पानी निकला ही नहीं या फिर जो पानी निकला वो पूरी तरह से गंदा था, जिसे पिया ही नहीं जा सकता था।

गुरु नानक देव जी से जुड़ा झरना

गुरु साहिब का मन लोगो की समस्याओं और उन्हें प्यास के तड़पता देखकर बैचेन हो गया। बीदर एक ऐसा स्थान था जहां के लोगो ने गुरु साहिब को बेहद सम्मान दिया था। इसलिए गुरु साहिब ने उनका उद्धार करने के लिए उन्होंने अपनी लकड़ी की खड़ाऊ, जिसे वो पहना करते थे,  सत् करतार का जप करते हुए उससे अपने आसपास के पत्थरो और मलबे को हटा कर साफ किया.. जैसा ही वो स्थान साफ हुआ, वहां से मीठे पानी का झरना फूट पड़ा। करीब 500 सालो से बीदर में आज भी ये झरना मौजूद है, जिसे स्थानीय लोग नानक झीरा करते है। झीरा जिसका अर्थ है धारा.. वो धारा जो नानक ने बहाई। ये एक चमत्कारिक प्राकृति झरना है, जो सिख गुरुओ के महान परोपकार और त्याग का प्रतीक है।

नानक झीरा के पास ही गुरुद्वारा नानक झीरा साहिब का निर्माण कराया गया जो कि 1948 में बनाया गया था। बीदर सिख धर्म को मानने वाले के लिए बेहद खास माना जाता है, बीदर में ही दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के पंच प्यांरो में से एक भाई साहिब सिंह का भी जन्म हुआ था। जो कि नाई जाति से थे। लेकिन उन्होंने गुरु सेवा में अपनी जीवन गुजरते के लिए दसवे पातशाह को चुना। बीदर आने वाले आंगतुको को यहां आकर ऐसा महसूस होता है कि जैसे खुद गुरी साहिब यहां कि हवाओं में मौजूद है। अगर आप कभी बीदर जाते है गुरूद्वारा झीरा साहिब जरूर जायें और अपना अनुभव हमें बहुत शेयर करते थे।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

Recent News

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds